करौंदा ला कौन बने भेटो रे...गीत-
ग्राम-कोटया, थाना, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
हाँ-हाँ करौंदा ला कौन बने भेटो रे-
अईठत हवे मुरेरत हवे छुटत हवे परान-
समय ला खोजो कोठारी ला खोजेव-
खोजेव अंगना दुवार-
नदिया ला खोजो नरवा खोजो-
खोजो केदली कछार...
Posted on: Sep 07, 2019. Tags: CG MEWALAL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER DEWANGAN
मोला मार डारिस भाई दारू के पियाई...गीत-
ग्राम-कोटिया, थाना-विकासखण्ड, प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
मोला मार डारिस भाई दारू के पियाई मोला मार डारिस-
पहले मै सुघर रहें खेत मा कमाओ-
नूनी के दाई बासी लेजे राजा कस मै खांओ-
मात के मै ओखेला करे तो पिटाई-
पहले मै कान धरा थों दारू नही पिहों-
खेत ले पसीना गर के सुघर ले मै जिहूँ-
दारू नही जहर हवे अरे झन पिया रे भाई-
मोला मार डारिस भाई दारू के पिआई मोला मार डारिस...
Posted on: Sep 07, 2019. Tags: CG DEWANGAN MEWALAL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
Bultoo (Bluetooth) Radio in Hindi and Gondi : 7th Sept 2019...
Today Bhola Baghel and Uma Dhruv are presenting Bultoo Radio in Hindi and Gondi Languages, In this latest edition of Bultoo radio discussing issues from Andhra Pradesh and Chhattisgarh. Villagers use their mobile phones to record these songs and reports. They call 08050068000 to record. Now, this program can be downloaded by people from their Gram Panchayat office if it has Broadband center nearby. They can also get it from someone nearby with smartphone and internet and then via Bluetooth.
Posted on: Sep 07, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL BULTOO RADIO SONG UMA DHRUV VICTIMS REGISTER
गणेश चतुर्थी के अवसर पर भजन गीत-
जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से नरेश बुनकर गणेश स्थापना स्थल से भजन सुना रहे है, इस समय पूरे भारत में जगह-जगह गणेश चतुर्थी उत्सव हर्ष उल्लास के साथ मनाया जा रहा है गणेश जी की मूर्ति स्थापना कर जिला कबीरधाम छत्तीसगढ़ से एक भजन गीत...
Posted on: Sep 07, 2019. Tags: CG KABIRDHAM NARESH BUNKAR SONG VICTIMS REGISTER
आदिवासी समुदाय नवा खाई का कार्यक्रम कर रहे है....
जिला नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल, राम लाल पोटाई, श्यामत पोटाई, संकू घावडे बता रहे है | धान की फसल नई बलिया आने पर थोडा सा नया चावल निकाल कर आदिवासी समुदाय के लोग प्रत्येक साल में एक बार नवा खाई का कार्यक्रम करते है पूर्वजों से चल रहे रीतिरिवाजों अनुसार गाँव एंव अपने-अपने घरो के देवी-देवताओं को यह नया चावल चढाते है, जिसके पश्चात उसी बचे चावल को खिर बनाकर घर के सभी सदस्य खाते है | इस नवा खाई का कार्यक्रम आदिवासी समुदाय के सभी लोग मनाते है...
