जहाँ तुम रोये थे वहां हम न रोयेंगे...देश प्रेम कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक देश प्रेम की कविता सुना रहे है:
जहाँ तुम रोये थे वहां हम न रोयेंगे-
जहाँ तुम चले थे वहां हम न चलेंगे-
जहाँ तुम सोये थे वहां हम न सोयेंगे-
जहाँ तुम हँसे थे वहां हम न हँसेंगे-
जो तुम खाए वो हम न खायेंगे-
तुम कोड़े खाए तो खाए हम नहीं खायेंगे-
देश को हरगिज न गिराएंगे-
ऐसा कानून बनायेंगे-
सबके लिए ऊँची महल बनायेंगे...

Posted on: Mar 23, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

अम्बर से कहे धरती आज मुझे छू लो, मेरी ओस कणों से अपनी प्यास बुझा लो...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
अम्बर से कहे धरती आज मुझे छू लो, मेरी ओस कणों से अपनी प्यास बुझा लो-
फिर बादल बनकर बरस जाना, मेरी भी प्यास बुझा जाना-
मै तेरी आश्रित, तू मेरी आश्रित-
हम दोनों एक दूसरे के लिए, हमको लोग पूजते है हम उनकी मिन्नते पूरी कर दे-
हम तो जग भला करने के लिए, भलाई करना हमारा काम-
प्यासी है धरती प्यास बुझा दो, कर लो थोडा भलाई का काम...

Posted on: Mar 23, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

मन का पंछी, इतना मत इतरा...कविता -

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं:
रुक जा मन पंछी, इतना मत इतरा-
ये दुनिया रहती, ख़फ़ा ख़फ़ा, यहाँ तेरा नही चलेगा कोई सफा-
कर सके तो कर ले, दुनिया से वफ़ा-
मद मस्त मौला बन, मत मजरा-
पग पग फ़नकारो का पहरा, बिछाए बैठे मौत का घेरा-
लगाते रहते जग का पहरा, इन लोगो से सम्भल, सम्भल कर-
इधर उधर मत उछल, तेरा जीव धन नही अटल-
इन फ़नकारो का क्या सकेगा मसल, यदि जूझना हो तो फौलादी बन जा-
फिर उन फनकारों के सामने जा, जीना हो तो चट्टान बन जा-
फिर जमकर उन फनकारों को ठोक बजा, तब आयेगा उनको मजा-
यही है उन फ़नकारो को सजा...

Posted on: Mar 22, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

कलम कमाई खाते है नहीं लेते है घूस...व्यंग्य रचना

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक स्वरचित व्यंग्य रचना सुना रहे है:
कलम कमाई खाते है नहीं लेते है घूस-
पान गुटखा खाकर हँसते रहते मुच मुच-
अरे पाप पुण्य को कौन देखता है-
अभी तो कुछ कर लेने दो-
बाद में कौन देखता है-
अभी तो घर भर लेने दो-
समय पल दो पल का साथ हमारा-
एक पल तो चैन से जी लेने दो...

Posted on: Mar 18, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER

पर फूलो को चुभते हुए किसी ने नही देखा है...कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी कविता सुना रहे है:
काँटों को चुभते हुए, सबने देखा है-
पर फूलो को चुभते हुए किसी ने नही देखा है-
पर फूलो को चुभते हुए, मैंने करीब से देखा है-
जन्म दाता को आज तक किसी ने नही देखा है-
पर पालनहार को सभी ने देखा है-
पर मैने जन्म दाता को, बहुत करीब से देखा है-
जिसके मुक्कदर में रहेगा, वही तो देखेगा-
बकवास नही करता हु मै-
क्यूंकि इस जहा से मोहब्बत हो गया है-
तुम मोहब्बत करो ना करो मुझे फर्क नही होने वाला-
यह जिन्दगी मैंने, समर्पण कर दिया है-
ये जहाँ के लिए, ये जहाँ ने मुझसे मोहब्बत किया है-
उस जहाँ के लिए में, कुर्बान हूँ , तुम मानो या ना मानो-
तुमसे कोई खता नही ये मेरी कुर्बानी, तुम्हे याद दिलाता ही रहेगा-
मेरा जहाँ से उठ जाने के बाद, कैसा होगा ये जहाँ-
इसीलिए सोचता रहता हु, बर्बादी की खन्जर मैंने देख लिया हूँ-
अपने पैरो तले जमीं, को खिसकते देख लिया हूँ – ये बर्बादी कि मन्जर देखो, कब तक यू ही चलता रहेगा-
जब तक लोगो में प्रेम नही, तब तक यह मजारा होता रहेगा...

Posted on: Mar 16, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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