मैंने देखा है तपता हुआ सूरज को...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मैंने देखा है तपता हुआ सूरज को-
मैंने देखा है समन्दर से उठते भाप को-
मैंने देखा ठिठुरते शिशिर मास को-
मैंने देखा है बरसते हुए बरसात को-
ये कुदरत का खेल है-
इसमें बहुत बड़ा मेल है-
यहाँ पर इनका उपकार है,
हर जीव-जन्तु का पुकार है-
जग में जब एक ही ऋतु होता
सुख संपदा का अभाव होता-
ना कोई बड़ा ना कोई छोटा होता...
Posted on: Apr 09, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER
इन्सान हो तो इन्सान की तरह जीया करो...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
इन्सान हो तो इन्सान की तरह जीया करो-
आयो हो जग में तो कुछ काम किया करो-
बदनाम गली में जाया न करो-
इन्सान हो इन्सान की तरह राह करो-
दीन दुखियों पर कुछ तो दया करो-
मुसाफिर हूँ किसी का आशियाना न उजाड़ा करो-
किसी की अरमान का चिता जलाया न करो-
दो निवाले खाकर जिया करो-
कमजोरो को सताया न करो-
आहे उनकी लग जायेगी-
दुआ करो जब दे नहीं सकते हो-
ताल उनकी छीना न करो...
Posted on: Mar 26, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
हमारे अस्पताल में सर्जन व स्त्री, हड्डी और शिशु रोग के डाक्टरों के पद हैं पर कोई डाक्टर नहीं आता...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी बता रहे है तमनार जो बहुल आदिवासी क्षेत्र है यहाँ पर सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है पर स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टरों की कमी है, यहाँ पर स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और सर्जन के पद
का आबंटन है लेकिन यहाँ पर एक भी डॉक्टर नही बैठते है जिससे इलाके के ग्रामीण आदिवासियों को बहुत तकलीफ होती है क्योंकि उन गरीब लोगों को शहर में निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है जहां बहुत अधिक खर्च हो जाता है. वे सीजीनेट सुनने वाले साथियों से अनुरोध कर रहे हैं कि कृपया स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवालको फ़ोन लगाकर इस समस्या से अवगत कराए@07712331020. पड़ियारी@9981622548
Posted on: Mar 25, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
जहाँ तुम रोये थे वहां हम न रोयेंगे...देश प्रेम कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक देश प्रेम की कविता सुना रहे है:
जहाँ तुम रोये थे वहां हम न रोयेंगे-
जहाँ तुम चले थे वहां हम न चलेंगे-
जहाँ तुम सोये थे वहां हम न सोयेंगे-
जहाँ तुम हँसे थे वहां हम न हँसेंगे-
जो तुम खाए वो हम न खायेंगे-
तुम कोड़े खाए तो खाए हम नहीं खायेंगे-
देश को हरगिज न गिराएंगे-
ऐसा कानून बनायेंगे-
सबके लिए ऊँची महल बनायेंगे...
Posted on: Mar 23, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
अम्बर से कहे धरती आज मुझे छू लो, मेरी ओस कणों से अपनी प्यास बुझा लो...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
अम्बर से कहे धरती आज मुझे छू लो, मेरी ओस कणों से अपनी प्यास बुझा लो-
फिर बादल बनकर बरस जाना, मेरी भी प्यास बुझा जाना-
मै तेरी आश्रित, तू मेरी आश्रित-
हम दोनों एक दूसरे के लिए, हमको लोग पूजते है हम उनकी मिन्नते पूरी कर दे-
हम तो जग भला करने के लिए, भलाई करना हमारा काम-
प्यासी है धरती प्यास बुझा दो, कर लो थोडा भलाई का काम...
