एक मंच मिला है हमको अपनी बात बताने को...सोशल मीडिया पर कविता -
बिजुरी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से राकेश कुमार सोशल मीडिया पर एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं :
एक मंच मिला है हम को अपनी बात बताने को – कुछ सुनने को कुछ सुनाने को – खुशियों से हम भर सकते थे फूलो सा जीवन कर सकते थे –
हुवा समय तक कुछ तक ऐसा ही, सबने इसका उपयोग किया – अब ये कैसी क्रांति आई है इसमें हुई बुराई है – कोई धर्म पर लगा कलंक रहा, कोई किसी को गाली देता हैं...
Posted on: Dec 12, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
छत्तीसगढ़ का प्रयाग : राजिम की कहानी...
राजिम का प्रचीन नाम कमलक्षेत्र पदमावतीपुरी था वहां पर मंदिरों का समूह है उसे छत्तीसगढ़ का कुम्भ भी कहा जाता है राजिम रायपुर से 45 दूर महानदी संगम स्थल पर स्थित है राजिम का नाम एक महिला के नाम पर पड़ा है प्राचीन मान्यता के अनुसार एक महिला प्रतिदिन उस रास्ते से होकर तेल बेचने जाया करती थी एक दिन अचानक एक शिलाखण्ड से महिला का पैर टकरा गया जिससे सर पर रखी तेल की हांड़ी गिर गई जिस पर वह दुखी होकर रोने लगी तभी तेल की हांड़ी एकाएक भर जाती है, तब से उसका पात्र कभी खाली नही हुवा। इस घटना की जानकारी जा के पास पहुंची जिस पर राजा ने उस जगह की खुदाई कराई जिसमे विष्णु जी की चतुर्भुजी प्रतिमा निकली, इस तरह से इस जगह का नाम राजिम पड़ा| राकेश कुमार@9617339569.
Posted on: Dec 07, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
वनांचल स्वर : महुए के फल और फूल से वनवासी को भोजन, दवा, तेल,आय सब कुछ मिलता है...
भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से राकेश कुमार दोहरे वनोपज देने वाले एक पेड़ के विषय में बता रहे हैं वे बता रहे हैं महुवा एक ऐसा पेड़ है जिसके फूल और फल दोनों का उपयोग किया जा सकता है, वनों में निवास करने वाले आदिवासी उस पेड़ के फूल का उपयोग शराब बनाकर दवा के रूप में प्रयोग करते है लेकिन इसका ज़्यादा सेवन करने से इसके दुष्परिणाम भी होते है. महुवे को चने के सांथ फरा बनाकर खा भी सकते हैं. उसके फल से तेल निकाला जाता है जिसे सर्दी के मौसम में शरीर को कोमल रखने के लिए उपयोग में लिया जाता है. इसके खली से मुह के छाले का इलाज किया जाता है सांथ ही तेल का उपयोग दिये जलाने में कर सकते है गाँव के निवासियों का ये आय का एक अच्छा साधन है |राकेश कुमार@9617339569.
Posted on: Dec 06, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाईल में : मलेरिया दूर करने में उपयोगी चींटी की चटनी -
ग्राम-मांझीपदर, जिला-दन्तेवाड़ा (छतीसगढ़) से भीमाराम हेमला चीटी की चटनी के बारे में बता रहे है ये बता रहे हैं कि बस्तर के गांव-गाँव में मलेरिया बीमारी के ईलाज में चीटी की चटनी का उपयोग सदियों से किया जाता रहा है यह चीटी लाल रंग की होती है और ये किसी भी पेड़ में पत्तो का गोल आकार का घोसला बनाकर रहते है इसकी चटनी बनाने के लिए पहले चीटी को भून लिया जाता है फिर उसमे नमक, मिर्च, लहसुन अदरक मिलाकर हल्का पीस लेते हैं और पेज के सांथ या खाली भी खा सकते है बुखार के कारण जब रोगी को भूख नही लगती और मुंह में कडवाहट लगता है तब भी यहां के स्थानीय आदिवासी इसका उपयोग करते हैं |भीमाराम हेमला@9406083299.
Posted on: Nov 29, 2017. Tags: RAKESH KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
बाबा निबिया के पेड़ झिन काटो बलैया लेहूँ वीरन की...लोकगीत
जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से राकेश कुमार मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर एक लोकगीत सुना रहे हैं:
बाबा निबिया के पेड़ झिन काटो-
बलैया लेहूँ वीरन की-
बाबा निबिया चिरैया बसेरा-
बाबा निबिया मयरिया के नाई-
बाबा सगरी चिरैया उड़ी जैहें-
बाबा रह जैहें निबिया अकेली-
बाबा सगरी बिटिया जैहें ससुराल...




