वनांचल स्वर: हमें जंगले से सागौन, ईमली, आम आदि मिल जाता था...
ग्राम-धनेलीकन्हार, तहसील- कोरर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुकार राम बताते हैं कि 20 साल पहले जंगल काफी अच्छा था। जंगल से फल-फूल भी अच्छे से मिल जाता था। जिस शासन को जंगल को संभालने की ज़िम्मेदारी मिली है वह अपना काम ठीक से नहीं करते। पहले जंगल से सागौन, ईमली, आम आदि मिल जाता था। शासन अब जंगल का घेराव कर रहा है, जिसके कारण इनमें से कुछ नहीं मिल पाता। अब जंगल से जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं मिलती। सम्पर्क@6268921280. (185599) GT
Posted on: Feb 14, 2021. Tags: CG KANKER SUKAR RAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: घटते जंगलों के कारण जानवर भू घट रहे हैं और प्रदुषण भी बढ़ा है ...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लखराम सलाम 1960-1965 की बात बतातें हैं उस समय जंगल बड़े हुआ करते थे| जंगले में बाघ, हिरण, सांभर, वनभैंसा, मयूर, बरहा(जंगली सुवर), खरगोश, गिलहरी और गैंडा हुआ करते थे| पेड़ों की बाते करें तो बांस के पेड़ थे| मैं उस समय 5 साल का था| जब 20-25 वर्ष का हुआ तो चीता, बरहा, खरगोश और पक्षी समय के साथ गायब होने लगे| हम लोग शिकार पर भी जाते थे| जानवरों के गायब होने का मुख्य कारण खनन है| खुदाई होते हुए 7-8 साल हो गया है, वहां से कई तरह क जहरीले पदार्थ निकलते हैं और रही बात फायदे की तो वह बाहरियों का ही हो रहा| (185556) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: खनन से प्रदूषित होते जंगल...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम बताते हैं, चाहचढ़ की भूमि पर खनन होता है| वनभूमि ग्राम कि है जो कई ग्रामों के अंतर्गत आती है| खनन की वजह से लाल पानी निकलता है जो जहरीला है| लाल पानी की वजह से खेती पर भी असर हो रहा है, लोगों के स्वस्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है| पानी में लोहेकी मात्र ज्यादा है| इन खदानों में गाँव के 18 मजदूर भी काम करते हैं| खदान के मालिक कहते हैं कि खादानों से ग्रामवासियों का भी फायदा है, और यह झूठ है| ड्राईवर, मजदूर और अन्य कर्मचारी सभी बाहर के हैं| यह खनन का कार्य 2013 से शुरू हुआ और बनने में 2 साल का समय लगा| खनन कार्य 72 एकड़ में फैला हुआ है| खनन की वजह से आस पास की जगह पर हमेशा धुल उड़ती है| जिसके कारण ग्रामवासियों का स्वस्थ्य ख़राब होता है| खनन कार्य को रोकने के लिए हम लोग हर साल 15 दिनों के लिए आन्दोलन भी करते हैं, लेकिन इस साल महामारी कि वजह से आन्दोलन नहीं किया जा सका| खदान मालिकों ने लोगो को खूब बहलाया फुसलाया और लालच भी दिया, जरूरत का सामान भी दिया था|(185553) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: जंगली पेड़ों के लाभ...
ग्राम-चाहचड़, तहसील भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से संतराम सलाम बताते हैं कुसुम के बीज से जो तेल मिलता है, उसे लगाने से खुजली खत्म होती है। महुआ का पेड़ भी बहुत महत्त्व रखता है, इसको देवी देवताओं में भी चढ़ाया जाता है और खाया भी जाता। फल टोरी बीनते हैं। तेल खाने, लगाने में उपयोग किया जाता है। क्योटी का तेल घी के बराबर स्वाद देता है। भेलवा का तेल कांटा या खूंटा चुभने पर लगाया जाता है| दवाई के रूप में, यह जहरीला भी होता है। इसको गर्म करके लगाया जाता है। अंगुड का तेल एक ही बेल में कई सारे लगते हैं, इसके बीज का तेल दर्द और घाव पर लगातें हैं। भोईनीम सबसे ज्यादा कड़वा होता है, और ज्यादा असरदार भी है। इसका उपयोग लोग अभी भी करते हैं। ये पेड़ अभी भी हैं।
संपर्क@7647070617. (185781) GT
Posted on: Feb 09, 2021. Tags: CG KANKER SANTRAM SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: सिमटते जंगल...
ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़)
सुकराम फरदिया बतातें हैं कि २० वर्ष पहले जंगल अच्छी स्तिथि में था, झाड भी बहुत थे| हमें फल-सब्जी भी जंगल से आसानी से मिल जाता था| जंगल से मिलने वाले खाद्य पदार्थो से हमारा गुजारा हो जाता था| जंगल से फल लाकर हम लोग बेचते भी थे| लेकिन अब सब खत्म होता जा रहा है, शासन ध्यान नही दे रहा है| शासन वाले गाँव वालों से आकर बोलते ही कि जंगल बचाओ लेकिन वो खुद ध्यान नही देतें| नर्सरी भी खत्म हो गयी है| सागौन का पेड़, अमली, कटहल यह सब जंगल में नर्सरी में लगाया गया था| लेकिन अब खत्म हो गया है| जंगल खत्म हो चुका है, इसलिए घेराबंदी कि जा रही है जंगल को बचाने के लिए| अब लकड़ी नही मिलता, शासन सिलिंडर गैस देता है| अपनी निजी ज़मीन पर ही हम उगाते हैं|
सम्पर्क:- 6568921280(RM)
