जल बिना डोंगिया, डोंगिया बिना नारी...गीत
ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
जल बिना डोंगिया, डोंगिया बिना नारी-
नारी बिना पुरुष, पुरुष बड़ा भारी-
गध-गध गीरे लोचन बहे नीरा-
प्रभु गुण गावथे फुल के शरीर-
राम जी ला पूछे रामन कर भोरे-
काहे कारन हवे धनुष काहे तोड़े-
उंचे पर्वत ले देखे रघुराई, बाली सुग्रीव दोनों मचे हे लड़ाई...
Posted on: Sep 14, 2018. Tags: CG MEWALAL DEWANGAN SONG SURGUJA SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
कोइलारी जाबो गा रुपिया कमाए बर कोइलारी जाबो...सरगुजिया गीत-
ग्राम, पोस्ट-कोटया, थाना-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
कोइलारी जाबो गा रुपिया कमाए बर कोइलारी जाबो-
कोने हर मूड-मुड़ावे कोने हर दाढ़ी-
कोने हर छटा ले बंगाली, कोइलारी जाबो-
लरिका हर मूड-मुडावे, बुढवा हर दाढ़ी-
नौडा हर छटा ले बंगाली, कोइलारी जाबो-
कोटया में कब ले आगे कोईला खदान...
Posted on: Sep 13, 2018. Tags: CG COAL MEWALAL DEWANGAN MINES PRATAPPUR SONG SURAJPUR SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
आर्य देश के मन में आए, गोंडवाना भुइंया...कविता
ग्राम-ताराडांड, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से बाबूलाल नेटी एक स्वलिखित कविता सुना रहे हैं :
आर्य देश के मन में आए, गोंडवाना भुइंया-
विश्व में सबसे प्यारी भुइंया-देश दुनिया के गुरु रूप में-
पहचान बना रहे हैं यहाँ अनार्य कारी-
प्रक्रति के पुजारी हैं यहां-
जहां राजा रावण जैसे हैं पूरी अनार्य हितकारी-
फिजूल खर्ची होती नही वहाँ-फैशन होती यहाँ नही-
सोने की वर्षा होती है भारी-भारी...
Posted on: Sep 12, 2018. Tags: ANUPPUR BABULAL NETI MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
खाले मूढा ऊपर मूढा, कारीबंद नागर मुढ़ा...छत्तीसगढ़ी किसानी गीत
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी किसानी गीत सुना रहे हैं:
खाले मूढा ऊपर मूढा, कारीबंद नागर मुढ़ा-
धान होत रहिस कूढा-कूढा, जम्मो ला ले गई बोरी जिंदल बुढा-
सरदार दीपा, जमनी खार, तेलाई खार, साव मूडा-
बराही खार छोटे सेमरिया, बड़े सेमरिया कुदरी-
बेल पथरा जभा नार, जम्मो होगिस नार खार-
बूचा जरिया कदम मुड़ा, नारी खार केरा मुड़ा-
टीपा खार किसिम किसिम के धान होत रहिस...
Posted on: Sep 12, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI FARMER KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मेरे लगाए गये पेड़ का फल मेरे आने वाले पीढ़ी के लोग और पशु-पक्षी खायेंगे...कहानी
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं;
एक राजा उसका नाम मानसिंह था वह बडा ही ज्ञानवान धर्मात्मा था, वह प्रतिदिन सभा से लौटने के बाद किसान के वेश में हाथ में कुदाल, फलदार पौधा और पानी के बाल्टी लेकर रोज सड़क के किनारे उन पौधों को लगाता और पौधे में पानी डालने के लिए जड़ के पास मेड भी बनाता था, एक दिन उनके यहाँ एक विदेशी आया, उसे वहां के राजा से मिलना था, पर वह दूसरे दिन मिलना है सोचकर किसी भोजनालय गृह में रुक गया वह शाम के समय अच्छे कपड़े पहन कर घूमने निकल गया, वह उस राजा के पास पहुंचा और बोला बाबा इस उमर में पौधा क्यों लगा रहे हैं, क्या इनका फल आप खा पाएंगे तो उसने जवाब दिया कि अब तक मै दूसरों के द्वारा लगाये गये पौधों के फल को खाते आ रहा हूँ, मेरे लगाए गये पेड़ का फल मेरे आने वाले पीढ़ी के लोग और पशु-पक्षी खायेंगे, विदेशी मन ही मन सोचता हुआ वापस आ गया, दूसरे दिन वह राज दरबार में गया और वह राजा को देखकर आश्चर्य हो गया और बोला मै आपको कही देखा हूँ, राजा ने कहा हाँ देखे होंगे, वह वहां इतना बोलकर चला गया और बाद में बिदेशी को पता चला कि राजा ही थे जो पौधे लगा रहे थे तब वह भी अपने देश में जाकर पौधा लगाने लगा...
