तरी आहे तरना ऊपर नई आय कोई, एकल जुगा कवन विधि होई...गीत-
ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
तरी आहे तरना ऊपर नई आय कोई-
एकल जुगा कवन विधि होई-
डिबा डिबा रे डिबा, डिबा मंगुवाए-
कोन सेंदुर लहार मंगुवाए, डिबा डिबा रे डिबा, डिबा मंगुवाए-
गिनती सेंदुर लहायर मनुआए-
रामा हायर मनुआए, लोलो हायर मनुआए-
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: MEWALAL DEWANGAN SONG SURJUJA CHHATTISGARH VICTIMS REGISTER
गांव में 95 घर की बस्ती है, बिजली नहीं है, हम लोगों को अंधेरे में रहना पड़ता है, कोई नहीं सुनता...
ग्राम पंचायत-मसनारा, ब्लाक-ओडगी, जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से गाँव के साथी विजेन्द्र सिंह आयाम, ललन सिंह और शिवप्रसाद बता रहे है कि देश आजाद हुए इतने साल हो गए पर उनके गाँव में बिजली नही लगी है 90-95 घर की बस्ती है लोगों को अँधेरे में रहना पड़ता है उसके लिए ग्रामसभा और ग्राम सुराज में लिखित रूप से आवेदन भी किये है तो बोलते हो जायेगा लेकिन आज तक कोई ध्यान नही दे रहे है, इसलिए साथी सीजीनेट सुनने वाले साथियों से मदद की अपील कर रहे है कि इन नम्बरों में बात कर बिजली लगवाने में मदद करें: बिजली विभाग@9584990954, कलेक्टर@9826443377, सचिव@8225017360. राजेन्द्र प्रसाद@7771828693.
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: CG ELECTRICITY LALAN SINGH SHIVPRASAD SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER VIJENDRA SINGH AYAM
इंसान से नफरत करते हो, भगवान को तुम क्या पाओगे...कविता-
ग्राम-रिमारी, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से लालजी वैश्य एक कविता सुना रहे हैं :
इंसान से नफरत करते हो भगवान को तुम क्या पाओगे-
इंसान को तुन अपना ना सके भगवान को क्या पाओगे-
इंसान प्रभु का बंदा है नफरत ही नरक का फंदा है-
इन्सान को धोखा देकर के भगवान को तुम झुठलाओगे-
इंसान की इज्जत करना ही भगवान की पूजा होती है-
इंसान को अपमानित करते, प्रभु को न मान दे पाओगे-
खुद अपने दोष छुपाते हो, औरो को दोष लगाते हो...
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: LALJI VAISHYA POEM SIDHI MADHYA PRADESH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो के झुरमुटो से आती है पैगाम, मैं शांति की प्रतीक हूँ मुझसे ही तुम महान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
पेड़ो के झुरमुटो से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूँ मुझसे ही तुम महान-
मुझसे तुम हो महान, तुमसे मै नही-
मै तो प्रकृति की देन हूँ,
पवन मुझे उबलाती है, पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोको से बिखरकर, अपने आप उग आती हूँ...
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम...पेड़ पर कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी पेड़ो पर आधारित एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूं उससे तुम महान-
तुमसे मैं नही मैं तो प्रकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोकों से बिखर कर अपने आप उगती हूँ-
मेघों को मैं ही बुलाकर जमकर बारिश कराती हूँ-
मुझसे भी ये ऊँचे-ऊँचे पर्वत में नदी नाला बनती हूँ...

