जनमत सर्वेक्षण के सन्दर्भ में अपनी राय बता रहें हैं...
अंकुरी कुमार कोरी/ पिता – शंताशरण कोरी ग्राम हरदौहा, ब्लाक-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से बस्तर मांगे हिंसा से आजादी जनमत सर्वेक्षण में अपनी राय बता रहें हैं, पुलिसकर्मी या सुरक्षा बलों के माध्यम से हिंसा को नही रोका जा सकता हैं, इस बस्तर मांगे हिंसा से आजादी के लिए सभी आम नागरिकों को एक मंच पर आकर विचार विमर्श करके इस कार्य को सफल बनाकर शांति की आहवान करें : संपर्क@8964095196.
Posted on: Sep 02, 2020. Tags: PEACE SURVEY HINDI 1 SONG VICTIMS REGISTER
जनमत सर्वेक्षण के सन्दर्भ में अपनी राय बता रहें हैं...
ग्राम-बड़ेकिलेपाल, विकासखंड-बस्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से मोसूराम पोयाम जनमत सर्वेक्षण पर अपनी विचार व्यक्त कर रहे है वे कह रहें हैं की एक मंच पर समाज या ग्रामवासी बैठकर सुझाया जा सकता हैं कोई भी समस्या को तो ही हिंसा से बाख सकते है बता रहे है पुलिसबल से हिंसा नही हट सकते इसमें और विवाद हो सकता हैं मेरी रॉय है की समाज या ग्रामवासी ही अगर आगे आते है और इस हिंसा में शांति की निर्णय लेंगे तो ही हिंसा से आजादी मिल सकती है : मोसूराम पोयाम@7999424763 RK
Posted on: Sep 02, 2020. Tags: PEACE SURVEY GONDI 1 SONG VICTIMS REGISTER
जनमत सर्वेक्षण के सन्दर्भ में अपनी विचार व्यक्त कर रहे है...
भागीरथी वर्मा रायपुर (छत्तीसगढ़) से जनमत सर्वेक्षण में बस्तर में शांति स्थापित कैसे होगी इस विषय में अपनी विचार रख रहें हैं बस्तर संसाधनों से भरा पड़ा है, यहाँ सरकार के द्वारा संसाधनों का दोहन करने की प्रकिया जोरों से चल रहा है, जिसका खामियाजा आदिवासीयों को भुकतना पद रहा है, सरकार चाहती हैं, आदिवासीयों को जंगल से भगाया जाए और संसाधन को अधिक से अधिक जल्द स जल्द दोहन किया जाएआदिवासी जंगल को बचाये रखना चाहता है, आदिवासियों का जीवन यापन जंगल पर निर्भर करता है, जंगल ख़त्म हो जाएगा तो आदिवासी भी ख़त्म हो जायेगा दूसरी तरफ नक्सवादी भी जंगल को बचाए रखना चाहते है इसलिए आदिवासी नक्सलियों से मदद लेते हैं और देते भी है | शांति प्रकिया के लिए सरकार और आदिवासीयों के बीच बातचीत कर हल निकाला जाए बंदूक से कभी शांति नही हो पायेगा बन्दुक से आदिवासी मरे या पुलिस मरे मरने वाला भारतवासी ही होगा दोनों मजदूर किसान के बेटे हैं, इसलिए बातचीत का ही रास्ता अपनाना चाहिए: भागरथी वर्मा@9039142049 RK
Posted on: Sep 01, 2020. Tags: PEACE SURVEY HINDI 3 SONG VICTIMS REGISTER
जनमत सर्वेक्षण के सन्दर्भ में अपनी राय बता रहें हैं...
ग्राम-भेड़िया, पोस्ट-भेड़िया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से गोंडवाना राजकुमार पोया बस्तर में चल रहीं हिंसा में या बस्तर जनमत सर्वेक्षण में अपनी राय विचार पेश कर रहें हैं, आज से ठीक 40 साल पहलें सन 1980 में दंडकारण्य की जंगलों में आये और वह पर आंध्रप्रदेश, तेलन्गाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्यप्रदेश इस राज्यों में फैले हुये हैं माओवाद का प्रकोप है वास्तविक दृष्टि से देखो तो माओवाद आज के समय में माओवाद आदिवासीयों के बीच से है और पुलिसकर्मी भी आदिवासीयों के बीच से हैं, अगर आदिवासी ही इस एक दूसरें के विरोध में खड़े है, इसका मतलब हम अपने ही लोगों के जान के दुश्मन बने हैं मेरी रॉय से इन सभी पक्षों को किसी विशेष मंच को विचार-विमर्श करें और इन युद्ध में विराम की बिंदु लगायें क्योंकि इस देश और दुनिया में विवासी करनें वालें सभी एक सामान हैं और हम सब बराबर है इसमें किसी प्रकार की कोई भेदभाव नही रखना चाहिए : संपर्क@8103153059 (174496) RK
Posted on: Sep 01, 2020. Tags: PEACE SURVEY HINDI 1 SONG VICTIMS REGISTER
जनमत सर्वेक्षण के सन्दर्भ में अपनी विचार व्यक्त कर रहे है...
एलेग्जेंडर एम. चेरियन जगदलपुर (छत्तीसगढ़) मेरे अनुसार नक्सलवाद राजनीतिक समस्या हैं इसकों समाप्त आसानी से किया जा सकता हैं जब तक राजनीतिक इच्छा शक्ति दृढ सफलता के साथ आम जन के बीच में जो उन क्षेत्र में रहतें है उन सभी से बात न करें जैसे अगर मैं दिल्ली भोपाल, रायपुर बड़े शहरों में रहकर उन नक्सलवाद समस्या को समाधान करने की सोच रखता हूँ तो मैं चाह के भी नहीं कर सकता हूँ नक्सलवाद आज सिर्फ उसी जगह में हैं जहा पर आज भी खनिज संपदा की आपार मात्रा में मौजूद हैं, और उसी क्षेत्र में एक ऐसा लाईट वर्ग पैदा हुआ और हिंसा को जन्म दिया और हिंसा के सहारे उस क्षेत्र के खनिज संपदा को लूटकर बाहर ले जाने लगा, यदि एक आम आदमी इसका विरोध करें तो उसकी हत्या हो जाती हैं, यदि आप लोगों की बारे में चिन्तित हैं, लोगों की सोच को उठाना चाहतें हैं, तो आप उनके निशाने पर आ जायेंगे, यदि उस क्षेत्र में लोगों की हत्या हो रहीं है तो उनके सुरक्षा के लिए नहीं आये हैं बल्कि उनमें दहशत फैलाकर उस क्षेत्र के खनिज संपदा को लुटने के लिए आये हैं समझने की कोशिश किया तो आज नक्सलवाद समाप्त हो चूका हैं, ये नक्सलवाद वो नक्सलवाद नहीं हैं, आज के नक्सलवाद लोगों की संपदा लुटने के लिए मल्टी नेशनल कम्पनी हैं जो चलता रहेगा और यह अपना रूप बदल-बदलकर सभी लोगों के बीच में आता रहेगा एलेग्जेंडर एम. चेरियन@9406480100
