ओरे जो गेंदा रामानुका बावे रे दाईने भुजा फरके...फागुन सुमरनी गीत

ग्राम-भाडी, ब्लाक-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी के साथ में पनवेश्वर एक फागुन सुमरनी गीत सुना रहे है:
ओरे जो गेंदा रामानुका-
बावे रे दाईने भुजा फरके-
एके तो अवय अंता जानिला-
पिपरी जी को धाम-
देह्गता या से झुंडा हरना-
रे कुमडिया के देव-
अकरा में स्वती ला बलाऊँ...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: CG FAGUN GEET ROOPLAL MARAVI SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER

उनको मालूम न कर, सताने की हद...रचना

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुजीत कुमार की रचना सुना रहे है :
उनको मालूम न कर सताने की हद-
आप भी रखिए अपनी दीवानगी की हद-
इससे पहले की कोई रुसवाई हो-
जानिए इश्क को जनाते की हद-
अश्क बह जाना भी कभी, जरुरी है-
उनको मालूम न कर, सताने की हद...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

ज्ञान दीप जलाकर बहना, करना रक्षा अपने हक़ की...बेटियों पर कविता

ग्राम-पडेग़ाव, तहसील-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल कवि सोनवानी
‘बेटियों’ को लेकर एक कविता सुना रहे है :
ज्ञान दीप जलाकर बहना, करना रक्षा अपने हक़ की-
फिर कभी न कहेगी दुनिया, बेटी पढ़कर क्या करेगी-
नारी धर्म गुणों की खान, कोई कमी नही व्यवहार का-
फ़िर भी बितता कष्ट में जीवन, ताने सहती ससुराल का-
शिक्षा को तुम ढाल बनाकर, ख़त्म करो रुड़ी संस्कार का-
कड़वा घूट कल पढ़े ना पीना, इन अत्याचारों का...

Posted on: Feb 14, 2019. Tags: BAALKAWI SONWANI SONG VICTIMS REGISTER

बाल सभा में बोल रहे है थे, मैडम जी एक बार...कविता -

ग्राम-पडेगाँव, तहसील-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से सामाजिक कार्यकर्ता व बाल कवि डॉक्टर.पी.एस.पुष्प स्वच्छता को लेकर स्वरचित एक कविता सुना रहे है :
बाल सभा में बोल रहे है थे, मैडम जी एक बार-
लाभ हमेशा स्वछता से, इस पर करे विचार-
राजू उठकर हाथ जोड़कर, बोला वाह मेडम जी-
साफ़ सफ़ाई पर निर्भर है, सुन्दर भारत मेडम जी-
स्वच्छ शहर सुन्दर सी सड़के, देता है यह साफ़ सफ़ाई-
पास बुलाता शुद्ध हवा को, स्वच्छ जल देता है भाई...

Posted on: Feb 13, 2019. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

भूख को रोटी दाल पै आना पड़ता है, जानबूझकर जाल पै आना पड़ता है...गज़ल

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार महेश कटारे सुगम की गज़ल सुना रहे है:-
भूख को रोटी दाल पै आना पड़ता है-
जानबूझकर जाल पै आना पड़ता है-
आसमान में चाहे जितना भी उड़ ले-
पंछी को फिर डाल पै आना पड़ता है-
ऐश करेगा कब तक कोई रहमत पर-
लौट के अपने हाल पै आना पड़ता है-
सच्चाई इक हद तक ढाँपी जाती है-
इक दिन तो पड़ताल पै आना पड़ता है-
अनदेखा कब तलक करोगे रिश्तों का-
जल्दी इस्तकबाल पै आना पड़ता है...

Posted on: Feb 13, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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