उड़े अबीर उड़े गुलाल, हर चहेरा दिखे लाल...कविता-

कानपुर (उत्तर प्रदेश) से के एम भाई होली त्योहार पर एक कविता सुना रहे हैं :
उड़े अबीर उड़े गुलाल-
हर चहेरा दिखे लाल-
होली का कुछ ऐसा हो घुमान-
कि ख़ुशी के रंग में-
रंग जाए हर इंसान-
इस होली कुछ ऐसा हो यार-
कि ढोल की एक ताल पे...

Posted on: Mar 21, 2019. Tags: KANPUR KM BHAI POEM SONG UP VICTIMS REGISTER

वाह रे जनतंत्र, वाह रे जनतंत्र...कविता

कानपूर (उत्तरप्रदेश) से के एम भाई शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक कविता सुना रहे हैं :
वाह रे जनतंत्र, वाह रे जनतंत्र-
भैस की पूंछ पकड़कर-
चलने की आदत हो गई-
अब तो जीत भी लोकतंत्र पर-
आफत हो गई-
अभी-अभी पता चला कि-
अभी वो तितुर से गुलाम हो गई है-
चलो एक बार फिर से-
दुनिया बहाल हो गई है-
अब तो झंडे नारे की दूकान-
फिर से खुशहाल हो गई है...

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: KANPUR KM BHAI POEM SONG UP VICTIMS REGISTER

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