जंगल झाड बचाओ चलो जी दीदी...जंगल झाड गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी जंगल झाड के ऊपर आधारित एक गीत सुना रहे है:
जंगल झाड बचाओ चलो जी दीदी-
चलो जी बहनी चलो जी ओजली-
चलो जी मितानिन-
जंगल झाड जाओ जी दीदी-
जंगल झाड जाई के-
लकड़ी जीटकल लोरी के आन ओ...

Posted on: Feb 17, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

मै अपने बचपन की यादो को कैसे भुला सकता हूँ...गजल

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बचपन की यादों पर एक गजल सुना रहे हैं :
मै अपने बचपन की यादो को-
कैसे भुला सकता हूँ-
जिसे मैंने आँखों से देखा हूँ-
जिसे मैंने कानो से सुना हूँ-
उन यादो को मैंने दिल मे बसाया हूँ-
उन यादो को मै कैसे भुला सकता हूँ-
ये यादे मुझे सपनों मे जगाती है-
चुपचाप क्यों सोये हो-
अभी सोने का समय नही है-
उठो अब सोने का समय नही-
कुछ खास करने को है-
मंजिल तुम्हारे करीब है-
उसे जाने ना दो बेबस नही-
तो तुम करके तो दिखा दो-
तुम्हारे हाथो मै छोटी सी कलम है-
उसे तो चलने दो-
फिर तुम्हारे हाथो मे होगी सारी दुनिया-
उसे मिटने ना दो रहो-
ना रहो तुम ये उपकार तुम्हारा रहेगा...

Posted on: Jan 27, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

मोर गाँव के तीर मा बहे खेलो नादिया आ-आ-आ...आंचलिक गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक आंचलिक गीत सुना रहे हैं:
मोर गाँव के तीर मा बहे खेलो नादिया आ-आ-आ-
नादिया के तीर-तीर हावे वो झरिया गोडा झरिया-
जड़ा माति पत्रा एती पतमा खाकर झमो आके नहावे...

Posted on: Jan 20, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

बाल-बाल को संवारिये बाल नहीं तो बेहाल...स्वरचित रचना

तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी स्वरचित एक रचना सुना रहे हैं :
बाल-बाल को संवारिये बाल नहीं तो बेहाल-
बाल को ऐसा संवारिये जैसी बुड्डी बाल-
बाल हो तो तन की शोभा, बाल हो तो घर की आभा-
बाल को ऐसा बांधिये कहीं बिखर न जाए-
बाल को ऐसा ताडिये कंचन जैसा निकल जाए
बाल हो तो समाज की शान, बाल हो तो देश की आन-
बाल को दो ऐसा ज्ञान जो देश हो जाए महान...

Posted on: Dec 27, 2016. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

देशी ह नंदा गे परदेशी ह मेछराईस...छत्तीसगढ़ी व्यंग्य रचना

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ छतीसगढ़ से कन्हैयालाल पड़िहारी छत्तीसगढ़ी भाषा में एक व्यंग्य रचना सुना रहे हैं :
देशी ह नंदा गे परदेशी ह मेछराईस-
बाबू के दाई हर एक दिन कहिस मोला-
ए जी सुनो तो ए कैसन जमाना आईस-
चोरी चकड़ी बेईमानी हर अति होगिस-
अउ महंगाई के मार हर भरमाईस-
दरुहा गंजहा कुकुर कसर एती ओती-
एस्नेच लोगन रहबो त कईसन होही गुंजाईस-
ओखर खातिर त नरेन्द्र मोदी के मन हर भरमाईस-
जुना नोट ल बंद करके नवा नोट ल चलाईस-
अभी तक छोटन बड़न जम्मो ल परेशान हावय ओखर खातिर...

Posted on: Dec 21, 2016. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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