ईटंगावे बैठे लाल कन्हैया, मोर सुगा न जी...सुगा गीत-
ग्राम पंचायत-रामपुर, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रंगालो, कौशिल्या, सोहानो और फुलेश्वरी एक सुगा गीत सुना रहे हैं :
ईटंगावे बैठे लाल कन्हैया, मोर सुगा न जी-
हिली झुली बंसिया बजाय-
सुगना जी ऐसे ला कोन पहिने-
ऐसे ला पहिने गुदरू बघेल मोर सुगा न जी-
गुदरू बघेल पहिने...
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: CG KAUSHILYA ODGI SONG SUGA SURAJPUR VICTIMS REGISTER
पीपर पाके लाल के बगिया मा- राजा राम सुगा कौंवा हिलोर लगाय...सुगा गीत-
ग्राम पंचायत-रामपुर, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कौशिल्या और सुहानो एक सुगा गीत सुना रहे हैं, इस गीत को धान का फसल काटते समय गाते हैं:
पीपर पाके लाल के बगिया मा-
राजा राम सुगा कौंवा हिलोर लगाय-
उतर-उतर कौंवा हम चढ़ी बैठो-
राजा राम सुगा देखी आबो नैहर देश-
पीपर पाके लाल के बगिया मा...
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: CG KAUSHILYA ODGI SONG SUGA SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कलमी आम दशहरी, निलम, लंगड़ा, बाम्बे ग्रीन...आम की किस्मे
ब्लॉक-तमनार, जिला-रायगढ, (छत्तीसगढ़) से राजेन्द्र गुप्ता बता रहे है कि बहुल आदिवासी क्षेत्र तमनार में आम बहुत ज्यादा होता है उसमे देसी किस्म से लेकर
कलमी आम दशहरी, निलम, लंगड़ा,बाम्बे ग्रीन इस तरह से विभिन्न प्रकार के आम होते है इस पूरे क्षेत्र में बहुत फल लगे है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि प्रदुषण के चलते पुरे आम काले हो जा रहे है, प्रदुषण के चलते आप भी ज्यादातर पेड़ से टूट जाते है, काला आम होने की वजह से व्यापारी भी नही खरीदते है आमचुर तक नही बिकता है जिससे बहुत क्षति हुई है, प्रदुषण का मुख्य कारण यह कि, क्षेत्र में 3400 मेगावाट का पावर प्लांट के कारण ही हो रहा है ऐसा लोगो का कहना है, जिससे आम से मिलने वाली आमदनी पर भी प्रभाव पड़ा है क्योंकि लोगो का आर्थिक स्रोत मुख्य रूप से वनोपज ही है जो की बहुत प्रभावित हुआ है |
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
फूल तो मुरझाएंगे बस तितलियाँ रह जायेंगी...कविता-
ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे हैं :
फूल तो मुरझाएंगे बस तितलियाँ रह जायेंगी-
एक दिन हर रूप पे कुछ झुर्रियां रह जायेंगी-
जिन्दगी की हर कथा का अंत देखा है यही-
आंसुओं की एक कथा सिसकियाँ रह जायेंगी-
लाख करले हम जतन पर सत्य कहता है यही-
छोड़ जाएंगे जहां ये बस्तियां रह जायेगीं – लाख करले हम जतन पर मुस्कुराकर-
सबके हिस्से तय सुदा एक अँधेरा दोस्तों-
आपके पास ही क्या कुछ बिजलियाँ रह जायेंगी-
शान-शौकत और रुतबा कब तलक रहता यहाँ-
तुम हटोगे और हसती कुर्सियां रह जायेंगी-
फूल तो मुरझाएंगे बस तितलियाँ रह जायेंगी...
Posted on: Feb 23, 2019. Tags: SONG VICTIMS REGISTER sunil kumar
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : पलाश के पत्तल में भोजन करने पर खून शुद्ध होता है...
पत्तल-दोने में भोजन करने के गुण- पलाश के पत्तल में भोजन करना सोने के बर्तन में भोजन करने के बराबर होता है केले के पत्तल में भोजन करना चांदी के बर्तन में भोजन के बराबर है.पलाश के पत्तल में भोजन करने पर खून शुद्ध होता है इसी तरह कई बृक्ष हैं जिनके पत्तल में भोजन करने से बीमारी तक ख़त्म हो जाती है यह प्रथा पहले चलती थी लेकिन अब बर्तनों के चलन में इनको नजर अंदाज किया जा रहा है इसके लिए तो आन्दोलन तक चलाये गए जैसे चिपको आन्दोलन। आज के आधुनिक बर्तनों के रख-रखाव में भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है जैसे उन्हें धोने पर पानी की जरूरत होती है जिसके कारण पानी का नुकसान होता है इसलिए हमारे पूर्वज पत्तलों के ऊपर ज्यादा निर्भर हुआ करते थे | सुनील कुमार@9308571702


