आदिवासी समुदाय के लोग शिकार के लिये धनुष और गुलेल का उपयोग करते हैं...

ग्राम-चिन्नार, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल ग्रामवासी बृजेश यादव, नट्टू, दिनेश, कंडी बता रहे हैं| वे वनों में जाकर पछियों का शिकार करते हैं| चूहों का शिकार करते हैं| इसके लिये धनुष और गुलेल का इस्तेमाल करते हैं| आदिवासी ग्रामीण शर्दी, गर्मी, बरसात सभी समय शिकार करते हैं| वे ग्रुप बनाकर शिकार करने जाते हैं|

Posted on: Jul 06, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG NARAYANPUR SONG STORY VICTIMS REGISTER

बांस की चीजें बनाने की कला लोगों के जीविका का साधन और पहचान है...

ग्राम-देवगांव, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल गाँव के निवासी मनीष कुमार बाद्रा से चर्चा कर रहे हैं| मनीष बता रहे हैं| वे बांस की चीजें बनाने का काम करते हैं| सजावट का सामान बनाते हैं| और उसे बेंच कर अपनी आजीविका चलाते हैं| वे 20 वर्ष से ये काम कर रहे हैं| अपनी बनाई चीजों को वे शहरों तक पहुंचाते हैं| जैसे हैदराबाद, मुंबई, बैंगलोर आदि| बांस की चीजें बनाने के लिये कारीगर नये लोगो को सिखाते हैं| इस तरह से ये कला उनके रोजगार का साधन और पहचान है|

Posted on: Jul 06, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG NARAYANPUR SONG STORY VICTIMS REGISTER

हिंदू हैं हम हिंदुस्तान हमारा...गीत-

ग्राम-जमावाड़ा, विकासखण्ड-जगदलपुर (छत्तीसगढ़) से कोविश्वरी बघेल और तन्नु कश्यप एक गीत सुना रहे हैं :
हिंदू हैं हम हिंदुस्तान हमारा-
है हमें प्राणों से बढ़कर प्यारा-
हजारो, लाखो आयें विदेशी-
हुकूमत चलानी किसी ने न जाना-
वीरो का है देश हमारा-
है हमें प्राणों से बढ़कर प्यारा...

Posted on: Jun 23, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG JAGDALPUR SONG VICTIMS REGISTER

हमारे यहां बाजार में जरुरत की सभी चीजे उपलब्ध होती है...

कोंटा, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से राव बता रहे हैं| वे एक व्यापारी हैं| वहां सप्ताह में 2 दिन बाजार लगता है| बुधवार को चिंतूर और गुरुवार को कोंटा में बाजार लगता है| बाजार में उड़ीसा आंध्रप्रदेश और छत्तीसगढ़ से लोग आते हैं| बाजार के आस पास के लोग चीजे लाकर बेचते हैं| उसी से उनका जीवन चलता है| ये उनके रोजगार का एक माध्यम है| बाजार में सब्जी, कपड़े जरुरत की सभी चीजें उपलब्ध होती हैं|

Posted on: Jun 16, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG KONTA SONG STORY SUKMA VICTIMS REGISTER

दाना पोयाम खेती के समय खेती और बाकी समय शहर में काम करते हैं...कहानी-

पाउरलंका, चिंतुर मंडलम, जिला-ईस्ट गोदावरी (आंध्रप्रदेश) से भोला गांव के निवासी दाना पोयाम से चर्चा कर रहे हैं| वे बता रहे हैं| कि वे खेती का काम करते हैं| और खेती के बाद जब काम नहीं होता तो शहर में जाकर काम करते हैं| पोयाम ने तेलगू भाषा में पढाई की है, और हिंदी भाषा भी जानते हैं| 20 साल से उस गांव में रह रहे हैं| वे अपने गांव में बच्चो को पढ़ाते हैं, और स्कूल में बच्चो को प्रवेश दिलाते हैं| जिससे वे पढ़ सके|

Posted on: Jun 14, 2019. Tags: ANDHRA PRADESH BHOLA BAGHEL EAST GODAVARI SONG STORY VICTIMS REGISTER

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