दशरथ जी के लाल हमने वन में जाके देखे हैं...गीत-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लड़वारी, जिला-निवाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुसवाहा एक गीत सुना रहे हैं :
दशरथ जी के लाल हमने वन में जाके देखे हैं-
सांथ सुकुमारी सीता यही तो परेखे हैं-
कैसे-कैसे वर मांगे, निरदई परी केकई रानी-
कटी नहीं जीभ जाकी, निकली मुख से कैसी वाणी-
दशरथ जी के लाल हमने वन में जाके देखे हैं...
Posted on: Mar 18, 2019. Tags: MANOJ KUSWAHA MP NIWARI SONG VICTIMS REGISTER
गांव में हैण्डपंप नहीं है, लोग 2 किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं, कोई ध्यान नहीं देते...कृपया मदद करे-
ग्राम-छिपिया, ब्लाक-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से मंजू देवी बता रही हैं, उनके गांव में हैण्डपंप नहीं है| पानी की समस्या होती है| लोग 2 किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं| गांव में लगभग 600 जनसंख्या है| अधिकारी गांव को देखने तक नहीं आते| जब चुनाव का समय होता है तो आते हैं | इसलिये वे सीजीनेट के साथियो से अपील कर रहे हैं कि दिये गये नंबरों पर बात कर गांव में हैण्डपंप लगवाने में मदद करें : SDO@8349922083, संपर्क नंबर@9584141327.
Posted on: Mar 18, 2019. Tags: MANJU DEVI MP PROBLEM REWA SONG VICTIMS REGISTER WATER
जो पहना हथकड़ी, उसे पड़ा छड़ी-छड़ी...व्यंग रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक व्यंग रचना सुना रहे हैं:
जो पहना हथकड़ी, उसे पड़ा छड़ी-छड़ी-
देश के खातिर शूरवीरो में आपत पड़ी-
अंग्रेजो से लोहा लेने, पड़ी उन्हें कई छड़ी-
अब पाकिस्तान की बारी, उसे पड़ चुकी कई छड़ी-
फिर भी न सुधरे पाकिस्तान, तुझे मूकी खानी पड़ी...
Posted on: Mar 18, 2019. Tags: CG RAIGARH RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER WYANG RACHANA
रंग गुलाल उड़वा फागुन में...फागुन गीत-
छत्तीसगढ़ी, भोजपुरी विकास मंच मुजफ्फपुर (बिहार) से सुनील कुमार होली त्योहार के शुभकामनाओं के सांथ एक फागुन गीत सुना रहे हैं :
रंग गुलाल उड़वा फागुन में-
तन से उड़वा हो मन से उड़वा-
प्रेम के रंग फैलावा हो-
प्रेम के रंग फैलावा फागुन में, रंग गुलाल उड़वा-
रंग गुलाल उड़वा फागुन में...
Posted on: Mar 18, 2019. Tags: BIHAR HOLI SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
ये दुनिया भी अजीब है यारो, कुछ अच्छे तो कुछ खराब से मिलते है...पंक्तियाँ-
जबलपुर (मध्यप्रदेश) से सतीस पंक्तिया सुना रहे हैं :
जिंदगी की वो तक़दीर बदल गये-
ऐ जाने वाले मेरी खता तो बता दे क्या थी-
तक़दीर तो मुद्दतो से बदलती है-
ऐ जाने वाले ये बता दे मेरी खता क्या थी-
ये दुनिया भी अजीब है यारो, कुछ अच्छे तो कुछ खराब से मिलते है...
