हिन्द देश के निवासी, सभी जन एक हैं..गीत
नमस्कार साथियों मैं सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से आपको एक गीत सुनाना चाहता हूँ:
हिन्द देश के निवासी,
सभी जन एक हैं,
रंग रूप भेष भाषा चाहे अनेक हैं,
कोयल की कूक हारी,
पपीहे की पेर न्यारी,
गा रहे तराना बुलबुल, राग मगर एक है..
Posted on: Nov 02, 2024. Tags: Suresh Song
बेला फूले अभिराज कि माला किसके गले डालूँ.. गीत
नमस्कार साथियों मैं सुरेश कुमार बड़वानी मध्यप्रदेश से आपको एक गीत सुनाना चाहता हूँ:
बेला फूले अभिराज
कि माला किसके गले डालूँ
राम गले डालूँ कि सीता गले डालूँ
सीता जी के लंबे लंबे बाल
कि माला किसके गले डालूँ..
कृष्ण गले डालूँ कि राधा गले डालूँ
वो तो रचाए रास कि माला किसके गले डालूँ..
Posted on: Nov 02, 2024. Tags: Suresh Kumar Song
हमारे ग्राम में नल-जल का मोटर तीन माह से खराब है, कृपया अधिकारी को फोन करें..
मैं भागीरथ वर्मा ग्राम पोस्ट हिरोरी टोला सेनार थाना पखरी जिला नवादा बिहार से बोल रहा हूँ हमारे ग्राम में नल-जल का मोटर खराब हुए तीन महीना हो गया है। हमने 25 सितंबर को पखरी बरामा बी डी ओ साहब से बात किया। उन्होंने पी एच ई विभाग के प्यारे लाल से बात करने बोले। उन्होंने 10 दिन मे पंप सुधार देने का आश्वासन दिया। आप सभी से अनुरोध है कि बी डी ओ 9031071699 पी एच ई विभाग @9199636016 और गाँव के मुखिया 9199508191 से बात कर हमारी समस्या सुलझाने में मदद करें। हम आपके आभारी रहेंगे। भागीरथ वर्मा@9039142049
Posted on: Oct 30, 2024. Tags: Bhagirath Verma Water Bihar
पर्यावरण के स्वच्छ बनाव हो भैया,प्रदूषण के दूर भगाव: पर्यावरण जागरूकता गीत
कठपुतली कलाकार सुनील सरला,मुजफ्फरपुर बिहार से पर्यावरण जागरूकता गीत सुना रहें हैं:
पर्यावरण के स्वच्छ बनाव हो भैया,
प्रदूषण के दूर भगाव,
धुआं धक्कड़ से फैले प्रदूषण,
हवा जहरीली मुस्किल में जीवन,
ई बात सबके बताव हो,
ई बात सबके बताव हो भईया,
प्रदूषण के दूर भगाव,
हवा में फैलल बा जहरिया,
प्रदूषण भगाव ए भईया,
प्रदूषण भगाव ए दीदी,
हवा में फैलल बा जहरिया,
प्रदूषण भगाव ए भईया..
Posted on: Oct 29, 2024. Tags: Sunil Sarla Song
" वे डरते हैं ": कविता
” वे डरते हैं ”
वे छात्रों से नहीं डरते,
वे बेरोजगारों से नहीं डरते,
वे मजदूरों से नहीं डरते,
वे किसानों से नहीं डरते,
वे आदिवासियों से नहीं डरते,
वे जनता से भी नहीं डरते,
जिनके कंधे पर सवार रहते हैं,
जिनको लूट कर खाते हैं,
क्योंकि उनको दबाने,
पुलिस फौज जो बनाकर रखे हैं,
वे डरते हैं कवियों से लेखकों से,
वे डरते हैं सांस्कृतिक कर्मियों से कार्टूनिस्टों से,
वे डरते हैं सोशल मिडिया के पत्रकारों से,
वे डरते हैं अपंग साईं बाबा जैसे विचारवानों से,
वे डरते हैं बराबर राव जैसे विचारवानों से,
वे डरते हैं सुधा भारद्वाज के जैसे,
अनेकों विचारवान महिला पुरूषों से,
कहीं ये विचारवान लोग,
हमारे लूट रूपी राज सत्ता को नेस्तनाबूद कर,
अमीरी गरीबी खत्म कर,
समतामूलक राज न बना दे ।
” मजदूर ”
