मेरी अभिलाषा है...कविता-
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से श्वेता कुमारी एक कविता सुना रही है :
सूरज सा चमकू मै, चंदा सा चमकू मै-
जगमग उज्जवल तारो सा दमकू मै-
मेरी अभिलाषा है-
फूलो सा महकूँ मै, विहागो सा चहकू मै-
कुंचित सा वन उपवन-
कोयल सा कुह्कुं मै, मेरी अभिलाषा है...
Posted on: Jul 21, 2019. Tags: CG KABIRDHAM POEM SHWETA KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
मेरा एक सवाल...कविता-
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से स्वेता कुमारी एक कविता सुना रही है :
एक चौपाल है वहां पर कुछ लोग बैठे हैं-
तभी गीत की आवाज उमड़ रही है-
चूं चूं,चूं चूं चिड़िया चहकी-
मह मह, मह मह खुशिया महकी-
पर्वत पिता ने लाली खोली-
भारत माता बेटो से बोली...
Posted on: Jul 20, 2019. Tags: CG KABIRDHAM POEM SONG SWETA KUMARI VICTIMS REGISTER
गेहूं गाये खेत-खेत म और बाजरा छम-छम नाचे...कविता-
ग्राम-कृष्णा नगर, धामनी, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से देवसन कुमार सरुता एक कविता सुना रहे हैं :
गेहूं गाये खेत-खेत म और बाजरा छम-छम नाचे-
चना बजता घूंघूंर छन छन और मूंग चयो कविता बाचे-
लोक गीत की कड़ी-कड़ी में जीवन का सरगम-
लोक कला का जादू जैसा, कदम-कदम बंधन लगता है...
Posted on: Jul 20, 2019. Tags: BALRAMPUR DEVASAN KUMAR SARUTA POEM SONG VICTIMS REGISTER
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ...देश भक्ति गीत-
जिला-जबलपुर (मध्यप्रदेश) से राजकुमार काछी एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं :
है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ-
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ-
काले-गोरे का भेद नहीं, हर दिल से हमारा नाता है-
कुछ और न आता हो हमको, हमें प्यार निभाना आता है-
जिसे मान चुकी सारी दुनिया, मैं बात वो ही दोहराता हूँ-
भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ...
Posted on: Jul 20, 2019. Tags: BALRAMPUR CG RAJKUMAR KACHHI SONG VICTIMS REGISTER
लेती नहीं दवाई माँ, जोड़े पाई-पाई माँ...कविता-
मालिघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कविता सुना रहे है :
लेती नहीं दवाई माँ, जोड़े पाई-पाई माँ-
दुःख थे पर्वत, राई माँ, हारी नहीं लड़ाई माँ-
इस दुनियां में सब मैले हैं, किस दुनियां से आई माँ-
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे, गरमा गरम रजाई माँ-
जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई माँ-
बाबू जी तनख़ा लाये बस, लेकिन बरक़त लाई माँ-
बाबूजी थे सख्त मगर, माखन और मलाई माँ-
बाबूजी के पाँव दबा कर, सब तीरथ हो आई माँ-
नाम सभी हैं गुड़ से मीठे, मां जी, मैया, माई, माँ...
