छोटे छोटे डिबिया डबकी चुरे भात, तै दिल्ली मै लंका कैसे करी बात...छत्तीसगढ़ी गीत-

ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं :
छोटे छोटे डिबिया डबकी चुरे भात-
तै दिल्ली मै लंका कैसे करी बात-
रामा कैसे करी बात लोलो कैसे करी बात-
छोटे छोटे डिबिया डबकी चुरे भात-
तै दिल्ली मै लंका कैसे करी बात-
रामा कैसे करी बात लोलो कैसे करी बात...

Posted on: Aug 12, 2018. Tags: CHHATTISGARHI MEWALAL DEWANGAN SONG SURGUJA CHHATTISGARH VICTIMS REGISTER

केंजट-केंजट दीदी सीजीनेट ता माठा...गोंडी सीजीनेट गीत

ग्राम-ताराडांड, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से बाबूलाल नेटी सीजीनेट के ऊपर आधारित एक गोंडी गीत सुना रहे है:
केंजट-केंजट दीदी सीजीनेट ता माठा-
केंजट-केंजट नोनी सीजीनेट ता माठा-
रिकॉर्डिंग रास कीसी इमटू-
नार तुन केंचाट इमटू-
सीजीनेट ता नम्बर-
शून्य आठ शून्य सयुंग रंड शून्य-
आठ मुंद शून्य नंबर तुन इर्रा इमटू-
रिकॉर्डिंग रास कीसी इमटू...

Posted on: Aug 11, 2018. Tags: ANUPPUR BABULAL NETI GONDI SONG MP

कोन बने सजा बीजा कोन बने धवारा रे...डोमकच गीत

ग्राम-बेलकच, पोस्ट-रमकोला, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक एक डोमकच गीत सुना रहे है:
कोन बने सजा बीजा कोन बने धवारा रे-
कोन बने सराई फूला सिकरी धाराले सोना-
सजा बने सजा बीजा बीजा बने धवारा रे-
माझे बने सराई फूला सीकरी धराले-
सजा बने सजा बीजा बीजा बने धवारा रे-
कोन बने सजा बीजा कोन बने धवरा रे...

Posted on: Aug 10, 2018. Tags: CG DOMKACH SONG MEWALAL DEWANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER

जिसकी सांसे और पसीना जन हित में लग जाए, वही वीर मेरी राखी बंधवाने हाथ बढाए...राखी गीत-

ग्राम पंचायत-रिमारी, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से लालजी वैश्य रक्षाबंधन के अवसर पर एक देशभक्ति कविता सुना रहे हैं:
जिसकी सांसे और पसीना जन हित में लग जाएं-
वही वीर मेरी राखी बंधवाने हाथ बढाए-
जो युग की पीड़ा को समझे और जरूरत जाने-
फिर उठ के अनुरूप जगत को गति देने की ठाने-
जिसका जीवन नवल कुजनकी, आज्ञा हित बन जाए-
जो अपने कामो से जोड़े, जिसकी लिखी लकीरें...

Posted on: Aug 09, 2018. Tags: LALJI VAISHYA SIDHI MADHYA PRADESH SONG VICTIMS REGISTER

हमारे गाँव का नाम तल्लाबेड़ा कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी भाषा में)

ग्राम-तल्लाबेड़ा, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से ग्रामीण मंगूराम, लक्ष्मण सिंह और श्यामलाल सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा के अंकित पड़वार को बता रहे है कि आज उनके गाँव में लगभग 100 घर है और बहुत वर्ष पहले उस गाँव का नाम तल्लाबेड़ा कैसे पड़ा| बताया जाता है कि वहां पर शेर का बहुत आतंक था जो किसी भी जानवर का शिकार करता था और उसका सिर को लाकर यहाँ गाँव में छोड़ता था, गोंडी भाषा में सिर को तल्ला कहा जाता है, इसलिए गाँव का ये नाम दिया गया, यह नाम उनके पूर्वजों ने दिया है पूर्वजों के समय में उस गाँव में लगभग 6-7 घर ही थे, जो आज बढ़कर 100 घर है | अंकित पडवार@9993697650.

Posted on: Aug 09, 2018. Tags: CG GONDI KANKER LAKSHAN SINGH MANGURAM SHYAM LAL

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