स्वास्थ्य स्वर : चर्म रोग का घरेलू उपचार-
प्रयाग विहार, मोतीनगर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से वैद्य एच डी गांधी चर्म रोग का घरेलू उपचार बता रहे हैं| अपामार्ग या चिरचिटा जिसे लटजीरा के नाम से भी जाना जाता है| उसका जड़ 50 ग्राम, नीम की पत्ती 50 ग्राम, गंधक 5 ग्राम और करंज का तेल 150 ग्राम लें, अब गंधक को छोडकार सभी को पीसकर करंज के तेल में उबालें| तेल जब जल जाये उसे छानकर ठण्डा कर उसमे 5 ग्राम गंधक रसायन डाल दें, और मिलाकर एक डिब्बे में रख लें| ग्रषित स्थान को मिट्टी से धोयें और कपड़े से साफ कर लें| उसके बाद उसमे रुई की सहायता से तेल को दिन में तीन बार लगायें| भोजन में बैगन, मटर, चना, उड़द की दाल का प्रयोग न करें| अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं : एच डी गांधी@9111061399.
Posted on: Mar 27, 2019. Tags: CG HD GANDHI HEALTH RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
दुखवा से भरल मोरे गठरिया हो ऐ भोला...शिव भजन-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से सतरूपा पटेल एक शिव भजन सुना रही हैं :
दुखवा से भरल मोरे गठरिया हो ऐ भोला-
फेर दे नयनवा-
पूजा पाठ करी रोज, शिवा के मनाई बा-
बिना दर्शन किये पापहू न जाईला-
सरधा लागल बा तोहरे डगरिया हो ए भोला...
Posted on: Mar 27, 2019. Tags: CG DURGESH PATEL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कनलो हो चारा चरय, कनालो हो पानी पियो...कर्मा गीत-
ग्राम-बडवारी पारा, पंचायत-क्योटार, विकासखण्ड-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूखमती, कलावती, हिरमन और आरती एक कर्मा गीत सुना रहे हैं :
कनलो हो चारा चरय, कनालो हो पानी पियो-
कनलो हो माटी खेलो होरो-
ये जिनगी के कोन लेही भारो-
ठंगालो हो चारा चराय, सालो हो पानी पियय-
कुदारी लोहा माटी के रहय हो...
Posted on: Mar 27, 2019. Tags: CG GANESH AYAM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
जलवा में रोवे हो जल के मछरिया...गीत-
जिला-पलामू (झारखण्ड) से द्रोपती देवी एक सुवा गीत सुना रही हैं :
गेलवा मे रोवे अलख मछरिया-
जियवा ले ले रोवत पापा-
जियवा लेले रोवत चाचा-
जलवा में रोवे हो जल के मछरिया-
गेलवा मे रोवे अलख मछरिया-
जियवा ले ले रोवत पापा...
Posted on: Mar 26, 2019. Tags: DROPATI DEVI JHARKHANAD PALAMU SONG VICTIMS REGISTER
जो हमारा भला करे उसे नुकसान नहीं पहुंचना चाहिये...मगर और बिच्छू की कहानी-
एक मगर और एक बिच्छू दोनों गहरे मित्र थे| दोनों नदी के किनारे रहा करते थे| एक बार नदी में बाढ़ आ गया| मगर ने बिच्छू से कहा तुम मेरी पीठ पर बैठ जाना, मै तेज धार पार कर लुंगा| बिच्छू ने वैसा ही किया| जब दोनों तेज धार में थे| बिच्छू मगर के पीठ पर डंक मारने लगा| मगर ने कहा तुम मेरे मित्र हो, तुम्हे मुझे डंक नहीं मारना चाहिये| बिच्छू ने कहा ये मेरा स्वभाव है| ऐसा सुनते ही मगर ने पानी में गहरा गोता लगाया| जिससे बिच्छू पानी की धार में गिरकर मर गया| बिच्छू को उसके कर्मो का फल मिल गया| इस तरह कहानी से सीख मिलती है| जो हमारा भला करे उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिये|
