Letters from Jail: Soni Sori writes to the Nation: Part 2

मेरी शिक्षा को भी गाली दी गयी। मैंने एक गांधीवादी स्कूल माता रुक्मणि कन्या आश्रम डिमरापाल में शिक्षा प्राप्त की है। मुझे अपनी शिक्षा की ताकत पर पूरा विश्वास है, जिससे नक्सली क्षेत्र हो या कोई और समस्या फिर भी शिक्षा की ताकत से सामना कर सकती हूँ। मैंने हमेशा शिक्षा को वर्दी और कलम को हथियार माना है। फिर भी नक्सली समर्थक कहकर मुझे जेल में डाल रखा है। बापूजी के भी तो ये ही दो हथियार थे। आज महात्मा गांधी जीवित होते तो क्या उन्हें भी नक्सल समर्थक कहकर जेल में डाल दिया जाता। आप सभी से इसका जवाब चाहिए।
ग्रामीण आदिवासियों को ही नक्सल समर्थक कहकर फर्जी केस बनाकर जेलों में क्यों डाला जा रहा है। और लोग भी तो नक्सल समर्थक हो सकते हैं। क्या इसलिए क्योंकि ये लोग अशिक्षित हैं, सीधे-सादे जंगलों में झोपडियां बनाकर रहते हैं या इनके पास धन नहीं है या फिरअत्याचार सहने की क्षमता है। आखिर क्यों?
हम आदिवासियों को अनेक तरह की यातनाएं देकर, नक्सल समर्थक, फर्जी केस बनाकर, एक-दो केसों के लिये भी ५-6 वर्ष से जेलों में रखा जा रहा है। न कोई फ़ैसला, न कोई जमानत, न ही रिहाई। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। क्या हम आदिवासियों के पास सरकार से लड़ने की क्षमता नहीं है या सरकार आदिवासियों के साथ नहीं है। या फिर ये लोग बड़े नेताओं के बेटा-बेटी, रिश्तेदार नहीं हैं इसलिए। कब तक आदिवासियों का शोषण होता रहेगा, आखिर कब तक। मैं आप सभी देशवासियों से पूछ रही हूँ, जवाब दीजिये।
जगदलपुर, दंतेवाड़ा जेलों में 16 वर्ष की उम्र में युवक-युवतियों को लाया गया, वो अब लगभग २०-21 वर्ष के हो रहे हैं। फिर भी इन लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। यदि कुछ वर्ष बाद इनकी सुनवाई भी होती है तो इनका भविष्य कैसा होगा। हम आदिवासियों के साथ ऐसा जुल्म क्यों? आप सब सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी संगठन और देशवासी सोचियेगा।
नक्सलियों ने मेरे पिता के घर को लूट लिया और मेरे पिता के पैर में गोली मारकर उन्हें विकलांग बना दिया। पुलिस मुखबिर के नाम पर उनके साथ ऐसा किया गया। मेरे पिता के गांव बड़े बेडमा से लगभग 20-25 लोगों को नक्सली समर्थक कहकर जेल में डाला गया है, जिसकी सजा नक्सलियों ने मेरे पिता को दी। मुझे आप सबसे जानना है कि इसका जिम्मेदार कौन है? सरकार, पुलिस प्रशासन या मेरे पिता। आज तक मेरे पिता को किसी तरह का कोई सहारा नहीं दिया गया, न ही उनकी मदद की गयी। उल्टा उनकी बेटी को पुलिस प्रशासन अपराधी बनाने की कोशिश कर रही है. नेता होते तो शायद उन्हें मदद मिलती, वे ग्रामीण और एक आदिवासी हैं। फिर सरकार आदिवासियों के लिये क्यों कुछ करेगी।
छत्तीसगढ़ मे नारी प्रताड़ना से जूझती
स्व हस्ताक्षरित
श्रीमती सोनी सोरी

Posted on: Feb 10, 2012. Tags: Kamayani Bali

Letters from Jail: Soni Sori writes to the Nation: Part 1

आप सब सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवी संगठन, मानवाधिकार महिला आयोग , देशवासियों से एक आदिवासी पीड़ित लाचार एक आदिवासी महिला अपने ऊपर हुए अत्याचारों का जवाब मांग रही है और जानना चाहती है कि –
(1) मुझे करंट शार्ट देने, मुझे कपड़े उतारकर नंगा करने या मेरे गुप्तांगों में बेदर्दी के साथ कंकड-गिट्टी डालने से क्या नक्सलवाद की समस्या खत्म हो जायेगी। हम औरतों के साथ ऐसा अत्याचार क्यों, आप सब देशवासियों से जानना है।
(2) जब मेरे कपड़े उतारे जा रहे थे उस वक्त ऐसा लग रहा था कोई आये और मुझे बचा ले, पर ऐसा नहीं हुआ। महाभारत में द्रौपदी ने अपने चीर हरण के वक्त कृष्णजी को पुकारकर अपनी लज्जा को बचा ली। मैं किसे पुकारती, मुझे तो कोर्ट-न्यायालय द्वारा इनके हाथो में सौंपा गया था। ये नहीं कहूँगी कि मेरी लज्जा को बचा लो, अब मेरे पास बचा ही क्या है? हाँ, आप सबसे जानना चाहूंगी कि मुझे ऐसी प्रताडना क्यों दी गयी।
(3) पुलिस आफिसर अंकित गर्ग एसपी मुझे नंगा करके ये कहता है कि ‘तुम रंडी औरत हो, मादर सोद गोंड इस शरीर का सौदा नक्सली लीडरों से करती हो। वे तुम्हारे घर में रात-दिन आते हैं, हमें सब पता है। तुम एक अच्छी शिक्षिका होने का दावा करती हो, दिल्ली जाकर भी ये सब कर्म करती हो। तुम्हारी औकात ही क्या है, तुम एक मामूली सी औरत जिसका साथ क्या इतने बड़े-बड़े लोग देंगे।’
आखिर पुलिस प्रशासन के आफिसर ने ऐसा क्यों कहा। इतिहास गवाह है कि देश की लड़ाई हो या कोई भी संकट, नारियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी तो क्या उन्होंने खुद का सौदा किया था। इंदिरा गांधी ने देश की प्रधानमंत्री बनकर देश को चलाया तो क्या उन्होंने खुद का सौदा किया। आज जो महिलाएं हर कार्य क्षेत्र में आगे होकर कार्य कर रही हैं क्या वो भी अपना सौदा कर रही हैं। हमारे देशवासी तो एक दूसरे की मदद करते हैं -एकता से जुड़े हैं, फिर हमारी मदद कोई क्यों नहीं कर सकता। आप सभी से इस बात का जवाब जानना चाहती हूँ।
(4) संसार की श्रृष्टि किसने की। बलशाली, बुद्धिमान योधाओं का जन्म किसने दिया है। यदि औरत जाति न होती तो क्या देश की आजादी संभव थी। मैं भी तो एक औरत ही हूँ, फिर मेरे साथ ऐसा क्यों किया गया।जवाब दीजिए. क्रमश:

