दिल खोल के नाचू मेरी माँ आज दिन आंबे का...देवी गीत-
ग्राम-रक्सा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मीरा बाई एक देवी गीत सुना रही हैं :
दिल खोल के नाचू मेरी माँ आज दिन आंबे का-
अम्बे का जगदम्बे का-
मईया जी में माथ में सेंदुरा सोहे-
बिंदिया पहिन लट छोर आज दिन अम्बे का-
दिल खोल के नाचू मेरी माँ आज दिन आंबे का-
मईया जी के नाक में नथिया सोहे...
Posted on: Jan 28, 2020. Tags: ANUPPUR MP PRADIP JOGI SONG VICTIMS REGISTER
नही बांचे नही बांचे नही बांचे ओ...गीत-
गाम-मेटागुडा, ब्लाक-कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से बाबूलाल नेटी एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
नही बांचे नही बांचे नही बांचे ओ-
मोर दिल के रानी-
राती मोर आथे गा आंखी मा पानी-
कारी हे चेहरा फुलवासी लागे ओ-
कजरेरी आंखी चंदा कस लागे वो-
राति मोर आथे गा आखो मा पानी...
Posted on: Jan 27, 2020. Tags: BABULAL NETI CG SONG SUKAMA VICTIMS REGISTER
तमनार क्षेत्र का तीसरा पंचायत चुनाव...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता अपने क्षेत्र में होने वाले पंचायत चुनाव के बारे में बता रे हैं, ये पंचायत चुनाव उनके इलाके का तीसरा चुनाव है, यह चुनाव 28 जनवरी को होने वाला है, उनके इलाके 5 प्रत्यासी चुनाव के लिये खड़े है बरभाटा मोहल्ले से श्यामा बंसी, बाजार पारा से गुलाबी बाई, शिवलाल से लीलावती हरेराम, लक्ष्मी सिदार नटवर दुबेपारा और शांति प्रजा है, सभी अपने चुनाव प्रचार धन बल और तन बल से लगे हैं : राजेंद्र गुप्ता@9993891275.
Posted on: Jan 27, 2020. Tags: CG RAIGARH RAJENDRA GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं...गीत-
ग्राम-गोलबहरी, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से त्रिलोकी सिदार एक गीत सुना रहे हैं:
पराया कर के अपनाये उसे इंसान कहते हैं-
किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं-
पराया कर के अपनाये उसे इंसान कहते हैं-
किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं-
ये दुनिया एक उलझन है, कही धोखा कही लूटे-
कोई हस हस के जीता है कोई रो रो के जीता है-
किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं...
Posted on: Jan 27, 2020. Tags: CG RAIGARH SONG TRILOKI SIDAR VICTIMS REGISTER
चेहरे बदल बदल के आने लगे हैं लोग...गीत-
मालीघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
चेहरे बदल बदल के आने लगे हैं लोग-
दुनिया को हर तरह से सजाने लगे हैं लोग-
भगवन तुम भी खोज अपना नया मकान-
मंदिर व मस्जिदो को गिराने लगे है लोग-
हमको फूलो की सेज से निदत नहीं रही-
बारूद ओढ़ने और भी जाने लगे हैं लोग-
कल तक दबा रहे थे माँ बाप के कदम...
