लिखी लिखी पतिया, पाठावे परदेशवा...विरह गीत-
ग्राम-कोट्या, विकासखंड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक विरह गीत सुना रहे है:
लिखी लिखी पातिया, लिखी लिखी पातिया-
लिखी लिखी पतिया, पाठावे परदेशवा-
अब घर आजा हो सजनवा-
महुहा कुचाई गईली आमा बौउराई गईली-
लिखी लिखी पतिया, पाठावे परदेशवा...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: CG MEWALAL DEVANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
चोला बाट भले हो मोती नाह गिरा गढ़ी रे...सरगुजिया कर्मा गीत-
ग्राम-नवापारा, पंचायत-बड़वार, तहसील, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से बुधराम और श्यामबिहारी एक कर्मा गीत सुना रहे हैं :
चोला बाट भले हो मोती नाह गिरा गढ़ी रे-
कोन तो बनावे ले कटरी गे गोती न गिरा तही रे-
पुरे नहा का लबारी दगा दे हो गोपी न गिरा गढ़ी रे-
कोन तो बनावे लरकरी कोंबे नार हिरा गढ़ी रे-
कोन तो बनावे बही लोहे के शिकारी हो-
मोती नहर हीरा कही रे...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: BUDHRAM SHYAMBIHARI SARGUJIYA KARMA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
तय आ जाबे मैना उड़ते-उड़ते तय आ जाबे...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे है:
तय आ जाबे मैना उड़ते-उड़ते तय आ जाबे-
कुआँ पार में रे संगी साँझा के बेरा कुआँ पार में-
एक पेड़ आमा छतीस पेड़ जाम-
मधुबन के चीरईया बोलत राम-राम-
धान ला लूवे उड़ेला कनसी, सावन के मंदिर में सुनावे बनसी कुआँ पार में-
कुआँ पार में रे संगी साँझा के बेरा कुआँ पार में...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: CHHATTISGARHI MEWALAL DEWANGN SONG VICTIMS REGISTER
मोही ले चलो अपने नगरिया अवध बिहारी सावरिया...भजन गीत-
ग्राम-कोल्हुआ, विकासखण्ड-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से हरीसिंह मरावी एक भजन गीत सुना रहे हैं :
मोही ले चलो अपने नगरिया अवध बिहारी सावरिया-
ओके अवध बिहारी ये सावरिया-
प्रभु राहो कुआँ खोदवा देना-
जलवा भरुगी अकेले जरा आ जाना-
प्रभु राहो में मंदिर बनवा देना पूजा करुगी अकेले जरा आ जाना-
मोही ले चलो नगरिया आवध बिहारी सावरिया...
Posted on: Aug 05, 2018. Tags: BALRAMPUR HARISINGH MARAVI SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : गांव की परंपरा के अनुसार बांस जीवन से अंत तक किसी रूप में हमारे सांथ रहता है-
ग्राम-आरंडी, कुरखेरा, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) के निवासी इजमसाय कटंगे बता रहे हैं, उनके इलाके में कई प्रकार के बांस पाए जाते हैं जिसमे मानवाल प्रजाति का बांस अधिक पाया जाता है जिसको यहाँ के निवासी सबसे ज्यादा उपयोग में लाते हैं, यहाँ की परम्परा के अनुसार बांस या बाम्बू एक साथी की तरह होता है जो जन्म से मृत्यु तक अगल-अलग रूप में आदिवासी मनुष्य के साथ रहता है जैसे जन्म के समय उससे नाड काटते हैं, थोडा बड़ा होने पर झूला के रूप में, शादी में पारी के रूप में, बुढ़ापे में सहारे के रूप में और अंतिम अवस्था अर्थात मरने पर श्मशान भूमि पहुंचाने तक साथ रहता है, इस तरह से बांस या बाम्बू का आदिवासी जीवन से मृत्यु तक साथ रहता है...

