सारी श्रृष्टि में गूंजे तेरा नाम...गीत-

धवलपुर, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से अनीसा तिग्गा एक गीत सुना रही हैं, ” सारी श्रिष्टी में गूंजे तेरा नाम ” |
हे दया सागर मेरे प्रभू महान-
सारी श्रिष्टी में गूंजे तेरा नाम-
हे दया सागर तूने मुझे एक नया जीवन दिया... (AR)

Posted on: Mar 12, 2021. Tags: ANISA TIGGA CG SONG SURGUJA

पीड़ितों का रजिस्टर : नक्सलियों के अत्याचार की कहानी-

ग्राम पंचायत-कोकामेटा, जिला-नारायणपुर, (छत्तीसगढ़) से संबती दुग्गा साथ में श्यामराम नुरेटी बता रहे हैं की उनके बड़े भाई को नक्सलीयों ने 2005 रात 8 बजे घर से कचापाल ले जाकर मार दिया. उनका मृत शरीर भी नहीं मिल पाया| उनको सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है. इसलिए सभी साथियों से मदद की अपील कर रहे है, अधिक जानकारी के लिए संपर्क@8319067459.

Posted on: Mar 11, 2021. Tags: CG NARAYANPUR SHYAMRAM NURETI VICTIM REGISTER

सवारी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया...गीत-

कानपूर, उत्तरप्रदेश से आशीष कुमार मौर्य एक गीत सुना रहे हैं, “सवारी सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया” |
सांवली सूरत पे मोहन, दिल दीवाना हो गया-
दिल दीवाना हो गया, दिल दीवाना हो गया-
एक तो तेरे नैन तिरछे, दूसरा काजल लगा-
तीसरा नज़रें मिलाना, दिल दीवाना हो गया-
एक तो तेरे होंठ पतले, दूसरा लाली लगी-
तीसरा तेरा मुस्कुराना, दिल दीवाना हो गया...

Posted on: Mar 10, 2021. Tags: ASHISH MAURYA KANPUR SONG UP

चूहा और बिल्ली की कहानी...

जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अनिश साहू कहानी सुना रहे हैं, एक बिल्ली थी, और एक चूहा था, मालिक ने बिल्ली के गले में घंटी बांध दिया था. जब भी बिल्ली चूहे को पकड़ने बिल के पास जाती थी, बिल्ली की गले की घंटी बजती थी. घंटी की आवाज सुनकर चूहा बिल में घुस जाता था और बिल्ली चूहा पकड़ने में असफल होती थी फिर बिल्ली मालिक के पास घंटी को निकालने के लिए गयी घंटी निकाल देने के बाद बिल्ली चूहा पकड़ने में सफल हुयी|

Posted on: Mar 09, 2021. Tags: ANISH SAHU CG KABIRDHAM STORY

नर हो ना निराश करो मन को...कविता-

जिला-विदिशा, राज्य-मध्यप्रदेश से अजय कुमार मांझी कविता सुना रहें हैं:
नर हो ना निराश करो मन को-
कुछ काम करो कुछ काम करो-
जग में रह कर कुछ नाम करो-
जो जन्म हुवा वो व्यार्थ ना हो-
जिस्म यह व्यार्थ ना हो-
नर हो ना निराश करो मन को...(ID(182254)

Posted on: Mar 09, 2021. Tags: AJAY KUMAR MANJHI MP POEM VIDISHA

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