हमारे गाँव में रोड नहीं है, और पानी की सुविधा भी नहीं है...मदद की अपील-
गॉंव-वंजमगूडम, तहसील-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से डाक्टर हनीफ गाँव के निवासी वेट्टी रामदासु से बात कर रहे है| वे बता रहे है, हम काफ़ी सालों से गाँव रह रहे है| जमीन का पट्टा है| लेकिन बोरिंग नहीं है| जिसके कारण पानी की समस्या होती है| खेती बाड़ी करने को दिक्कत होती है| पूरा खेती बारिश पर निर्भर है| साथ ही गाँव में रोड की भी समस्या है| जिससे कारण लोगो को आने जाने में दिक्कत होती है| दिये गये नंबर पर बात कर समस्या हो हल कराने में मदद करें : संपर्क नंबर@7587161958.
Posted on: Jul 27, 2019. Tags: CG PROBLEM SK HANIF SUKAMA
रेला, रेला रे रेला...गोंडी रेला गीत-
ग्राम-पत्ता किचोली, पंचायत-इंजेरम, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव ग्रामीण महिलाओ के साथ गोंडी भाषा में एक गीत सुना रही हैं :
रेला, रेला रे रेला-
रेला, रेला रेला रे रेला-
रेला रे रेला, रेला रे रेला-
रेला, रेला रे रेला-
रेला, रेला रेला रे रेला-
रेला रे रेला, रेला रे रेला...
Posted on: Jul 26, 2019. Tags: CG MOHAN YADAV SONG SUKAMA
पानी की सुविधा नहीं है, किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं, बोरिंग लगवाने में मदद करें...
मंडल-दासिर गुडम, पारा-केताकिचोली, थाना-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से एस के हनीफ बता रहे हैं| उनके गाँव पानी की सुविधा नहीं है| जिसके कारण वे खेती नहीं कर पा रहे हैं| भूमि में फसल नहीं उगता है| उनका कहना है| बोरिंग लग जाने से वहां पानी की सुविधा हो जायेगी और आदिवासी किसान खेती कर सकेंगे| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों से अपील कर रहे हैं| दिये गये नंबरों पर अधिकारियो से बात कर बोरिंग लगवाने में मदद करें : CEO@9407675317. संपर्क नंबर@9492160786.
Posted on: Jul 23, 2019. Tags: CG KONTA PROBLEM SK HANIF SUKAMA
ले ये दुला याटीको दूदे दुवे...धुर्वा गीत-
कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से प्रतिमा अपने सखियों के साथ धुर्वा भाषा में एक गीत सुना रही हैं :
ले ये दुला याटीको दूदे दुवे-
ये दूदे टगरी मा के यथा कुना न-
लातियते को-
ले ये दुला याटीको दूदे दुवे-
ये दूदे टगरी मा के यथा कुना न-
लातियते को....
Posted on: Jun 14, 2019. Tags: BHAN SAHU CG SONG SUKAMA
आदिवासी त्योहार पेन पंडुम का गीत संगीत-
कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से भान साहू कोंटा में हो रहे कार्यक्रम पेन पंडुम में शामिल हैं| ये आदिवासियों का पारंपरिक त्योहार है| जिसे सभी मिलकर ढोल बजाते है| गीत गाते, और नाचते हैं| अपने देवी देवताओं की पूजा करते हैं| और जीवन में हुई गलतियों के लिये क्षमा मांगते हैं| प्रार्थना करते हैं|

