एक था बेसहारा उसका नही कोई किनारा...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैलाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है किस्मत ने पल्टा खाया :
एक था बेसहारा उसका नही कोई किनारा-
उसका साथ था कटोरा, दिनभर फिरता मारा-मारा-
लोगो ने उसको दु तकारा फिर वह हिम्मत ना हारा-
किस्मत ने पलटा खाया, उसने एक सिक्का पाया-
उसकी उसने चना बिसाया, आधा बेचा आधा खाया-
उसने खूब मुनाफा कमाया, फिर उसने अपना घर बसाया...

Posted on: Sep 26, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

शंकर सोढा रे, सिंगार भोले कर रहे सोढा रे...शिव भजन गीत

ग्राम-बिहारपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मुकुंदलाल जैसवाल एक शिव भजन गीत सुना रहे हैं :
शंकर सोढा रे, सिंगार भोले कर रहे सोढा रे-
अंग बबुत सिंगार करे,कानन बिछु सोहे-
गले में नाग की माला सोहे, भुतन संग नाचे-
गली-गली में शोर मची है-
सावन में हर घर में भोले आये-
सिंगार भोले कर रहे सोढा रे-
शंकर सोढा रे,सिंगार भोले कर रहे सोढा रे-
अंग बबुत सिंगार करे, कानन बिछु सोहे...

Posted on: Sep 26, 2018. Tags: BHAJAN CG MUKUNDALAL JAISWAL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER

स्वास्थ्य स्वर : नीम की पत्तियों के औषधीय गुण और प्रयोग-

ग्राम-सेतगंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी नीम के औषधीय गुण और उपयोग को बता रहे हैं, नीम मनुष्य के शरीर में उत्पन्न होने वाली अनेक बीमारियो मे लाभकारी होता है, चर्मरोग में बिस्तर पर नीम की पत्तियां बिछाकर सोने, पत्तियों को पानी में उबालकर नहाने, सुबह पत्तियों का 10 ग्राम रस पीने से लाभ हो सकता है, सांथ ही नीम के तेल या रस से शरीर का मालिस भी कर सकते हैं, नीम के 8 से 10 पत्तो को दही में पीसकर लेप करने से शरीर का दाग मिट सकता है, इसका रस खून साफ करने और बढाने में मदद करता है, इसलिए नीम का 5 से 10 ग्राम रस प्रतिदिन सेवन कर सकते हैं : रमाकांत सोनी@9424167683.

Posted on: Sep 26, 2018. Tags: CG HEALTH MUNGELI RAMAKANT SONI SONG SWASTHYA SWARA VICTIMS REGISTER

जाति बाती पेको रेलो रो, जाति बाती पेको रेलो ले...गोंडी गीत-

ग्राम पंचायत और तहसील-दरभा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से शनि उसेंडी एक गोंडी गीत सुना रही हैं :
रे रे लोयो रेला रे रेला, रे रे लोयो रेला रे रेला-
जाति बाती पेको रेलो रो, जाति बाती पेको रेलो ले-
गुटात पुंगर केमा जलयारो, साय सिलेदार साय देलो साय-
ये जाति कुंवार पेको रेलो रो, जाति कुंवार पेको रेलो रो-
गुटात पुंगर केमा जलयारो, साय सिलेदार साय बेलो साय...

Posted on: Sep 26, 2018. Tags: BASTAR CG DARBHA GONDI RADHA KACHALAM SONG

पर्वतो के गोद से निकलकर मैं नदी नाला बन जाती हूँ...प्रकृति कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी प्रकृति पर एक कविता सुना रहे हैं :
पर्वतो के गोद से निकलकर मै नदी नाला बन जाती हूँ-
आसमान से धरती पर गिर कर मैं पानी कहलाती हूँ-
इतनी उचाई से गिरकर भी मै शुद्ध स्वच्छ रहती हूँ-
चट्टान को भी काटकर अपनी राह बना लेती हूँ-
टेढ़ी मेढ़ी बहकर भी मै बड़ी भोली भाली हूँ-
सबकी प्यास बुझकर भी मै गंदगी कहलाती हूं...

Posted on: Sep 26, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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