रंग हमपे न डारो बार बार...होली गीत-
मनेंद्रगढ़, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से सरोज गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं:
रंग हमपे न डारो बार बार-
मै तो अकेली हूँ सीता जानकी-
तू तो हो लाला चार चार-
बहुत भींग गयी अब न भिंगाओ-
मेरी चुनरी हो गयी लाल लाल-
रंग हमपे न डारो बार बार...
Posted on: Mar 04, 2020. Tags: CG HOLI KORIYA SAROJ GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
राम के खबर कोई लाता नहीं...गीत-
ग्राम-नोनारी, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रानी एक भजन सुना रही हैं:
राम के खबर कोई लाता नहीं-
राम बिन मुझसे रहा जाता नहीं-
एक मन सोंचू की मछली बनू-
जल बिना मुझसे रहा जाता नहीं-
एक मन सोंचू की चिड़िया बनू-
पंख बिन मुझसे रहा जाता नहीं-
राम के खबर कोई लाता नही...
Posted on: Mar 04, 2020. Tags: MP RANI REWA SONG VICTIMS REGISTER
Impact : सड़क सुधार होने से आना जाने में सुविधा हो गयी है...
ग्राम-नवलपुर, तहसील-लोरमी, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से राघव प्रसाद निषाद बता रहे हैं कि लहाटगाँव से नवलपुर को आने जाने का मार्ग बहुत ख़राब था, जिस समस्या को उन्होंने सीजीनेट में रिकॉर्ड किया था, संदेश रिकॉर्ड करने के बाद उस सड़क का सुधार हो चुका है जिससे आना जाना करने में सुविधा होती है इसलिये वे सीजीनेट के सभी मदद करने वाले श्रोताओं और संबंधित अधिकारियो को धन्यवाद दे रहे हैं : संपर्क नंबर@917987141951.
Posted on: Mar 04, 2020. Tags: CG IMPACT STORY MUNGELI RAGHAV PRASAD NISHAD SONG VICTIMS REGISTER
हम इतने नीचे गिर गये हैं कि वापस आना मुस्किल है...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी अपना विचार व्यक्त कर रहे हैं वे बता रहे हैं कि कुछ वर्ष पहले की बात है जब अपना परिजन जैसे पुत्र, पुत्री, पति, सास, ससुर आदि किसी का निधन हो जाता था तब लोगो द्वारा आपस मिलने पर उसके लिये दुःख व्यक्त करने की प्रथा थी, वह प्रथा अब समाप्त हो रही है, आज लोगो के व्यहार और हाव भाव से प्रतीत होता है कि इंसान को अपनो के जाने पर गम नहीं है, इससे एसा लगता है कि हम इतने नीचे गिर गये हैं कि वापस आना मुस्किल है|
Posted on: Mar 04, 2020. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
नागरिकता की आंच में सुलगता भारत...कविता-
कानपुर (उत्तर प्रदेश) से के एम भाई आज नागरिकता कानून को लेकर जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, हर तरफ लोग नाराज और गुस्से में हैं, इसी विषय पर एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
नागरिकता की आंच में सुलगता भारत-
सुवांग और मुबांघ के भक्षक-
आज गुमध पर जीवित हैं-
सहिष्णुता और अखंडता की दुहाई दे रहे हैं...
