तीना ना मोर नाना रेली लइयो रा...गोंडी हुलकी गीत-
सावेर, पोस्ट-बांदे, तहसील-पखांजूर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से रुक्ता हुसेंडी और संनी हुसेंडी एक गोंडी हुलकी गीत सुना रहे हैं :
तीना ना मोर नाना रेली लइयो रा- बाती पीरी वांता याले लइयो रा- दाडका पीरी दडददा ले लइयो रा- जिमटा पीरी जिम जिमा ले लइयो रा...
Posted on: Nov 06, 2018. Tags: CG KANKER RUKTA SONG VICTIMS REGISTER HUSENDI
अरे पकड़ मा आ गए कन्हैया हो ग्वालिन के हाँथ...होली गीत-
जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से संतलाल सरलहरी एक होली गीत सुना रहे हैं :
अरे पकड़ मा आ गए कन्हैया हो ग्वालिन के हाँथ- रोज दूध दही चुरामय- सुदामा के सांथ रोज दूध दही चुरामय- बंसी बजामय, गाय चरामय, नदी किनारे जमुना के हो- अपन जनम मा रास रचामय, मटका फोड़ गगरी मा हो...
Posted on: Nov 05, 2018. Tags: ANUPPUR MP SANTLAL SARHARI SONG VICTIMS REGISTER
देश बदल ली जुग बदल ली...हल्बी गीत-
ग्राम-बासला, पोस्ट-संबलपुर, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से जागेश्वर भेलसरिया देवान हल्बी में एक साक्षरता गीत सुना रहे हैं :
देश बदल ली जुग बदल ली- चतुर होतो आये मोचो बाबू रे- पढुक लिखुक सबके जातो आय- मोचो नोनी रे पढुक लिखुक सबके जातो आये- आगे लोग खिडिक रला, हरएक जिव न चलते रला...
Posted on: Nov 02, 2018. Tags: CG JAGESHVAR KANKER SONG VICTIMS REGISTER
गढ़बासला एक ऐतिहासिक स्थल है, जो पहाड़ो और वनों से सुशोभित है..
ग्राम-गढ़बासला, पोस्ट-संबलपुर, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से जागेश्वर देवान अपने इलाके की ऐतिहासिक जानकारी दे रहे हैं, वे बता रहे हैं, गढ़बासला एक ऐतिहासिक स्थल है, उसके उत्तर पूर्व में साल वृक्षो का घना जंगल है, दक्षिण में विशाल पहाड़ स्थित है, किनारे एक बड़ा तालाब है, जो कमल के फूल और विभिन्न प्रकार की पक्षियों से सुसोभित होता था, अब मछली पालन के कारण स्थिति बदल चुकी है, गाँव में बड़े-बड़े पत्थरो के देवी देवताओं की मूर्ति थी, जिसे मूर्ति संग्रहालय जगदलपुर में रखा गया है, अभी भी वहां पर कई ऐतिहासिक परिदृश्य देखे जा सकते हैं...
Posted on: Nov 02, 2018. Tags: ) CG DEVANGAN JAGESHVAR KANKER SONG VICTIMS REGISTER
बस्तर के दंतेस्वारी मैईया, रतनपुर महामाई...दंतेश्वरी माता गीत-
ग्राम-बासला, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से संतूराम चक्रधारी जो कई पीढीयों से माता की सेवा, पूजा पाठ कर रहे हैं, एक आरती सुना रहे हैं :
बस्तर के दंतेस्वारी मैईया, रतनपुर महामाई- डोंगरगढ़ मा बैईठे ओ दाई, बबलामुखी मुखी बमलाई- हावय तरिया के पार हो- बैईठे हावय तरिया के पार, दंतेश्वरी दाई करकेओ सोला सिंगार- लाली रंग के लुगरा मईया, लाली रंग के पोलका- लाली है चुनरी तुम्हार ...
