आया मोचो दंतेश्वरी बुआ बयरमहाय...गीत-
ग्राम-मद्दपाल, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से रामलाल मांडवी एक गीत सुना रहे हैं:
आया मोचो दंतेश्वरी बुआ बयरमहाय-
बायदन कर बैन इंद्रावती सुंदर मोचो तुमके शरण-शरण हाय-
मै आय बस्तर जिला चो आदिवासी पीला-
बैलाडीला-बैलाडीला, बैलाडीला-बैलाडीला-
डका देईसे बारी उजर मोचो बस्तर कितलो सुंदर-
मछरी, चिरई आनी-बानी सयान सजन बड़ नानी...
Posted on: Feb 15, 2020. Tags: CG CHANDRABHAN MARKO KONDAGAON SONG VICTIMS REGISTER
कागज कर धरती कलम के नागर...गीत-
ग्राम पंचायत-बम्हनी, ब्लाक, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से इनती बाई और सुरती बाई एक गीत सुना रहे हैं:
कागज कर धरती कलम के नागर-
सियाई करा रे बृज बोदी-
बोलो रे भाई राम नाम के सेती-
कागज कर धरती कलम के नागर-
सियाई करा रे बृज बोदी-
बोलो रे भाई राम नाम के सेती...
Posted on: Feb 15, 2020. Tags: CG CHANDRABHAN MARKO KONDAGAON SONG VICTIMS REGISTER
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...कविता-
ग्राम पंचायत-बम्हनी, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से सुहाना ठाकुर और हनी एक कविता सुना रहे हैं:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोकों से लो, हिलना, जगत हिलाना-
दूध और पानी से सीखो, मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना-
वर्षा की बूँदों से सीखो, सबसे प्रेम बढ़ाना...
Posted on: Feb 15, 2020. Tags: CG CHANDRABHAN MARKO KONDAGAON POEM SONG VICTIMS REGISTER
सिर पर गंगा बहे नाग काला रहे...गीत-
ग्राम पंचायत-बम्हनी, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से सुखवंदिन एक गीत सुना रही हैं:
सिर पर गंगा बहे नाग काला रहे-
गाने वालो से चंदा उजाला रहे-
सुनने वालो से दीपक उजाला रहे-
सिर पर गंगा बहे नाग काला रहे-
गाने वालो से चंदा उजाला रहे-
सुनने वालो से दीपक उजाला रहे...
Posted on: Feb 15, 2020. Tags: CG CHANDRABHAN MARKO KONDAGAON SONG VICTIMS REGISTER
परेशानी सभी के जीवन में है उससे लड़ना और जीना सीखना चाहिये...कहानी-
एक कारीगर था, जो पत्थर तोड़ने का काम करता था, एक दिन वह एक फिल्म देखा जिसमे वह राजा के किरदार से प्रभावित हुआ, राजा को पालकी पर लेजाना नौकर, घोडा गाड़ी सभी को देखकर उसके मन में राजा बनने की इच्छा हुई और उसकी इच्छा पूरी हो गयी तो उसने सोचा की अब उससे बड़ा कोई नहीं है, एक उसके सेवक छतरी लाना भूल गये तब उसे धूप में तपना पड़ा, तब उसने सोचा कि मै सूरज होता तो दुनिया को तपाता, फिर वह सूरज बन गया तब उसे बादल ने ढक लिया, जब बादल से ढक गया तो बोला कास मै बादल होता, जब बादल बना तो हवा ने उड़ा दिया, तब सोचा कास मै हवा होता, हवा बना तो पहाड़ में टकरा गया, इस तरह से हारकर सोचा इससे अच्छा तो मै कारीगर ही ठीक था, दिन में काम करता और रात में आराम करता, कहानी से ये सीख मिलती है परेशानी सबके जीवन में है उससे लड़ना और जीना सीखना चाहिये|
