डोंगर जाबो डोंगर जाबो डोगर जाबो रे...सैला गीत
ग्राम-टाटीतोला, पोस्ट-लालपुर, जिला -डिंडौरी मध्यप्रदेश से पति राम मार्को एक सैला गीत सुना रहे है, ये गीत मध्यप्रदेश में निवास करने वाले गोंड जनजाति के लोग दशहरा, दीपावली, नवाखाई के अवसर पर गाया करते है । कहा जाता है की आदि देव गधेसुर अपने महारानी से अप्रसन्न होकर अमरकंटक चले गए थे जिसे मनाने के लिए इस गीत को गाने का चलन है:
डोंगर जाबो डोंगर जाबो डोगर जाबो रे-
मोरे साजा के बिरछा डोंगर जाबो रे-
राम लाग्यो न रामे लगायो न बड़ा देवता रे...
Posted on: Nov 05, 2016. Tags: PATIRAM MARKO SONG VICTIMS REGISTER
दशहरा के समय बजाये जाना वाला बासुरी, मांदर और टिमकी का आदिवासी करमा धुन...
कर्नाटक राज्य के मैसूर से पतिराम मार्को और उनके साथ रूपसिंह मरावी, बेलसिंह धुर्वे और प्रीतम सिंह बासुरी मांदर और टिमकी की एक धुन सुना रहे हैं | ये सभी साथी मध्यप्रदेश के मंडला और डिंडोरी जिले से हैं और इस समय एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए इन दिनों कर्नाटक राज्य के मैसूर में हैं और वहां से ये साथी एक आदिवासी करमा की धुन सुना रहे हैं जिसे आदिवासी इलाकों में दशहरा के समय बजाया जाता है । पतिराम मार्को@8349976551
Posted on: Oct 01, 2016. Tags: PATIRAM MARKO SONG VICTIMS REGISTER
संजा बिहनिया तोरो गुण गावाओ...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-टांकीटोला, पोस्ट-लालपुर, जिला-डिन्डोरी (म.प्र.) से पतिराम मार्को एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
संजा बिहनिया तोरो गुण गावाओ-
बेरी-बेरी तोला माते न वाव-
पावे पखराव पहिया ओ मोरे सोंन चिडया-
तोरे गुला गावांग ओ-
तोरे जय बुलावां ओ मोरे धरती मैया...
Posted on: Sep 14, 2016. Tags: PATIRAM MARKO SONG VICTIMS REGISTER
खेती काम करिया बो खेती काम करिया बो रे...कर्मा गीत
ग्राम-टांकीटोला, पोस्ट-लालपुर, जिला-डिन्डोरी (म.प्र.) से पतिराम मार्को पारम्परिक खेती से सम्बंधित कर्मा गीत सुना रहे हैं:
खेती काम करिया बो खेती काम करिया बो रे-
लाहर-लाहर-लाहर आये धान-
गा खेती काम करिया बो रे-
नांगर डोलय बैला डोलय-
डोलय जोतैया गवैया और डोलय जोतैया-
नांगर डोलय बैला डोलय...
Posted on: Sep 13, 2016. Tags: PATIRAM MARKO SONG VICTIMS REGISTER
हाय नांगर फांदे हामन जो कैसे के रेंगा बो गा बैला रेंगे नाही रे...कर्मा गीत
ग्राम-टांकीटोला, पोस्ट-लालपुर, जिला-डिन्डोरी (म.प्र.) से पतिराम मार्को एक कर्मा गीत सुना रहे हैं और इस गीत को बरसात के दिनों में गोंड आदिवासी लोग गाते हैं:
हाय नांगर फांदे हामन जो-
कैसे के रेंगा बो गा बैला रेंगे नाही रे-
अरे तत्ता अरे तत्ता नांगरिहा के बोली गा भैया, नांगरिहा के बोली-
भर्रा जोतो मोटो जोतो, अउ मताऔ ढोली हामन नांगर फांदे जो-
कैसे के रेंगा बो बैला रेंगे नही रे...
