नानो, कोम्मा लेलो...गोंडी गीत
ग्राम पंचायत-बट्टीगुडम, जिला-भाद्रदी कोठागुडम (तेलंगाना) से भीमनी एक गोंडी भाषा में एक गीत सुना रही हैं :
रेला यो रेला-रेला, रेला-रेला-
रेला, रेला, रेला-
दनरात तो पिल्लो नानो, कोम्मा लेलो-
नानो, कोम्मा लेलो-
अड़निन्नो नाड़ नानो कोम्मा लेलो-
नानो, कोम्मा लेलो...
Posted on: Jul 18, 2019. Tags: BHADRADI KOTHAGUDAM NARAYAN SONG TELANGANA
Aadiwasi Bultoo Radio Aandhra,Telangana And Chhatigadh
Today Narayana presenting Bultoo Radio Program in Gondi and Hindi language, In this latest edition of Bultoo radio discussing issues from Telangana and Chhattisgarh. Villagers use their mobile phones to record these songs and reports. They call 08050068000 to record. Now this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband or from a download center nearby. They can also get it from someone nearby with smartphone and internet and then via Bluetooth.
Posted on: Jul 13, 2019. Tags: NARAYANA TELANGANA
आदिवासी महिला गोंडी भाषा में गीत सुना रही है ...
ग्राम कृष्णा सागर,पंचायत कृष्णा सागर,ब्लाक भुर्गुमफाड,जिला भद्रादीकोतागुडेम,(तेलंगाना) नारायणा जी के साथ मडकंम मंगम्मा एक जीसस गीत सुना रही है ...
इस्लेम लोना इस्लेम लोना ए सैया जरा मिस्तेंडे
ये याव्वा कन्या मर्या गर्बम तल्ली
आलिंजी साची ई नेला साची परशुद्र जनामिस्तेंदे ये
यव्वा ओंडे माँ रक्षा तोडू
वारा अव्व वारा अव्व नुडा मिरी वाडा
वारा अन्ना वारा अन्ना नुडा मिरी वाडा ...
Posted on: Jul 11, 2019. Tags: NARAYANA TELANGANA
सरकार की मदद से स्वसहायता समूह चलाकर अपना जीवन यापन करते हैं...
ग्राम-गढ़बेंगाल, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से लछंदी हुसेंडी, सुगाय सोरी, निरबती मंडावी बता रही हैं| वे अपने साथियों के साथ स्वसहायता समूह चलाती हैं| जिसमे वे होटल का काम करते हैं| उसी से अपनी जीविका चलाते हैं| समूह में 11 सदस्य हैं| 6 साल वे काम कर रहे हैं| ये काम उन्होंने सरकार की मदद से शुरू किया था| और वे काम आगे बढ़ा रहे हैं| सभी अपने काम से खुश हैं|
Posted on: Jul 07, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG NARAYANPUR SONG STORY VICTIMS REGISTER
आदिवासी समुदाय के लोग शिकार के लिये धनुष और गुलेल का उपयोग करते हैं...
ग्राम-चिन्नार, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल ग्रामवासी बृजेश यादव, नट्टू, दिनेश, कंडी बता रहे हैं| वे वनों में जाकर पछियों का शिकार करते हैं| चूहों का शिकार करते हैं| इसके लिये धनुष और गुलेल का इस्तेमाल करते हैं| आदिवासी ग्रामीण शर्दी, गर्मी, बरसात सभी समय शिकार करते हैं| वे ग्रुप बनाकर शिकार करने जाते हैं|
