संत रविदास पर संदेश...
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व संत रवि दास की जीवन के बारे जानकारी दे रहे हैं, संत रविदास का जन्म दिन माघ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है रवि दास वे महान पुरुष थे जिन्होंने धन को महत्व नहीं दिया, उन्होंने दीनता और दरिद्रता में रहना स्वीकार किया| ज्ञान को महत्व दिया, समाज को तोड़ने वाले जाती पाति के बंधनों को तोड़ने का प्रयास किया धन को महत्व न देकर ज्ञान को महत्व दिया, क्यों कि धन ख़त हो सकता है लेकिन ज्ञान नहीं|
Posted on: Feb 10, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG STORY VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
यह भारत वर्ष हमारा है हमको प्राणों से प्यारा है...गीत-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं:
यह भारत वर्ष हमारा है हमको प्राणों से प्यारा है-
है यहाँ हिमालय खड़ा हुआ शंकर शरिखा खड़ा हुआ-
जय हिन्द हमारा नारा है यह भारत वर्ष हमारा है-
जनमे थे यहीं राम सीता गूंजी थी यहीं मधुर गीता-
यमुना का शाम किनारा है यह भारत वर्ष हमारा है-
है मनोहर डोल रही वन में है कोयल बोल रही-
बहती सुगंध की धारा है यह भारत वर्ष हमारा है...
Posted on: Feb 09, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
मातृभक्त चाणक्य की कहानी...
बहोत काम लोग जानते हैं कि चाणक्य मातृभक्त थे उनका जन्म राज घराने में हुआ था| पिता की मृत्यू के बाद एक दिन चाणक्य की माँ ने उनसे कहा “मुझे ऐसा लगता है तू मुझे भूल जायेगा राजा बनने के बाद” तब उन्होंने पूछा कैसे ? माँ ने कहा तेरे सामने के दांत से ऐसा लगता है तो उन्होंने अपने सामने के दांत पत्थर से तोड़ दिया और राज पाठ छोड़कर वन में कुटिया बनाकर रहने लगे और पूरा जीवन माँ की सेवा किया| इतिहास में कई ऐसे लोग हुये हैं जिन्होंने अपने माता पिता की सेवा किया और आज लोग उन्हें याद करते हैं|
Posted on: Feb 08, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG STORY VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
कर सके तो दर्द दिल की दवा कर...कविता-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गंधर्व कविता सुना रहे हैं:
कर सके तो दर्द दिल की दवा कर-
न कर सके तो दुआ कर-
दुआ करने में ही तेरा कल्याण है-
अन्यथा तू जीते जी निष्प्राण है-
तू कौन होता है किसी के अहित करने वाला-
जो कुछ करने वाला है ओ तो भगवान है-
कर सके तो दर्द दिल की दवा कर ...
Posted on: Feb 06, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
भगवान उपहार से नहीं सच्ची श्रद्धा से खुस होते हैं...कहानी-
एक गरीब व्यक्ति था वह एक बार दर्शन के लिये रात के समय मंदिर गया और पुजारी से कहा मै भगवान से मिलना चाहता हूँ, पुजारी बोले बहुत रात है सुबह आना, तब वह बोला नहीं मुझे अभी भगवान से अकेले में मिलना है| वह व्यक्ति ज़िद पर अड़ा हुआ था तो पुजारी ने पूछा कुछ भेंट लाये हो तो उसने कहा नहीं लाया हूँ, मैं गरीब हूँ क्या भेंट दे सकता हूँ, वह विचार करने लगा क्या भेट दिया जाये, तब उसने सोच संसार में सबसे बड़ा भेंट तो ज्ञान है जो महाभारत ग्रन्थ से मिलता है इसलिये वह महाभारत ग्रंथ लाया, लेकिन उससे बात नहीं बनी, फिर पुजारी उसे कुछ और लाने के लिये कहा तब दूसरे दिन तलवार लेकर आया और बोला यह सबसे बहादुर व्यक्ति की तलवार है, उससे भी बात नहीं बनी और उसे कुछ और लाने के लिये कहा गया फिर तीसरे दिन वह सबसे बड़े राजा का मुकुट लेकर आया लेकिन उससे भी बात नहीं बनी और उसे कुछ और लाने को कहा गया| फिर वह परेशान होकर सोचने लगा क्या लाया जाय, तब वह अगले दिन आते समय एक ऐसे व्यक्ति को देखा जो विकलांग है भूखा है असहाय है, जब वह मंदिर पंहुचा तो पुजारी से बोला आज मै कुछ नहीं लाया कुछ मांगने आया है, पुजारी बोले क्या ? गरीब व्यक्ति उस अपाहिज, असहाय, भूखे व्यक्ति के बारे में बताया और उसके लिये कुछ माँगा यह देखकर मूर्ति आँखों में आंसू आ गये कहानी का सरांस यह है कि भगवान उपहार नहीं सच्ची श्रद्धा से खुस होते हैं...
