सहकार रेडियो : किसान और चीता (बाल कहानी)
बच्चों, सीजीनेट पर सहकार रेडियो का कार्यक्रम बाल चौपाल में आज आप सुनेंगे वियतनाम की लोक कथा “किसान और चीता”| जिसे स्वर दिया है जयपुर राजस्थान से सुनीता जी ने| कहानी ली है नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तक “सुनो कहानी” से| ध्वनि सम्पादन किया है शिल्पी ने|
इस कार्यक्रम को https://www.sahkarradio.com से लिया गया है|
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER
प्यार से गावा रे यीशु कर नाम...मसीह गीत-
जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से चंद्रप्रकाश मसीह गीत सुना रहे हैं:
प्यार से गावा रे यीशु कर नाम-
प्यार से गावा रे मसीह कर नाम-
शांति शांति देव यीशु नाम-
प्यार से गवारे यीशु कर नाम-
प्यार से गवारे मसीह कर नाम-
मुक्ति मुक्ति देव यीशु नाम... ID(182986)GM
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: BHAKTI SONG SONG VICTIMS REGISTER
गाँव की कहानी...
ग्राम-मुतनपाल, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से गोपी राम पोयाम गाँव की कहानी बता रहे है, गाँव में पहले मुचाकी समुदाय के लोग आये है, बाद में पोयाम समुदाय के लोग आये, जब गाँव में तीन-चार घर थे तब से गाँव में रहा रहे है न उस समय सड़क न गाड़ी-घोड़ा कुछ भी नही थी, उस समय पैदल ही कहीं आना जाना जैसे गीदम,बास्तानार,जगदलपुर पैदल जाना पड़ता था, उस समय कृषि के सम्बन्ध में ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो वे ज्यादातर जंगल से ही पत्ती,फल-फुल,कंदमूल आदि खाकर जीवन यापन करते थे,और उस ज़माने में आम तोड़ने,खाने जंगल जाने पर आदमी चोरो और के होने का डर का दहशत फैला रहता था और आज के ज़माने में नक्सलियो का दहशत बना हुआ है|सम्पर्क नम्बर @9406344921, ID(176356)RM
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: STORY
जय अम्बे गौरी...आरती-
ग्राम-चोलनार, जिला-दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से लता सेनाब आरती सुना रही हैं:
जय अम्बे गौरी-
मैया जय श्यामा गौरी-
तुमको निशदिन ध्यावत-
हरि ब्रह्मा शिवरी-
मांग सिंदूर विराजत-
टीको मृगमद को-
उज्ज्वल से दोउ नैना-
चंद्रवदन नीको-
ॐ जय अम्बे गौरी..(AR)
Posted on: Dec 19, 2020. Tags: BHAKTI SONG SONG VICTIMS REGISTER
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों...देशभक्ति गीत-
ग्राम-सुरनार, जिला-दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से गोपीनाथ मंडावी एक देशभक्ति गीत सुना रहे है:
कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों-
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों-
साँस थमती गई नब्ज़ जमती गई-
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया-
कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं-
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया-
मरते मरते रहा बगपन साथियों...(182953) GM
