कलमी आम दशहरी, निलम, लंगड़ा, बाम्बे ग्रीन...आम की किस्मे

ब्लॉक-तमनार, जिला-रायगढ, (छत्तीसगढ़) से राजेन्द्र गुप्ता बता रहे है कि बहुल आदिवासी क्षेत्र तमनार में आम बहुत ज्यादा होता है उसमे देसी किस्म से लेकर
कलमी आम दशहरी, निलम, लंगड़ा,बाम्बे ग्रीन इस तरह से विभिन्न प्रकार के आम होते है इस पूरे क्षेत्र में बहुत फल लगे है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रदुषण के चलते पुरे आम काले हो जा रहे है, प्रदुषण के चलते आप भी ज्यादातर पेड़ से टूट जाते है, काला आम होने की वजह से व्यापारी भी नही खरीदते है आमचुर तक नही बिकता है जिससे बहुत क्षति हुई है, प्रदुषण का मुख्य कारण यह कि, क्षेत्र में 3400 मेगावाट का पावर प्लांट के कारण ही हो रहा है ऐसा लोगो का कहना है, जिससे आम से मिलने वाली आमदनी पर भी प्रभाव पड़ा है क्योंकि लोगो का आर्थिक स्रोत मुख्य रूप से वनोपज ही है जो की बहुत प्रभावित हुआ है |

Posted on: Feb 23, 2019. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER

फूल तो मुरझाएंगे बस तितलियाँ रह जायेंगी...कविता-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं :
फूल तो मुरझाएंगे बस तितलियाँ रह जायेंगी-
एक दिन हर रूप पे कुछ झुर्रियां रह जायेंगी-
जिन्दगी की हर कथा का अंत देखा है यही-
आंसुओं की एक कथा सिसकियाँ रह जायेंगी-
लाख करले हम जतन पर सत्य कहता है यही-
छोड़ जाएंगे जहां ये बस्तियां रह जायेगीं – लाख करले हम जतन पर मुस्कुराकर-

जी लियाजिसने जिन्दगी यहाँ- बस उसके पास आकर मस्तियाँ रह जायेंगी-
सबके हिस्से तय सुदा एक अँधेरा दोस्तों-
आपके पास ही क्या कुछ बिजलियाँ रह जायेंगी-
शान-शौकत और रुतबा कब तलक रहता यहाँ-
तुम हटोगे और हसती कुर्सियां रह जायेंगी-
फूल तो मुरझाएंगे बस तितलियाँ रह जायेंगी...

Posted on: Feb 23, 2019. Tags: SONG VICTIMS REGISTER sunil kumar

आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : पलाश के पत्तल में भोजन करने पर खून शुद्ध होता है...

पत्तल-दोने में भोजन करने के गुण- पलाश के पत्तल में भोजन करना सोने के बर्तन में भोजन करने के बराबर होता है केले के पत्तल में भोजन करना चांदी के बर्तन में भोजन के बराबर है.पलाश के पत्तल में भोजन करने पर खून शुद्ध होता है इसी तरह कई बृक्ष हैं जिनके पत्तल में भोजन करने से बीमारी तक ख़त्म हो जाती है यह प्रथा पहले चलती थी लेकिन अब बर्तनों के चलन में इनको नजर अंदाज किया जा रहा है इसके लिए तो आन्दोलन तक चलाये गए जैसे चिपको आन्दोलन। आज के आधुनिक बर्तनों के रख-रखाव में भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है जैसे उन्हें धोने पर पानी की जरूरत होती है जिसके कारण पानी का नुकसान होता है इसलिए हमारे पूर्वज पत्तलों के ऊपर ज्यादा निर्भर हुआ करते थे | सुनील कुमार@9308571702

Posted on: Feb 23, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

गर तुझको जिहाद छेड़नी है, तो बुराई से छेड़...शिक्षा पर कविता

ग्राम-धीरी, पोस्ट-जैतपुरी, तहसील-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से जगदीश कुमार मरकाम शिक्षा को लेकर एक कविता सुना रहे है :
गर तुझको जिहाद छेड़नी है, तो बुराई से छेड़-
गर और चाहे हर ओर खुशी, शुरु हो भौर पड़ाई से-
झूठ कपट, बैमानी का , फ़ैला जो जंजाल-
कसम उठा ले इन्हें मिटाने, हो शिक्षित तत्काल-
भारत की पावन धरती से, सारे असत्य मिटा दे-
वीर देश का वीर पुत्र तू, जग को नई दिशा दे...

Posted on: Feb 23, 2019. Tags: JAGDISH KUMAR MARKAM SONG VICTIMS REGISTER

मढियान मंदीर में राजा महाराजा पूजा अर्चना के बाद बलि देते थे वो आज भी जारी...

मोहला मानपुर क्षेत्र के अनर्गत आने वाले ग्राम पंचायत-मढियानवाडी, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से राजेन्द्र कोरेटी बता रहे है की गाँव से 10 किलोमीटर दूर स्थित मढियान देवी मंदिर है, जो पुराने राजा महाराजाओं का गढ़ किला है यहाँ पर जिस प्रकार से पुराने समय में राजा महाराजा पूजा अर्चना के बाद बलि देते थे वो आज भी जारी है, उसी प्रकार से आज भी पूजा अर्चना की जाती है, अभी नए देवी देवताओं की स्थापना कर रीति रिवाज अनुसार कार्यक्रम किया गया तथा भेड़,बकरियों की बलि भी दी गई |

Posted on: Feb 23, 2019. Tags: RAJENDRA KORETI SONG VICTIMS REGISTER

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