मेरा मन प्रेम पुजारी, मेरा मन जाया रे...होली गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक होली गीत सुना रहे हैं:
मेरा मन प्रेम पुजारी, मेरा मन जाया रे-
कोई कहे नंदलाल, कोई कहे मुरली वाला-
कोई कहे धरो धरो, कोई कहे बांध डारो-
कोई कहे मधुवाला, कोई कहे गोपाला-
कोई कहे दधि चोर, कोई कहे माखन चोर...
Posted on: Mar 10, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADHIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
हमें सखी ला डहरिया हो, नंदी लाला की होई गये...विवाह गीत-
जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश) से मुन्नी बाई और इंद्रवती एक गीत सुना रहे हैं| ये गीत शादी के मौके पर गाते हैं:
हमें सखी ला डहरिया हो, नंदी लाला की होई गये-
ससुरो हमारी, सुना नई हो, बारिकिया-
मिरकै न दै परोसिया-
नदी लाला की पुजी गये...
Posted on: Mar 10, 2019. Tags: BABULAL NETI MARRIGE MP SHAHDOL SONG VICTIMS REGISTER
हैण्डपंप खराब है, सुधार के लिए आवेदन करने पर कारवाही नहीं होती...मदद की अपील-
ग्राम-जोलगी, पोस्ट-रामगढ़, तह्सील-भरतपुर, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से आनंद प्रसाद यादव बता रहे हैं, वार्ड क्रमांक 10 यादव पारा में हैण्डपंप खराब है| जिससे लोगों को पानी की दिक्कत होती है| उन्हें 1 किलोमीटर दूर नदी से पानी लाना पड़ता है| उन्होंने समस्या को हल कराने के लिये संबंधित कार्यालय में आवेदन किया, लेकिन कोई कारवाही नहीं हो रही है| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों से अपील कर रहे हैं कि दिये गये नंबरों पर बात कर समस्या को हल कराने में मदद करे: PHE विभाग SDO@9993786817, इंजीनियर@9424258483, 9575625342, मकैनिक टेकाम@9753841687, 7909676751. संपर्क नंबर@9826545975.
Posted on: Mar 10, 2019. Tags: ANAND PRASD YADAV CG KORIYA PROBLEM SONG VICTIMS REGISTER WATER
मेरे महबूब वतन, तुझ पे कुरबां ये जां, तुझपे कुरबान ये तन...देश भक्ति गीत-
ग्राम-पहाड़िया, पोस्ट-उसरा, जिला-सतना (मध्यप्रदेश) से संतोष कुमार धावी एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं:
मेरे महबूब वतन-
तुझ पे कुरबां ये जां, तुझपे कुरबान ये तन-
आज सारा जहां, तेरे दीपो से सजा-
आज फनकार सा फन-
तेरा सौदाई बना, आज सौरभ सा सनम-
तेरे दीपो से सजा, आज फनकार सा फन...
Posted on: Mar 10, 2019. Tags: MP SANTOSH KUMAR DHAVI SATNA SONG VICTIMS REGISTER
मुझे तुम इतना जगह दे दो कि मेरा चार पाई तो बिछ जाये...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
मुझे तुम इतना जगह दे दो कि मेरा चार पाई तो बिछ जाये-
मुझे तुम इतना अन्न दे दो कि मेरा दिन गुजर जाये-
मुझे इतना कपड़ा दे दो कि मेरा तन ढक जाये-
क्या लेकर आया है, क्या लेकर यहां से जाना है-
मुठ्ठी बांध के आया है, हांथ पसारे जायेगा-
तन कपड़ा भी तेरा साथ नहीं, फिर बईमानी लूट पाट क्या करना है...
