स्वस्थ्य स्वर : शहद औषधि का घरेलू उपचार बता रहें है-
ग्राम-रनई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्य केदारनाथ पटेल शहद औषधि का घरेलू रोग उपचार बता रहें है-
काली खांसी – मक्के की भत्ते को दाना निकालकर उसे जलाकर राख कर दे और दो ग्राम भस्म में शहद मिलाकर सेवन करने से काली खांसी आना बंद हो जाता हैं काली खांसी में अत्यंत लाभ होता हैं|
छपाकी रोग – 25 ग्राम शहद में 5 ग्राम गेरू मिलाकर लगतार दिन में 3 बार चाटने कर सेवन करने से छपाकी रोग समाप्त हो जाता है|
स्वप्नदोष – दूध में शहद मिलाकर पीने से धातु जाना व् मर्दाना कमजोरी में अत्यंत लाभ होता है|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे केदारनाथ@9826040015…(179752)GT
Posted on: Jan 09, 2021. Tags: HEALTH SONG VICTIMS REGISTER
सुख के सब साथी, दुःख में न कोय...भक्ति गीत-
ग्राम-आमनदुला, जिला-जांजगीर चाम्पा (छत्तीसगढ़) से चंद्रकांत लहरे हिंदी भक्ति गीत सुना रहे हैं:
सुख के सब साथी, दुःख में न कोय-
मेरे राम, मेरे राम, तेरो नाम एक सांचा-
दूजा न कोय, सुख के सब साथी-
जीवन आंनी जानी काया-
झूठी माया झूठी काया-
फिर काहे को सारी उमरिया-
पाप की गठरी ढोए-
सुख के सब साथी, दुःख में न कोय...(180122) GT
Posted on: Jan 09, 2021. Tags: BHAKTI SONG SONG VICTIMS REGISTER
कोयल के कु के अच्छी बात, बम बन्दूके बुरी बात...पंक्तियाँ-
जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व पंक्तिया सुना रहें हैं:
कोयल के कु के अच्छी बात-
बम बन्दूके बुरी बात-
पूरी कचोरिया अच्छी बात-
चाकू चुरिया बुरी बात-
दिल कि नजदीकिया अच्छी बात-
दिल कि दूरिया बुरी बात-
प्रेमी प्रेमिका अच्छी बात-
कलम का टीका बुरीं बात-
सबको मिली बुद्धि की सौगात-
रहना अपनी अपनी औकात-
सदा ही सोचना अच्छी बात-
और त्यागना बुरी बात...(180112) GT
Posted on: Jan 09, 2021. Tags: PANKTIYA SONG VICTIMS REGISTER
हंस वाहनी ज्ञान दाहनी...सरस्वती वन्दना गीत-
(महाराष्ट्र) से महेश तिरकी सरस्वती वन्दना गीत सुना रहें हैं-
हंस वाहनी ज्ञान दाहनी-
ज्ञान दे ज्ञान का भण्डार दे-
चल सकू निज सत्य पथ पर-
गा सकूं निज गीत हस कर-
हंस वाहनी ज्ञान दाहनी-
ज्ञान दे ज्ञान का भण्डार दे-
शारदे माँ शारदे दे...(181312)RM
Posted on: Jan 09, 2021. Tags: SARASVATI SONG VANDANA VICTIMS REGISTER
नचैया होते ता नचातेंव तोला रे...छत्तीसगढ़ी गीत-
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से महेश कुमार सिधार छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहें हैं-
नचैया होते ता नचातेंव तोला रे-
गावैया होते ता गवातेंव रे-
रसैया होते ता रसातेंव रे-
रोवैया होते ता रोवातेंव रे...(181274)
