आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : पलाश के पत्तल में भोजन करने पर खून शुद्ध होता है...
पत्तल-दोने में भोजन करने के गुण- पलाश के पत्तल में भोजन करना सोने के बर्तन में भोजन करने के बराबर होता है केले के पत्तल में भोजन करना चांदी के बर्तन में भोजन के बराबर है.पलाश के पत्तल में भोजन करने पर खून शुद्ध होता है इसी तरह कई बृक्ष हैं जिनके पत्तल में भोजन करने से बीमारी तक ख़त्म हो जाती है यह प्रथा पहले चलती थी लेकिन अब बर्तनों के चलन में इनको नजर अंदाज किया जा रहा है इसके लिए तो आन्दोलन तक चलाये गए जैसे चिपको आन्दोलन। आज के आधुनिक बर्तनों के रख-रखाव में भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है जैसे उन्हें धोने पर पानी की जरूरत होती है जिसके कारण पानी का नुकसान होता है इसलिए हमारे पूर्वज पत्तलों के ऊपर ज्यादा निर्भर हुआ करते थे | सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
गर तुझको जिहाद छेड़नी है, तो बुराई से छेड़...शिक्षा पर कविता
ग्राम-धीरी, पोस्ट-जैतपुरी, तहसील-बैहर, जिला-बालाघाट (मध्यप्रदेश) से जगदीश कुमार मरकाम शिक्षा को लेकर एक कविता सुना रहे है :
गर तुझको जिहाद छेड़नी है, तो बुराई से छेड़-
गर और चाहे हर ओर खुशी, शुरु हो भौर पड़ाई से-
झूठ कपट, बैमानी का , फ़ैला जो जंजाल-
कसम उठा ले इन्हें मिटाने, हो शिक्षित तत्काल-
भारत की पावन धरती से, सारे असत्य मिटा दे-
वीर देश का वीर पुत्र तू, जग को नई दिशा दे...
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: JAGDISH KUMAR MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
मढियान मंदीर में राजा महाराजा पूजा अर्चना के बाद बलि देते थे वो आज भी जारी...
मोहला मानपुर क्षेत्र के अनर्गत आने वाले ग्राम पंचायत-मढियानवाडी, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से राजेन्द्र कोरेटी बता रहे है की गाँव से 10 किलोमीटर दूर स्थित मढियान देवी मंदिर है, जो पुराने राजा महाराजाओं का गढ़ किला है यहाँ पर जिस प्रकार से पुराने समय में राजा महाराजा पूजा अर्चना के बाद बलि देते थे वो आज भी जारी है, उसी प्रकार से आज भी पूजा अर्चना की जाती है, अभी नए देवी देवताओं की स्थापना कर रीति रिवाज अनुसार कार्यक्रम किया गया तथा भेड़,बकरियों की बलि भी दी गई |
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: RAJENDRA KORETI SONG VICTIMS REGISTER
माटी होही तोर चोला रे संगी...छत्तीसगढ़ी गीत-
ग्राम-रामनगर, पोस्ट-महेवा, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से कुमारी शांती एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रही हैं :
माटी होही तोर चोला रे संगी – माटी से उपजे माटी मा बढ़े माटी मा मिलना है तोला – माटी के घर मा माटी के भुईयां – लाख जतन करे माटी के दुनिया – बड़े मन के नई बाचिस कौन कहे अब तोला – चारेच दिन के सुघर मेला आखिर में सब माटी के ढेला...
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: KUMARI SHANTI SONG VICTIMS REGISTER
ईट ला काटी-काटी ये चौरा छवावे हो...डोमकच्छ गीत-
ग्राम पंचायत-रामपुर, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सोहानू एक डोमकच्छ गीत सुना रही हैं:
ईट ला काटी-काटी ये चौरा छवावे हो-
य ईट ला काटी काटी-
झालर खूटा लोलो हमार मडवा छवाय-
ईट ला काटी-काटी ये चौरा छवावे हो...

