नूनी निमा येन्गा निमा नुनी ...गोंडी गीत :
गाँव-देवैयागुम्पू, पंचायत-कृष्णसागर, तहसील-बूर्गमपाड, जिला-भद्रादी कोत्तागूडेम (तेलंगाना) से पोडियम नरेन्द्र अपने साथी से एक गोंडी गीत सुना रहे है:
नूनी निमा येन्गा निमा नुनी
वयाली वय नूनी वया गारा पंडी ने माया वाडा
वयाली वय नूनी वया अले काया आन्र्दा नानो
वयाली वय नानो वया गारा पंडी ने माया वाडा
वयाली वय नूनी वया पलुसू कोला दूरं नूनी
वयाली वय नूनी वया....
Posted on: Feb 11, 2020. Tags: PODIYAM NARENDRA SONG TELANGANA
अले अले केला रा नूनी...गोंडी गीत
गाँव-देवैयागुम्पू, पंचायत-कृष्णसागर, तहसील-बूर्गमपाड, जिला-भद्रादी कोत्तागूडेम (तेलंगाना) से पोडियम नरेन्द्र कुमार एक गोंडी गीत सुना रहे हैं:
अले अले केला रा नूनी वेय पलोड़ी
बाती जन्जम पलोड़ वय
ओ यायो वाय रा नूनी वय
अंदर कर्मा मेलो रा नूनी वय पलोड़ी
बाती जन्जम पलोड़ वय
ओ यायो वाय रा नूनी वय...
Posted on: Feb 11, 2020. Tags: PODIYAM NARENDRA SONG TELANGANA
संत रविदास पर संदेश...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व संत रवि दास की जीवन के बारे जानकारी दे रहे हैं, संत रविदास का जन्म दिन माघ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है रवि दास वे महान पुरुष थे जिन्होंने धन को महत्व नहीं दिया, उन्होंने दीनता और दरिद्रता में रहना स्वीकार किया| ज्ञान को महत्व दिया, समाज को तोड़ने वाले जाती पाति के बंधनों को तोड़ने का प्रयास किया धन को महत्व न देकर ज्ञान को महत्व दिया, क्यों कि धन ख़त हो सकता है लेकिन ज्ञान नहीं|
Posted on: Feb 10, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG STORY VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
यह भारत वर्ष हमारा है हमको प्राणों से प्यारा है...गीत-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं:
यह भारत वर्ष हमारा है हमको प्राणों से प्यारा है-
है यहाँ हिमालय खड़ा हुआ शंकर शरिखा खड़ा हुआ-
जय हिन्द हमारा नारा है यह भारत वर्ष हमारा है-
जनमे थे यहीं राम सीता गूंजी थी यहीं मधुर गीता-
यमुना का शाम किनारा है यह भारत वर्ष हमारा है-
है मनोहर डोल रही वन में है कोयल बोल रही-
बहती सुगंध की धारा है यह भारत वर्ष हमारा है...
Posted on: Feb 09, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
मातृभक्त चाणक्य की कहानी...
बहोत काम लोग जानते हैं कि चाणक्य मातृभक्त थे उनका जन्म राज घराने में हुआ था| पिता की मृत्यू के बाद एक दिन चाणक्य की माँ ने उनसे कहा “मुझे ऐसा लगता है तू मुझे भूल जायेगा राजा बनने के बाद” तब उन्होंने पूछा कैसे ? माँ ने कहा तेरे सामने के दांत से ऐसा लगता है तो उन्होंने अपने सामने के दांत पत्थर से तोड़ दिया और राज पाठ छोड़कर वन में कुटिया बनाकर रहने लगे और पूरा जीवन माँ की सेवा किया| इतिहास में कई ऐसे लोग हुये हैं जिन्होंने अपने माता पिता की सेवा किया और आज लोग उन्हें याद करते हैं|
