तारी मोर नारी, मोर नारी ना ना रे, सुआ ना...सुगा गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी सुगा गीत सुना रहे हैं :
तारी मोर नारी, मोर नारी ना ना रे, सुआ ना-
तारी नारी नारी न ना-
माटी के चोला ला माटी मा मिल जाही नारे सुआ ना-
काबर करथस गर्व गुमान-
पिंधे धोती लुगरा ला रे छोड़ी के जाबे, छुट ले परान-
ना रे सुआ ना छुट ले परान...
Posted on: Sep 27, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG SUGA VICTIMS REGISTER
काम किये 3 वर्ष हो गया आज तक मजदूरी भुगतान नहीं हुआ, अधिकारी गुमराह करते हैं.
>बरगीडीह, ग्राम पंचायत-बडवार, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से ग्रामवासी जीतलाल, मेवालाल, कुंजलाल, बेमुनिया, सुखराम, अमरसाय, रामजीत, ब्रिजलाल और दिनेश बता रहे हैं कि उन्होंने वर्ष 2014-15 में तालाब निर्माण का काम किया था, जिसका पैसा नहीं मिला अधिकारी का कहना है पैसा मिलेगा लेकिन 3 वर्ष हो गये आज तक पैसा नहीं मिला इसलिए वे सीजीनेट के सांथियो से अपील कर रहे हैं कि दिए गये नंबरों पर अधिकारियों से बात कर मजदूरी का पैसा दिलाने में मदद करें : कलेक्टर@9826443377, SDM@9165493212, रोजगार सचिव@7079246689, सचिव@9754816487, सरपंच@7773837136. संपर्क नंबर पुंजलाल@626888564
Posted on: Sep 26, 2018. Tags: CG JITLAL PROBLEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
एक था बेसहारा उसका नही कोई किनारा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैलाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है किस्मत ने पल्टा खाया :
एक था बेसहारा उसका नही कोई किनारा-
उसका साथ था कटोरा, दिनभर फिरता मारा-मारा-
लोगो ने उसको दु तकारा फिर वह हिम्मत ना हारा-
किस्मत ने पलटा खाया, उसने एक सिक्का पाया-
उसकी उसने चना बिसाया, आधा बेचा आधा खाया-
उसने खूब मुनाफा कमाया, फिर उसने अपना घर बसाया...
Posted on: Sep 26, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
शंकर सोढा रे, सिंगार भोले कर रहे सोढा रे...शिव भजन गीत
ग्राम-बिहारपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मुकुंदलाल जैसवाल एक शिव भजन गीत सुना रहे हैं :
शंकर सोढा रे, सिंगार भोले कर रहे सोढा रे-
अंग बबुत सिंगार करे,कानन बिछु सोहे-
गले में नाग की माला सोहे, भुतन संग नाचे-
गली-गली में शोर मची है-
सावन में हर घर में भोले आये-
सिंगार भोले कर रहे सोढा रे-
शंकर सोढा रे,सिंगार भोले कर रहे सोढा रे-
अंग बबुत सिंगार करे, कानन बिछु सोहे...
Posted on: Sep 26, 2018. Tags: BHAJAN CG MUKUNDALAL JAISWAL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
पर्वतो के गोद से निकलकर मैं नदी नाला बन जाती हूँ...प्रकृति कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी प्रकृति पर एक कविता सुना रहे हैं :
पर्वतो के गोद से निकलकर मै नदी नाला बन जाती हूँ-
आसमान से धरती पर गिर कर मैं पानी कहलाती हूँ-
इतनी उचाई से गिरकर भी मै शुद्ध स्वच्छ रहती हूँ-
चट्टान को भी काटकर अपनी राह बना लेती हूँ-
टेढ़ी मेढ़ी बहकर भी मै बड़ी भोली भाली हूँ-
सबकी प्यास बुझकर भी मै गंदगी कहलाती हूं...
