तोर लोर हमू चली आये रिजुनी रे तोर लोरे...डोमकच्छ गीत-
ग्राम पंचायत-बरपटिया, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से बुधनी एक डोमकच्छ गीत सुना रही हैं :
कियो लेरे रिजुनी रे तोर लोरे- तोर लोर हमू चली आये रिजुनी रे तोर लोरे- इयलेगो रिजुनी रे तोर लोरे- कि लेगा भाई नाच देखा रिजुनी रे तोर लोरे- तोर लोर महू चले आये रिजुनी रे तोर लोरे...
Posted on: Sep 22, 2018. Tags: BUDHANI CG SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
सडकाहारी खेते बीड़ा रोपे गयले रे पानी बिसायते भीता...हल्बी किसान कर्मा गीत-
आश्रित ग्राम-तोड़हुर, पंचायत-हलमानपुर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से दसराम एक्का, गुलाब तिर्की, जहरसाय बेग हल्बी भाषा में एक कर्मा गीत सुना रहे है, जिसमे खेती में रोपा लगाते समय पानी के अंदर बिच्छू काट देने की बात को बता रहे हैं :
सडकाहारी खेते बीड़ा रोपे गयले रे पानी बिसायते भीता-
आ गए रे बली बिचारेते फींदा देगें-
हे दगी भगा दें तडकारी के ते बीरा रोप दे दें रे-
पानी भीता रे ते सींदा गए रे पानी भिंदा-
चली दादा रे या मन को पुकाना को कयो रे...
Posted on: Sep 22, 2018. Tags: CG HALBI KANKER KARMA KOELIBEDA MOHAN YADAV SONG VICTIMS REGISTER
दुर्गा माटी ला घलो कभू ना समझय नीत...कविता-
ग्राम-बरभंवा, पंचायत-सरेखा, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से लक्ष्मण श्रीवास के साथ आजमी और यासमीन छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कविता सुना रही हैं :
दुर्गा माटी ला घलो कभू ना समझय नीत-
पालन पोषन येही करय, कमल फुलए येही कीत-
टीका बना के धरे, होत ना कोनो संत-
पीकर तो महुरा बरे, चारी चारी चुगली ला समाज-
खजरी खसरा रोग, खाजुवावत दुःख होत है पाछू दुःख ला भोग
जउन गांव जाना नही पूछे के का काम...
Posted on: Sep 22, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KABIRDHAM LAKSHMAN SHRIWAS POEM SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : वनों से जड़ी बूटी और कई तरह उपयोगी चीजें प्राप्त होती है जैसे भाजी, लकड़ी, बांस...
ग्राम पंचायत-दरभा, जिला-दक्षिण बस्तर (छत्तीसगढ़) से जीजवती, राधा मंडावी और गीता मंडावी सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा के अमर मरावी को बता रही हैं, उन्हें वनों से अपने उपयोग के लिए पान, दातून, लकड़ी, बांस के अलावा खाने के लिए सब्जी, मसरूम पूटू अदि मिलती है, जड़ी बूटी भी प्राप्त होती है, लेकिन उन्हें इस संबंध में ज्यादा जानकारी नही है क्योंकि वे अभी छोटे हैं, वनों से वे खाने के लिए कई प्रकार की भाजी भी प्राप्त करते हैं, जिसमे कोलियरी भाजी, केना भाजी जैसी सब्जियां शामिल है, वे कह रही हैं कि वनों का संरक्षण करना चाहिए, आदिवासियों का जीवन वनो पर ही निर्भर है, वन वर्षा के लिए आवश्यक है, इनसे वातावरण स्वच्छ रहता है |
Posted on: Sep 22, 2018. Tags: AMAR MARAVI BASTAR CG DARBHA SONG SWARA VANANCHAL VICTIMS REGISTER
सब्जी में आलू का, जंगल में भालू का बड़ा ही महत्व हैं... कविता-
ग्राम-जामपानी, पोस्ट-लिलासी, तहसील-दुर्भी, जिला-सोनभद्र (उत्तरप्रदेश) से रामदीप भारती एक कविता सुना रहे हैं :
सब्जी में आलू का, जंगल में भालू का बड़ा ही महत्व हैं-
चट्टानों में सैन का, जानवरों में बैल का-
घर के लिए खपरैल का, बड़ा ही महत्व है-
राजनीति में नेता का, फलो में पपीता का-
पुस्तको में कविता का बड़ा ही महत्व है-
तकनीकी में टीवी का, रिश्तों में बीबी का...

