यूही कट जाएगा सफर सांथ चलने से...गीत
शासकीय पूर्व माद्यमिक शाला गोटुलमुंडा, ब्लाक-दुर्गुकोंदल, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मान सिंह उसेंडी एक गीत सुना रहे हैं :
यूही कट जाएगा सफर सांथ चलने से-
कि मंजिल आयेगा नजर सांथ चलने से-
हम है राही प्यार के चलाना अपना काम-
पल भर में हो जाएगी हर मुस्किल नाकाम-
हौसला ना हारेंगे हम तो बाजी मरेंगे-
कहते हैं ये वादियां बदलेगा मौसम...
Posted on: Feb 27, 2018. Tags: MAN SINGH USENDI SONG VICTIMS REGISTER
कोई लाख करे चतुराई रे करम का लेख मिटे ना रे भाई...सत्संग गीत
जिला-डिंडौरी (मध्यप्रदेश) से महेन्द्र सिंह उइके एक गीत सुना रहे हैं:
कोई लाख करे चतुराई रे करम का लेख मिटे ना रे भाई-
जरा समझो इसकी सच्चाई रे करम का लेख मिटे ना रे भाई-
इस दुनिया में भाग्य के आगे चले न किसी का उपाय-
कागज हो तो सब कोई बांचे करम ना बांचा जाय-
एक दिन किसी किस्मत के कारण बन को गइने रघुराई रे-
काहे मनवा धीरज खोता काहे तू नाहक रोय-
अपना सोचा कभी नही होता भाग्य करे सो होय-
चाहे हो राजा चाहे भिखारी, ठोकर यही सब ने खाई रे...
Posted on: Feb 27, 2018. Tags: MAHENDRA SINGH UIKEY SONG VICTIMS REGISTER
कहाँ-कहाँ निकल गए, कहाँ निकल गए रे, मोर राज करैया यार...गीत
जिला-मंडला (म.प्र.) ब्लाक-मवई, पोस्ट मंगली, पंचायत-बान्द्र्बारी, वनग्राम-कुर्सीपार से तिरलोक सिंह परते एक गीत सुना रहे हैं:
कहाँ-कहाँ निकल गए कहाँ-
निकल गए रे मोर राज करैया यार-
बावन गढ़ ला जीत के कहाँ निकल गये यार-
जंगल खोजों झाड़ी खोजों यार-
नदिया खोजों नरवा खोजों-
खोजों जंगल झाड़ी हाय...
Posted on: Feb 26, 2018. Tags: SONG TIRLOK SINGH PARTE VICTIMS REGISTER
ऐ गोरी वो बंजारी डांड मा, बड़ा मजा आथे...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम पंचायत-बंजारीडांड, जनपद पंचायत-बैकुंठपुर, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से पतराज सिंह मरकाम एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
ऐ गोरी वो बंजारी डांड मा बड़ा मजा आथे-
बंजारी डांड के दीदी भैया मन, अब्बड़ मीठ-मीठ गोठिया थें-
इहां के संगी संगवारी मन हम ला देखे बर आथे-
कला मै सुनावों दीदी मन, कला मै सुनावों-
इहां के गोठ ला सुने बर मोला मजा आथे-
भरे जंगल हा दिखथे इहां बंजारी डांड के गाँव मा...
Posted on: Feb 25, 2018. Tags: PATRAJ SINGH MARKAM SONG VICTIMS REGISTER
उन नक़ल का करें प्रचार, लड़का तड़पेंय हजार...बघेली कविता
जिला-सिंगरौली (मध्यप्रदेश) थाना+तहसील-माड़ा, पोस्ट-बिन्दूल,ग्राम-जीर से अमोद सिंह गहरवार एक बघेली कविता सुना रहे हैं:
उन नक़ल का करें प्रचार लडिका तड़पेंय हजार-
कहएं तोहिं पास कराउब चाहे कोई बिध अपनाउब-
इतने में जो पास न होउब पुनः मूल्याङ्कन फार्म भराउब-
लड़का कुछ रहें सीधी कुछ रहें सतना कुछ तो रहें बिहार अउ पटना-
कुछ तो रहें बिन ददुआ के दादा और बतावें रहे थे बांदा-
गुस्सा रहे पुलिस तैनात होइगे चोर पुलिस के साथ-
पुलिसव् वाले नक़ल करवावें कुछ का कय चुटका वो पहुँचावे-
नक़ल करवावें रेलम पेल पास हो जैहें खेलय खेल-
लेकिन चेकर जो आवें पइहें तुरतय फार्म भराइन लाईहे-
जब शिक्षक लागें थर्राय सब लड़का लागें कर्राय-
परिवेक्षक जब पानी मंगवावें चपरासी चुटका लय धावे...

