दो बहन रामा और श्यामा की कहानी - नम्रता से रहना चाहिए एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए...
एक गाँव में दो बहन रामा और श्यामा रहती थीं दोनों की शादी एक ही परिवार में हुई. काफी दिन हो जाने के बाद छोटी बहन बोली बहन मै मायके घूम के आती हूँ आप मेरे बच्चों को देखना वह अपने घर से तीन कदम आगे जाती है तो सबसे पहले उसको बेर का पेड़ मिला पेड़ बोला बेटी मेरे जगह में कचरा बहुत है इनको साफ कर दो वो साफ कर दी फिर आगे बढ़ी तो रास्ते में उनको एक बूढी माँ मिली वो बोली बेटी आप मुझे खाना बना के दे सकते हो उसने खाना बना दिया आगे बढ़ी और गौशाला मिली गायों ने बोला हमारे यहाँ बहुत गन्दा है साफ सफाई कर दो उसने साफ कर दिया। लौटते समय वह गौशाला में पहुंची तो उसको दूध दही और बूढी माँ के पास पहुची तो उसको बहुत सारा सोना चांदी, बेर के पास गई तो बेर मिला फिर वो घर चली गई बहुत सारा सामान देख बहन बोली इतना सारा सामान तू कहाँ से पाई फिर बोली अब आप बच्चों को देखो मै घर जा के आती हूँ वह भी निकल पड़ी रास्ते में उसको भी बेर, बूढी माँ, गौशाला मिला पर वे जो बोले उन्होंने वैसा नही किया और वापसी में उसको कुछ नही मिला.घर पंहुच के बोली मुझे कुछ नही मिला बहन बोली नम्रता से रहना चाहिए एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए | मंदाकिनी मिश्रा@7697926356.
Posted on: Mar 30, 2018. Tags: MANDAKNI MISHRA SONG VICTIMS REGISTER
टूटी झोपडिया हमार गरीब घर आ जाना...देवी गीत
ग्राम-छुल्कारी, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से मंदाकनी मिश्रा एक देवी गीत सुना रहे हैं:
टूटी झोपडिया हमार गरीब घर आ जाना-
बड़े-बड़े लोग मैया हलवा चढ़ावे चन्दन लगा दूँ-
बड़े-बड़े लोग मैया लंहगा बनवावें चुनरी उढादूँ मेरी माँ-
बड़े-बड़े लोग मैया कंगना सजावें मेहंदी लगा दूँ मेरी माँ-
बड़े-बड़े लोग मैया पैजन बनवावें महावर लगा दो मेरी माँ-
बड़े-बड़े लोग मैया दीपक जलावें कपूर जला दूँ मेरी माँ...
Posted on: Mar 29, 2018. Tags: MANDAKNI MISHRA SONG VICTIMS REGISTER
इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना...प्रार्थना गीत -
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मंदाकनी मिश्रा एक प्रार्थना गीत सुना रही हैं :
इतनी शक्ति हमें देना दाता,मनका विश्वास कमजोर हो ना-
हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना-
दूर अज्ञान के हो अँधेरे, तू हमें ज्ञान की रौशनी दे-
हर बुराई से बचके रहें हम, जितनी भी दे भली ज़िन्दगी दे-
बैर हो ना किसी का किसी से, भावना मन में बदले की हो ना-
हम न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण...
