देशी बीज और गोबर खाद के उपयोग कर खेती करते हैं किसान...
ग्राम-अरगट्टा, ब्लाक-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से थातित अन्ना बता रहे हैं उनका गाँव आदिवासी गाँव हैं वहां पर लोग खेती के लिये शहरी बीज का उपयोग नहीं कृते हैं बल्कि जो उगाते हैं उसे ही उपयोग करते हैं, वे देशी बीजो की खेती करते हैं, रोपा नहीं लगाते बुवाई करते हैं, वे जितना उगाते हैं उनके परिवार के लिये पर्याप्त होता है, खेती के लिये किसान केवल गोबर का उपयोग करते हैं|
Posted on: Feb 02, 2020. Tags: BABULAL NETI CG SONG STORY SUKAMA VICTIMS REGISTER
गोबर की लकड़ी से इकोफ्रेंडली होलिका दहन और दाह संस्कार...
अमलेश्वर, रायपुर (छत्तीसगढ़) से रितेश बता रहे हैं वे एक पहल सेवा समिति से हैं उनकी संस्था गोबर की लकड़ी बनाने का काम करती है जिसका उपयोग होलिका दहन और दाह संस्कार के लिये किया जाता है, ये काम वे 3 साल से कर रहे हैं, आभी तक वे 150 लोगो का दाह संस्कार और 210 इको फ्रेंडली होलिका दहन कर चुके हैं |
रितेश@8319587016.
Posted on: Feb 02, 2020. Tags: HD GANDHI RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
जैविक खेती और स्वास्थ्य पर काम करते हैं...
श्रेष्ठ देशी पंच गौ अनुसंधान केंद्र, अमलेश्वर, रायपुर (छत्तीसगढ़) वी पी पटेल बता रहे हैं वे किसान महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष और नेता की जुबान के संपादक हैं, वे श्रेष्ठ देशी पंच गौ अनुसंधान से जुड़कर काम कर रहे हैं इसके साथ उनकी एक संस्था है हमर संगवारी जिसमे वे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य को लेकर काम करते हैं, जिसमे लोगो को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है, जिसका लाभ लोग ले रहे हैं, इसके साथ वे एस पी साहू के साथ देशी खेती के लिये काम करते हैं जिसमे लोगो को जैविक खेती से संबंधित चीजे उपलब्ध कराते हैं और प्रचार प्रसार करते हैं| संपर्क नंबर@7024816667.
Posted on: Feb 02, 2020. Tags: HD GANDHI RAIPUR SONG VICTIMS REGISTER
एदे मुनगा के डारा चिरैया बाटे चारा, जरुर आबे न...गीत-
सल्हेवारा नवागांव, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से लीलादास माडवी एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
एदे मुनगा के डारा चिरैया बाटे चारा-
जरुर आबे न-
अंखि गडाये जोहत रहिथो-
सोर संदेश का देखत रहिथो-
एदे मुनगा के डारा चिरैया बाटे चारा – जरुर आबे न...
Posted on: Feb 02, 2020. Tags: CG LILADAS MADAVI RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER
आज बढती बीमारी के रोकथाम के लिये जैविक खेती की आवश्यकता है-
अमलेश्वर, रायपुर (छत्तीसगढ़) वी पी पटेल राशायनिक खेती से आज जो नुकसान हो रहे उनके बारे में बता रहे हैं, आज पूरे देश में रशायानिक खाद और कीटनाशक के प्रयोग कर खेती की जाती है जिससे तरह तरह की बीमारियां हो रही हैं, हरियाणा और पंजाब राज्य में इसके प्रभाव को देखा जा सकता है, किसान जितना उपज से लाभ लेता है उसे अपनी बीमारी में लगाता है इसका कारण राशायन युक्त खेती है इसलिये आज के समय में जैविक खेती करने की आवश्यकता है जिसके प्रचार प्रसार और अभियान चलाये जा रहे हैं, चीजें उपलब्ध कराई जा रही है और किसान इसका लाभ ले रहे हैं| संपर्क नंबर@7024816667.
