धरती माई को कर्ज चुकाना है...देशभक्ति गीत

ग्राम-धूमाधाड़ भगतपारा, विकासखंड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी एक देशभक्ति गीत सुना रहे है:
धरती माई को कर्ज चुकाना है-
जल जंगल जमीन को बचाना हैं-
ये हवा ये गंगन ये पवन-
धरती माता जल बरसात हैं-
धरती माता जल बरसाता है-
धरती माता सबको अन्न खिलाता है-
धरती माँ को कर्ज चुकाना है...

Posted on: Jan 12, 2017. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

सुआ बोलथे रे हाय जी, हाय सुआ बोलथे यार...सरगुजिहा लोकगीत

ग्राम पंचायत धूमाडांड सूरजपुर छत्तीसगढ़ से सूरदास आर्मो एक क्षेत्रीय बोली में गीत सुना रहे हैं :
सुआ बोलथे रे हाय जी, हाय सुआ बोलथे यार-
पिंजरा के बंधल सुआ बोलथे जी-
हाय जी हाय सुआ बोलथे यार-
पिंजरा के बंधल सुआ बोलथे जी-
गाँव घर में खेत खानिहार संग
साथी मिले हम तो गाए रहें जी-
गहरा नदी के पानी जल थला गाए रहे जी-
हाय जी हाय गाना गाए रहेन जी-
पानी के पिवयया जल छान के पियें जी...

Posted on: Dec 16, 2016. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं उसकी मम्मी...भजन गीत

ग्राम-धुमाडांड भगतपारा, विकासखंड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर छत्तीसगढ़ से कुमारी आरती आयाम भजन गीत सुना रही हैं :-
रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं उसकी मम्मी-
की गोद लालाराते नहीं उसके पापा दया बर-
बी लेते नहीं रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं-
उसकी बुआ की गोद लालाराते नहीं-
रोते रोते गोपाल चुप होते नहीं

Posted on: Dec 02, 2016. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

हाय रे हाय नागर जोते जाबो गा...किसानी गीत

जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी, धनसाय मरावी और गीता टेकाम जो इस वक्त जमुड़ी, जिला अनुपपुर (मध्यप्रदेश) में है खेती-बाड़ी पर आधारित एक गीत सुना रहे है :
हाय रे हाय नागर जोते जाबो गा-
टेढ़ी डोली मा नागर जोते जाबो रे-
आये हवे अगहन-पूस गेंहूं चना के बोवाई-
नागर जोते जाबो गा, नागर जोते जाहूं वो-
टेढ़ी डोली नागर जोतेजाहूं रे-
हर्र काट के हर बनावे बांस के पैनारी-
नागर जोते जाहूं वो-
टेढ़ी डोली मा नागर जोते जाबे गा-
हाय रे हाय नागर जोते जाहूं वो-
नागर जोते जाहूं गा-
टेढ़ी डोली मा नागर जोते जाहूं...

Posted on: Nov 29, 2016. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

ये धमक मुसर धुमाढाडे...एक गाँव की कहानी...गीतों में

ग्राम पंचायत-धुमाढाड, ब्लाक प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी अपने गाँव की कहानी बता रहे हैं | वे कहते हैं उनके पूर्वज लोग जब वहाँ पर बसने के लिए आये तो चारों ओर ढाड यानी पेड़ थे और लकड़िया काट-काट और जलाकर उन्होंने खेत बनाया और खुद कूट कूट कर भोजन बनाते थे जिसमे बहुत स्वाद था । वे अपने गाँव के बारे में एक गीत सुना रहे हैं
ये धमक मुसर धुमाढाडे-
कहे मना कूटे जुना धान हो-
ये धमक मुसर धुमाढाडे-
दसवना कूटे बीसवाना छाठे-
ये धमक मुसर धुमाढाडे...

Posted on: Nov 06, 2016. Tags: RUPLAL MARAVI SONG VICTIMS REGISTER

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