चलो नदिया के तीरे हवे मोर गांव गा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
चलो नदिया के तीरे हवे मोर गांव गा-
कोर्री बोड़ा झरिया-झरिया खारीर पड़े हवे-
तमनार ओकर नाव गा-
चारो कोती खेत खार मंझा में मोर गांव गा-
आमा बोराई, महुआ बोराई, खाओं खाओं गा...
Posted on: Mar 15, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
निरंतर प्रयास करने वाले को सफलता मिलती है और सोने वाले के हाँथ असफलता आती है...कहानी-
एक बार की बात है | जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे| दोनों में गहरी मित्रता थी| एक बार दोनों में चर्चा हुई| एक दौड़ लगाते हैं| जो आगे पहुंचेगा वही विजेता होगा| दोनों ने कहे अनुसार दौड़ लगाई| खरगोश तेजी से दौड़कर आगे निकल गया| कुछ दूर जाने के बाद उसने देखा कछुआ बहोत पीछे है| थोड़ा आराम कर लिया जाय| वह आराम करने लगा और उसे नीद आ गई| कछुआ निरंतर चलते रहा और चलते-चलते आगे निकल गया| जब तक खरगोस की नीद खुली कछुआ जीत चुका था| इस तरह कहानी से सीख मिलती है| निरंतर काम करने वाले को सफलता मिलती है और सोने वाले के हाँथ असफलता आती है|
Posted on: Mar 15, 2019. Tags: BALRAMPUR CG MINA YADAV SONG STORY VICTIMS REGISTER
खाल्हे मूडा, ऊपर मूडा, कारी बनी, नागर मूडा, धान होत रहिस कुढा-कुढा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
खाल्हे मूडा, ऊपर मूडा, कारी बनी, नागर मूडा-
धान होत रहिस कुढा-कुढा-
जम्मो ला ले बोरी जिंदल बूढ़ा-
सरदार डीपा, जननी खार, तेलाई खार-
ताव मूडा, बराही खार, छोटे सेमरिया-
बड़े सेमरिया, कुदरी खार गा...
Posted on: Mar 15, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
बुढा देवा जय बुढा देवा, गाव सेवा तोर, करो सेवा...बुढा देव गीत-
ग्राम-नीलकंठपुर, पंचायत-गोरगी, पोस्ट-डिज़ावल, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से जगदेव प्रसाद पोया एक बुढादेव आरती गीत सुना रहे हैं:
बुढा देवा जय बुढा देवा-
गाव सेवा तोर, करो सेवा-
सुनले अरजी मोर, सुनले बिनती-
सुनले मोर पुकार बड़ा देव, करदे मोर उद्धार...
Posted on: Mar 15, 2019. Tags: CG JAGDEV PRASAD POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
मछली जल की रानी है, रानी है, रानी है...बाल कविता -
ग्राम-गीदम बेड़ा, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से चंद्रिका पोटाई एक बाल कविता सुना रही हैं:
मछली जल की रानी है, रानी है, रानी है-
हांथ लगाओगे तो डर जायेगी-
बहार निकालोगे तो मर जायेगी-
पानी में डालोगे तो तैर जायेगी-
दाना खिलाओगे तो खा जायेगी-
मछली जल की रानी है, रानी है, रानी है...
