जैविक खेती करते हैं और अपने उपज का मूल्य खुद तय करते हैं...
रायपुर (छत्तीसगढ़) से सुरेश सिंह ठाकुर बता रहे हैं वे तेंदुआ गाँव के निवासी हैं वे जैविक खेती करते हैं, 2016 से ये काम को कर रहे हैं, इससे पूर्व वे राशयानिक खेती करते थे, लेकिन आज वे जैविक खेती कर के खुश हैं और सभी को संदेश दे रहे हैं कि सभी इस खेती को अपनायें और देशी खेती कर अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखें| रोगों से बचे, अभी वे अपने खेती में पपीता, केला, गोभी, बंधी, मिर्ची लगाये हुये हैं, वे सब्जियों को खेत के पास से ही बेचते हैं, बाजार नहीं ले जाते और अपने उपज की कीमत खुद तय करते हैं, बाजार की कीमत से संबंध नहीं रखते| सुरेश सिंह ठाकुर@9425211394.
Posted on: Feb 04, 2020. Tags: AGRICULTURE CG HD GANSHI RAIPUR STORY
आज बढती बीमारी के रोकथाम के लिये जैविक खेती की आवश्यकता है-
अमलेश्वर, रायपुर (छत्तीसगढ़) वी पी पटेल राशायनिक खेती से आज जो नुकसान हो रहे उनके बारे में बता रहे हैं, आज पूरे देश में रशायानिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग कर खेती की जाती है जिससे तरह तरह की बीमारियां हो रही हैं, हरियाणा और पंजाब राज्य में इसके प्रभाव को देखा जा सकता है, किसान जितना उपज से लाभ लेता है उसे अपनी बीमारी में लगाता है इसका कारण राशायन युक्त खेती है इसलिये आज के समय में जैविक खेती करने की आवश्यकता है जिसके प्रचार प्रसार और अभियान चलाये जा रहे हैं, चीजें उपलब्ध कराई जा रही है और किसान इसका लाभ ले रहे हैं| संपर्क नंबर@7024816667.
Posted on: Feb 02, 2020. Tags: AGRICULTURE CG HD GANDHI RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
मसरूम की खेती कैसे कर सकते हैं...
ग्राम-देवघर (झारखण्ड) से विकास मशरूम की खेती की जानकारी दे रहे हैं, वे मशरूम की खेती करते हैं और इसके बारे में प्रशिक्षण देते हैं, यदि आपके पास 10-12 कमरा है तो आप आसानी से मशरूम की खेती कर सकते हैं और 18,000-20,000 तक मासिक वेतन प्राप्त कर सकते हैं, होम-ट्रेनिंग और मार्केटिंग दोनों की सुविधा दी जाती है संबंधित विषय पर जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं संपर्क नंबर@7488377588.
Posted on: Jan 25, 2020. Tags: AGRICULTURE JHARKHAND SONG VICTIMS REGISTER VIKASH
फसलो के लिये कीट नाशक बनाने का घरेलू तरीका...
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से जगदीश यादव किसान भाइयों के लिये मौसम के अनुसार पौधों में लगने वाले फंगस को दूर करने के उपाय बता रहे हैं, गोबर और गौमूत्र का घोल तैयार कर पौधों में उपयोग कर सकते हैं, घोल बनाने के लिये गाय का गोबर 5 किलो, गौमूत्र 5 लीटर, चूना 150 ग्राम लें और पानी 5 लीटर लें, एक टब में मिश्रण बना लें और उसको ऊपर से ढककर चार दिन तक सड़ने दें, दिन में एक बार मिश्रण को छड़ी से मिलायें | चार दिन बाद इसे निकाले और कपड़े से छान लें और चूने का प्रयोग करके 100लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ ज़मीन में डालें | गाढ़ा होने के कारण पहले इसे बोरे से छान ले फिर पतले कपड़े से छान लें |यह विधि अपनाकर फंगस दूर कर सकते हैं |यह रोग प्रतिरोधक होती है पौधों में होने वाली रोगों की बचाव करने की सरल और घरेलु विधि है संबंधित जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : संपर्क नंबर@7697448583.
Posted on: Jan 23, 2020. Tags: AGRICULTURE JAGDISH YADAV MP REWA SONG VICTIMS REGISTER
बिना मेहनत और खाद के उगने वाला धान है पसही-
ग्राम-डभौरा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से जगदीश यादव धान के बीज के बारे में बता रहे हैं| आज धान की कई किस्म उपलब्ध हैं, उसी में से एक है पसही धान, ये धान की वो किस्म है, जिसे किसान खेती नहीं करता है, ये खुद खेतो और गड्ढो में भरे पानी में उगती है, देखने में लगता है, इसमे किसान ने बहुत मेहनत कर उगाया है, पर ऐसा नहीं है| धान की ये किस्म प्रकृति में खुद से तैयार होती है| इसके फसल को पशु नहीं खाते, इसके चावल की कीमत बाजार में 200 रुपये किलो है| संबंधित विषय पर अधिक जानकारी के लिये संपर्क कर सकते हैं : संपर्क नंबर@7697448583.
