स्वास्थ्य स्वर : गर्मी के दिनी में लू से बचने के घरेलू नुस्खा -
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी लू से बचने का घरेलू नुश्खा बता रहे हैं | बहार निकलने से पहले अच्छे से पानी पीकर निकले| जेब में एक छोटी प्याज रखना चाहिये | इससे प्याज शरीर के संपर्क में रहता है| जिससे तापमान कम होता है| सर पर टोपी या गमछा लगाकर निकलें | धूप से आने के बाद गुड़ खाकर पानी पीने से लू नहीं लगती है, और शरीर में ठंडक आती है| कड़ी धुप से बचें| खाली पेट धूप में न जायें| मौसमी फल का उपयोग करें| तरल पदार्थ का सेवन करें| एच डी गांधी@9111061399.
Posted on: Apr 13, 2019. Tags: CG HD GANDHI HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
सजगी पुलो पुली गेला, सबू बाटे झूली गेला...गीत-
ग्राम पंचायत-सामर डोंगरी, विकासखण्ड-दरभा, जिला-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से कविता, चंचला और दीपाली एक गीत सुना रही हैं :
सजगी पुलो पुली गेला, सबू बाटे झूली गेला-
ए सरगी फूलो रे, काम घटा झूलो रे-
आम फूलो फूली गेला, सबो बाटे झूली गेला-
ईमली फूलो फूली गेला, सबो बाटे झूली गेला...
Posted on: Apr 13, 2019. Tags: CG DASAMI KASHYAP JAGDALPUR SONG VICTIMS REGISTER
चल कूयु प्यार करब इतना की दुनिया याद करे रे...गीत-
ग्राम पंचायत-सामर डोंगरी, विकासखण्ड-दरभा, जिला-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी दसमी कश्यप और ममता रासमिता एक गीत सुना रही हैं :
चल कूयु प्यार करब इतना की दुनिया याद करे रे-
चल कूयु प्यार करब इतना की दुनिया याद करे रे-
न तोके लाज शरम, न तोके आया सनम-
कर बिन बदनाम होगे...
Posted on: Apr 13, 2019. Tags: CG DASAMI KASHYAP JAGDALPUR SONG VICTIMS REGISTER
दो जंवा दिलो का गम दूरियां समझती हैं...गीत-
खैरागढ़ संगीत विश्व विद्यालय (छत्तीसगढ़) से संतलाल पाठक एक गीत सुना रहे हैं :
दो जंवा दिलो का गम दूरियां समझती हैं-
कौन याद करता है, हिचकियां समझती हैं-
यूं तो सैर गुलशन को कितने लोग आते हैं-
फूल कौन तोड़ेगा डालियां समझती हैं-
दो जंवा दिलो का गम दूरियां समझती हैं-
कोन याद करता है, हिचकियां समझती हैं...
Posted on: Apr 13, 2019. Tags: CG KHAIRAGARH SANTLAL PATHAK SONG VICTIMS REGISTER
गांव में आमा खाई त्योहार से पहले लोग आम नहीं खाते, किसान देवी देवतओं को बीज अर्पित करते हैं-
ग्राम-जमावाड़ा, जिला-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से फुलसिंग अपने गांव में आज रविवार को हो रहे आमा खाई का त्योहार के बारे में बता रहे हैं| आमा खाई त्योहार उनके गांव का पारंपरिक त्योहार है| ये त्योहार कई वर्षो से वे मना रहे हैं| आम के पेड़ पर फल लगने पर ये त्योहार किसी भी दिन मना सकते हैं| इस दिन किसान अपने आने वाले अच्छे फसल के लिये देवी देवतओं को बीज समर्पित करते हैं| साथ ही नये फल को देवताओं को अर्पित कर घरो में उपयोग करते हैं| मेहमानों को बुलाते हैं| पूजा पाठ करते हैं| गांव में लोगो की मान्यता है कि इस त्योहार से पहले आम को खाने से उनके जीवन में बुरा प्रभाव पड़ता है| स्वास्थ्य खराब होने जैसे स्थिती होती है| जीवन में बाधा उत्पन्न होता है|
