वातेर वातेर वो बाईन सोड़ा वातेर वो...गोंडी विवाह गीत-
मुकाम-गोविंदपुर, तालुका-राजोरा, जिला-चंद्रपुर (महाराष्ट्र) से सामराव उईके बता रहे हैं वे एक छोटे से गाँव के रहने वाले एक गोंड आदिवासी है, उनकी भाषा गोंडी है, गाँव में जंगल है, गोंडी रीति रिवाज से शादी, पूजा पाठ करते है, मानते हैं, जिस पर उन्होंने एक गीत बनाया जिसमे गीत के माध्यम से बड़ी बहन की शादी से पूर्व हो रही तैयारी को देख छोटी बहन खुश है और गीत के माध्यम से जाहिर कर रही है :
वातेर वातेर वो बाईन सोड़ा वातेर वो-
ढोल बाजथे कमका डागिथे भोला उदर ओ-
दादा न सुडा ओ बाई नाके सुडा ओ...
Posted on: Apr 08, 2018. Tags: SAMRAO UIKEY GONDI SONG VICTIMS REGISTER
जया-जया-जया फरसापेन मावा...गोंडी आरती गीत
ग्राम-रामपुर, मंडल-गादीगुडा, जिला-आदिलाबाद (तेलंगाना) से नागोराव चंदू आतरम चांदेकर फरसा देव का एक आरती गीत गोंडी में सुना रहे है:
जया-जया-जया फरसापेन मावा-
इतल भाव मनता निवा-
भारत रोपा मनता जिवा-
नालुंग कुम्भ कुने निगा निवा-
बेटी भलाई आई इनता जीवा-
जया-जया-जया फरसापेन मावा...
Posted on: Apr 07, 2018. Tags: NAGORAO ATRAM CHANDEKAR GONDI SONG VICTIMS REGISTER
मेरे गाँव के बरगद पेड़ की कहानी (गोंडी भाषा में)
रमेश कुंजाम से आज तहसील-भगवतीनगर आठनेर, जिला-बैतूल (मध्यप्रदेश) से बुजुर्ग सी आर उइके की मुलाक़ात हुई है जो उन्हें गोंडी भाषा में उनके गाँव की एक कहानी सुना रहे है, वे बता रहे हैं कि उनके गाँव के पास एक गुब्बडकोदरी नाम का स्थान है वहां पर बहुत बड़ा बरगद का पेड़ है उस बरगद पेड़ का बहुत बड़ा चमत्कारिक रूप है, एक तरफ बराड़ रूप है उसमे 6 जड़ निकले है और दूसरी तरफ महादेव रूप है उसमे 7 जड़ निकले है और वो जड़े बरगद के पेड़ के ऊपर से नीचे उतरकर सिर झुकाते है उस तरह मिलकर 6 और 7 जड़ एक साथ मिले हुए है | वो बहुत बड़ा दर्शनीय स्थान है वहां पर बहुत दूर-दूर से लोग देखने आते है, वे सीजीनेट सुनने वाले सभी साथियों से उनके गाँव आकर इस बरगद के दर्शन करने का आग्रह कर रहे हैं |
Posted on: Apr 07, 2018. Tags: C R UIKEY GONDI SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : महुए को हम आदिवासी कोदो कुटकी के साथ पीसकर दलिया बनाकर भी पीते है...
ग्राम-भुरियालदंड, तालुका-कोरची, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से दशरू कुमरे महुए का उपयोग किस-किस काम के लिए किया जाता है, उसके बारे में जानकारी दे रहे है वे बता रहे हैं कि मध्य भारत के आदिवासी इलाकों में महुआ का उपयोग खाने के साथ में भी किया जाता है और इसे कोदो कुटकी के साथ पीसकर दलिया बनाकर भी पीते है| इसको कंडे के साथ भुन्जकर भी खाया जाता है| महुआ का दारू भी बनाया जाता है इससे हमारा रोजगार भी चलता है| महुआ को गाय बैलो को भी खिलाते है उससे उनका शरीर तंदुरुस्त रहता है| इस तरह हमारे लिए और हमारे पशुओं के लिए बहुत उपयोगी है, यह हमारे संस्कृति का भी हिस्सा है | रानेश कोर्चा@8459328717.
Posted on: Apr 06, 2018. Tags: DASHRU KUMRE GONDI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
12 महीने को गोंडी भाषा में क्या बोलते है और कौन-कौन सा त्यौहार मनाते है (गोंडी भाषा में)
ग्राम-रामपुर, मंडल-गादीगुडा, जिला-आदिलाबाद (तेलंगाना) से नागोराव चंदू आतरम चांदेकर साल के 12 महीने को गोंडी भाषा में क्या बोलते है और कौन-कौन सा त्यौहार मनाते है उसके बारे में गोंडी भाषा में बता रहे है- चैत महीने में बैलों का त्यौहार, बैलो को नहलाकर और खाना बनाकर खिलाते है और उनका झूठा खाना हम लोग खाते है और ये त्यौहार हम बहुत ख़ुशी के साथ मनाते है| बैशाख में हिरसा देव के त्यौहार के समय हमारे सभी कुटुम के लोग मिलकर देव का पूजापाठ करते है| ज्येष्ठ महीने में रेला फूल को पानी आएगा इसलिए घर के पास लाकर लगाते है| अषाढ़ महीने में तेंदू पेड़ की लकड़ी लाकर पूजा करते है| श्रावण महीने में जीवति त्यौहार मनाते है और उसके पांच दिन बाद नागपंचमी मनाते है और उसके 15 दिन बाद गुरु पूजा करते है| भाद्र महीने में कपास, ज्वार, अरहर, नये फसल के तौर में उसको देवदामी को डालते है| दीपावली त्यौहार में गाँव के सब लोग मिलकर चौड़ा बांधकर दो दिन तक नाचते है| कार्तिक महीने में तुलसी की पूजा करते है| नवा मार्गशीर्ष महीने में जो नये-नये फसल आते है उनकी पूजा करते है| पौष महीने में जितने भी खेत में काम करने वाले सामान जैसे हसिया, कुल्हाडी इनकी पूजा करके रख देते है|

