अपनी बात मनवाने के चक्कर में आपसी विवाद नहीं करना चाहिये...कहानी
एक बार एक पेड़ के नीचे चार व्यक्ति बेठे थे उन व्यक्ति में एक थे पंडित जी दूसरे थे मौलवी तीसरे थे पहलवान और चौथे में थे दूकान दार और उसी पेड़ पर चार पक्षी भी बेठे थे और अपनी भाषा में कुछ बाते कर रहे थे| पंडित जी ने कहा कि मै जनता हूँ ये पक्षी क्या कह रहे हैं ये पक्षी कह रहे है राम लक्ष्मण दशरथ, मलवी ने कहा नही आप से ज्यदा मै जानता हूँ, ये पक्षी कह रहे है अल्ला मिया हजरत, अल्ला मिया हजरत दूकानदार ने कहा नहीं यार ये पक्षी कह रहे हैं धनिया मिर्ची अदरक धनिया मिर्ची अदरक, पहलवान ने कहा नहीं तुम सब चुप रहो ये कह रहे हैं दंड बैठक कसरत दंड बैठक कसरत| इसी में सभी आपस में लड़ने लगे और पच्छी उड़ गाये|
Posted on: Jan 29, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG STORY VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHRAV
आजादी मिली किसको समझने की बात है...कव्वाली-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक कव्वाली सुना रहे हैं:
अंग्रेज वतन से गये खुशी की बात है-
आजादी मिली किसको समझने की बात है-
मालिक वतन का भूखा जाता है आज भी-
चेहरे से उसके खाई गिराता है आज भी-
बेघर है महीन है वो खाली हाथ है-
आजादी मिली किसको समझने की बात है...
Posted on: Jan 29, 2020. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हर साल मनाते हैं हम मतदाता का दिन...गीत-
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से बिरेन्द्र गंधर्व एक गीत सुना रहे हैं :
हर साल मनाते हैं हम मतदाता का दिन-
सोंचे समझे हर इक हर पलछिन-
25 जनवरी को आता है शुभ दिन-
नेता में नेकी होगी तो देश चलेगा जमके-
हम नेता के दम पे नही नेता है हमारे दम पे-
हर साल मनाते हैं हम मतदाता का दिन...
Posted on: Jan 28, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
जीसस पावर सूपर पावर...गीत-
ग्राम-पंजिगुडा, तहसील-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से प्रेम मसीह एक गीत सुना रहे हैं:
जीसस पावर सूपर पावर-
क्या क्या हुमका राजा स्कूल-
च चमकता तारा स्कूल-
जीसस पावर सूपर पावर-
क्या क्या हुमका राजा स्कूल-
च चमकता तारा स्कूल...
Posted on: Jan 28, 2020. Tags: CG KONTA PREM MASIH SONG SUKAMA VICTIMS REGISTER
सबसे निराला है मेरा वतन, सारे जहाँ का है ये चमन...गीत-
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से त्रिलोकी सिदार एक गीत सुना रहे हैं:
सबसे निराला है मेरा वतन-
सारे जहाँ का है ये चमन-
दीपक जलाते चंदा सूरज-
लाते पानी बादल-
धानी चुनर ओढ़े धरती होती खुशी से पागल-
चारों महीने है बाग़पन...
