वनांचल स्वर: कलपांज पहाड़ की कहानी...
ग्राम- हाटकर्रा, तहसील- भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से भोला राम पटेल कलपांज पहाड़ के बारे में बता रहे हैं, जिसको कुछ स्थानीय निवासी गोटुल डोंगरी भी बोलते हैं। पुराने समय में वृद्ध लोग रात को पहाड़ पर खेलने जाते थे और सवेरे घर वापस आ जाते थे। बहुत से लोग वहां पिकनिक मनाने जाते हैं। जन्माष्टमी और माघ पूर्णिमा पर्व के दिन लोग घूमने जाते हैं। वहाँ सूर का पेड़ भी पाया जाता है, जिससे लोग नशा भी करते हैं। वहां पर बॉक्साइट और ताम्बे की खदान भी है। सम्पर्क@7722949229. (185606) GT
Posted on: Feb 17, 2021. Tags: BHOLARAM PATEL CG KANKER VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर- लॉकडाउन में दिया वन ने साथ...
ग्राम-चाहचड़, तहसील-दुर्गुकोंद्ल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से संतराम सलाम बताते हैं कि लॉकडाउन के समय जीवनयापन करना मुश्किल था, भोजन उपलब्ध नहीं था बहुत तकलीफ थी। महुआ ही था उसी से दो तीन प्रकार की चीज़ जैसे लाटा भूंज, और सब्जी बनाकर उसमें सरई का बीज डालते थे। जब महुआ खत्म होने लगा तब कोलियारी, हवाली भाजी, खट्टा भाजी बनाया जाता था। जब नमक, मिर्च खत्म होने लगा तब व्यापारी से बात करके गांव में उपलब्ध करवाया गया। हम लोगों ने हर्रा, बेहड़ा खाया और काफी सारे बच भी गया था, तब हमने व्यापारियों को गांव बुलाकर बेच दिया। हमें जो पैसे मील थे उनसे हमने जरूरत का सामान खरीदा। हम लोग जंगल से भाजी, चेरोटा, करोल, बांस और कढ़ी का छोटा छोटा पौधा लेकर आए।
संपर्क@7647070617. (185579) GT
Posted on: Feb 15, 2021. Tags: CG KANKER SANTRAM SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: हमें जंगले से सागौन, ईमली, आम आदि मिल जाता था...
ग्राम-धनेलीकन्हार, तहसील- कोरर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सुकार राम बताते हैं कि 20 साल पहले जंगल काफी अच्छा था। जंगल से फल-फूल भी अच्छे से मिल जाता था। जिस शासन को जंगल को संभालने की ज़िम्मेदारी मिली है वह अपना काम ठीक से नहीं करते। पहले जंगल से सागौन, ईमली, आम आदि मिल जाता था। शासन अब जंगल का घेराव कर रहा है, जिसके कारण इनमें से कुछ नहीं मिल पाता। अब जंगल से जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं मिलती। सम्पर्क@6268921280. (185599) GT
Posted on: Feb 14, 2021. Tags: CG KANKER SUKAR RAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: घटते जंगलों के कारण जानवर भू घट रहे हैं और प्रदुषण भी बढ़ा है ...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लखराम सलाम 1960-1965 की बात बतातें हैं उस समय जंगल बड़े हुआ करते थे| जंगले में बाघ, हिरण, सांभर, वनभैंसा, मयूर, बरहा(जंगली सुवर), खरगोश, गिलहरी और गैंडा हुआ करते थे| पेड़ों की बाते करें तो बांस के पेड़ थे| मैं उस समय 5 साल का था| जब 20-25 वर्ष का हुआ तो चीता, बरहा, खरगोश और पक्षी समय के साथ गायब होने लगे| हम लोग शिकार पर भी जाते थे| जानवरों के गायब होने का मुख्य कारण खनन है| खुदाई होते हुए 7-8 साल हो गया है, वहां से कई तरह क जहरीले पदार्थ निकलते हैं और रही बात फायदे की तो वह बाहरियों का ही हो रहा| (185556) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: खनन से प्रदूषित होते जंगल...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम बताते हैं, चाहचढ़ की भूमि पर खनन होता है| वनभूमि ग्राम कि है जो कई ग्रामों के अंतर्गत आती है| खनन की वजह से लाल पानी निकलता है जो जहरीला है| लाल पानी की वजह से खेती पर भी असर हो रहा है, लोगों के स्वस्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है| पानी में लोहेकी मात्र ज्यादा है| इन खदानों में गाँव के 18 मजदूर भी काम करते हैं| खदान के मालिक कहते हैं कि खादानों से ग्रामवासियों का भी फायदा है, और यह झूठ है| ड्राईवर, मजदूर और अन्य कर्मचारी सभी बाहर के हैं| यह खनन का कार्य 2013 से शुरू हुआ और बनने में 2 साल का समय लगा| खनन कार्य 72 एकड़ में फैला हुआ है| खनन की वजह से आस पास की जगह पर हमेशा धुल उड़ती है| जिसके कारण ग्रामवासियों का स्वस्थ्य ख़राब होता है| खनन कार्य को रोकने के लिए हम लोग हर साल 15 दिनों के लिए आन्दोलन भी करते हैं, लेकिन इस साल महामारी कि वजह से आन्दोलन नहीं किया जा सका| खदान मालिकों ने लोगो को खूब बहलाया फुसलाया और लालच भी दिया, जरूरत का सामान भी दिया था|(185553) GT
