इन्दा राजो, राजो कोडका पिटे गा...गोंडी गीत
ग्राम-चाहचड, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से कंचन वड्डे और उमेश्वरी दुग्गा एक गोंडी गीत सुना रहे है, इस गीत के माध्यम से बता रहे है कि गौरेया चिड़िया अपने सहेलियों के साथ मिलकर कितनी मेहनत से कोटा के अन्दर घोसला बनाती है:
रे रे लोयो रे रे रेला रे रे रेला-
इन्दा राजो, राजो कोडका पिटे गा-
येलो रांगे मितोड़ गा-
जोडिंग-जोडिंग वलीकी कोडका पिटे गा-
लोतिंग पुन्दा केवी कोडका पिटे गा-
सात जन्म आयल कोडका पिटे गा...
Posted on: Jul 14, 2018. Tags: KANCHAN WADDE UMESHWARI DUGGA
इंडोरा झुला झूले यो इंडोरा झुला झूले...गोंडी गीत
ग्राम-चाहचड, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से उमेश्वरी दुग्गा और कंचन वड्डे एक कर्रे (पहनावा) गोंडी गीत सुना रहे हैं:
रे रे लोयो यो रे रेला रेला रे रेला-
इंडोरा झुला झूले यो इंडोरा झुला झूले-
इर्सी पीड़ा ते पके जोड़ी जननि-
जोड़ी-जोड़ी इमा नाटेनोर जोड़ी-जोड़ी-
गोटुल दाई न इतक रोल रो...
Posted on: Jul 14, 2018. Tags: KANCHAN WADDE UMESHWARI DUGGA
योरा बोडा मडमा, योरा बोडा मडमा...गोंडी विवाह गीत
ग्राम-चाचड़, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से उमेश्वरी दुग्गा और कंचन वड्डे एक गोंडी विवाह गीत सुना रहे हैं:
रे रे लयो रेला रे रे लोयो रेला रेला रे लोयो रेला-
योरा बोडा मडमा, योरा बोडा मडमा-
झिमिर-झिमिर टंडा मोदुन लेवा टंडा रो-
तोया काय किरा सुंदर लेवा साय-
जाति बाति लयोर जाति बाति व्यवोर-
झिमिर-झिमिर टंडा मोदुन लेवा टंडा रो...
Posted on: Jul 13, 2018. Tags: GONDI SONG KANCHAN WADDE UMESHWARI DUGGA
रेला रेला रे रेला डिंडा ये राजु राजू रोय...गोंडी गीत
ग्राम-चाचड़, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से उमेश्वरी दुग्गा और कंचन वड्डे एक गीत सुना रहे है:
रेला रेला रे रेला डिंडा ये राजु राजू रोय-
हेय देवा तमो डिंडा राज ने मंदी रोय-
जोड़ी रे जोड़ी मंदीट तमो रोय-
गोटू दे दायना इतेक रोय लयोर लकदीन रोय-
रेला रेला रे रेला डिंडा ये राजु राजू रोय...
Posted on: Jul 13, 2018. Tags: KANCHAN WADDE UMESHWARI DUGGA
कौआ और भैंस की एक कहानी: कुआ भैंस की पीठ पर क्यों बैठता है? (गोंडी भाषा में)
ग्राम-चाचड़, तहसील-दुर्गकोंदल, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कंचन वड्डे गोंडी भाषा में कहानी सुना रही है : एक पेड़ के ऊपर कौआ बैठा था नजदीक ही एक खेत में पानी पीने एक भैस आया कौआ बोला भैसा भैया मै भी आपके जैसा ही पानी पी सकता हूँ उसके ही बगल में दो खेत में पानी भरा था दोनों ने कहा एक-एक खेत का पानी पीना तय हुआ दोनों पानी पीना शुरू कर दिया थोडा सा पानी छोटा कौआ तक गया परन्तु हिम्मत नहीं हारा कुछ ही समय में खेत मालिक आया और जिस खेत का पानी को कौआ पी रहा था उसी खेत को फोड़ दिया पूरा खेत खाली हो गया कौआ बहुत खुश हुआ! पानी मैंने पी लिया!और भैस हार गया तब से भैसा के पीठ पर कौआ बैठ रहा है!
