देखत देखत अंधवा होगे, सुनत होगे बहरा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
देखत देखत अंधवा होगे-
सुनत होगे बहरा-
देखत देखत आगी लगा गईन-
हमर पैरा गोर्रा-
खेत खार मा चिमनी गडा गयी-
वहां ले निकरी करिया करिया कुहरा...
Posted on: Mar 16, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
शाला भवन के लिये कई बार आवेदन कर चुके हैं सुनवाई नहीं होती है...
ग्राम पंचायत-तेमरू, ब्लाक, जिला-कोंडागांव (छत्तीसगढ़) से दसमु नुरेटी बता रहे हैं वे 2010 से स्कूल में कार्यरत हैं, जब वे पदस्त हुये थे तब शाला भवन नहीं था और आज भी भवन नहीं है, जिसके कारण उन्हें 5 कक्षाओं को पढ़ाने में समस्या होती है, शाला भवन के लिये शाला समित ने कई बार आवेदन किया है लेकिन भवन निर्माण नहीं हो रहा है भवन में बाउंड्रीवाल भी नहीं बना है जिससे पौधों को पशु खा जाते हैं इसलिये वे सीजीनेट के साथियों से अपील कर रहे हैं कि दिये नंबरों पर बात कर समस्या को हल कराने में मदद करें : संपर्क नंबर@9406349845. सरपंच@9340801871, सचिव@8224975760, CEO@7247947636.
Posted on: Mar 13, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL KEWAT KONDAGAON PROBLEM SONG VICTIMS REGISTER
होको तो बिदूर सैगो भोज देई...ओड़िया भजन-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक ओडिया भजन सुना रहे हैं:
होको तो बिदूर सैगो भोज देई-
तो साई पारी ला मोनो-
मुजेच दरबा जचिले कहीकी-
न छुवा जे भगवाना-
बपत बिजूर सबो भोज देई-
तो साई पारी ला मोनो...
Posted on: Mar 12, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
सूरज चाँद सितारे ये सब नील गगन के सितारे...कविता-
ग्राम-तमनार, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सूरज चाँद सितारे ये सब नील गगन के सितारे-
पेड़ पौधा फूल धरती को प्यारे-
पशु पक्षी जीव जन्तू सभी न्यारे-
नहीं किसी के मन में कोई हिंसा-
नहीं रखते किसी की हानि का मनसा-
विचरते स्वच्छंदता जो मिलता खा लेते मन में नहीं संसा...
Posted on: Mar 10, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
न छूटे दोसादारी हमार तो...गीत-
ग्राम-छुलकारी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से कन्हैयालाल केवट एक गीत सुना रहे हैं:
सुन लो मोर कविरा न-
न छूटे दोसादारी हमार तो-
न छूटे गाँव छुलकारी-
सुन लो मोर कविरा न-
न छूटे दोसादारी हमार तो-
न छूटे गाँव छुलकारी...