Posted on: Feb 09, 2012. Tags: Kamayani Bali

Letters from Jail: Soni Sori writes to her lawyer- part 4

“क्या करती इससे अच्छा तो जेल जाना ही ठीक है| सोचकर साइन कर दिया| जज मेडम बैगेर देखे सुने हमे जेल भेज दिया बहुत देर बाद कोर्ट से फिर दंतेवाडा थाना में लाए दो व्यक्ति पहले से ही थाने में मौजूद थे इतनी परेशानी होने के बाद भी वो दोनों व्यक्ति हमे पूछताछ कर रहे थे कविता श्रीवास्तव के बारे में मैंने कहा मेरी हालात ठीक नहीं है| इस वक्त मैं बात करने योग्य नहीं हूँ| मुझे जबरदस्ती ना करे| तब तक रामदेव मेरा भाई परिवार के साथ थाना आया और कहने लगा मेरी दीदी को इधर क्यों लाए हो कोर्ट ने तो जेल ले जाने की परमिशन दिया है| तब तुरंत जगदलपुर के लिये रवाना किये| जगदलपुर सेन्ट्रल जेल में शाम को करीब 7-8 बजे पहुंचे मेरी हालात देखकर जेल वाले ने दाखिला नहीं दिया| फिर दंतेवाडा का ही गार्ड हमें जगदलपुर अस्पताल में भर्ती किया| इलाज होता रहा मंगलवार दिनांक 11/10/2011 को जगदलपुर का डॉक्टर रायपुर के लिये रिफर किया| शाम को जगदलपुर अस्पताल से करीब 10-11 बजे रायपुर के लिये निकले रायपुर में बुधवार दिनांक 12/10/2011 सुबह पहुचे रायपुर अस्पताल में भर्ती किया गया इलाज होता रहा| रायपुर का गार्ड जबरदस्ती डॉक्टर से कहकर हमे उसी दिन शाम को करीब 8-9 बजे सेन्ट्रल जेल रायपुर में ले आये हमने बहुत कोशिश किया कि सर हमें तकलीफ है| इलाज होने दो फिर भी जबरन ले आये और कहने लगे लाल गेट को दिखते ही अपने आप ठीक हो जाओगे ऐसे कहे है| चलने योग्य भी नहीं थी बड़ी तकलीफों का सामना करते हुए जेल की गेट को प्रवेश किया|

स्व हस्ताक्षरित
प्रार्थी
श्रीमती सोनी सोरी (सोढ़ी)

Posted on: Feb 02, 2012. Tags: Kamayani Bali

Letters from Jail: Soni Sori writes to her lawyer- part 3

Kamayani reads page 3 of Soni Sori’s lettter-
तब तक सुबह हो चुका था रविवार दिनांक 9/10/2011 उस दिन भर दर्द को अंदर ही अंदर सहती रही किससे कहती वहाँ पर मेरा अपना कोई था ही नहीं| सोमवार दिनांक 10/10/2011 को सुबह लेडीज पुलिस हमे कहने लगी फ्रेश हो जाओ तुमको कोर्ट ले जाना है| तब मैंने कहा मेडम मुझे चक्कर आ रहा है| मेरी हिम्मत नहीं हो रही है| कुछ देर रुक जाओ कहने लगी तुम्हें जल्दी तैयार होने को बोले है| नहीं तो हमे गाली पडेगा| तब मैंने कहा एक कप चाय पीला दीजिये जिससे मैं हिम्मत कर सकू चाय पीया और धीरे धीरे बाथ रूम तक गई कुछ देर बाद चक्कर आया तो गिर गई| मैं पहले से ही बाथरूम तक जाने लायक नहीं थी फिर भी दबाव डालकर बाथरूम में प्रवेश होने के लिये भेजा गया| शायद ये लोग अच्छी हालात बनाकर मुझे कोर्ट न्यायालय में ले जाना चाहते थे| पर ऐसा नहीं हुआ बाथरूम में गिरते ही बेहोश हो गई फिर दंतेवाड़ा थाना से निकालकर दंतेवाडा अस्पताल में ले गये काफी देर बाद मुझे होश आया| होश आने के बाद दर्द और ज्यादा बढा गया ना हो सकी ना बिस्तर से उठ सकी पूरी तरह घायल हालात में थी प्रताडना का जिक्र किसी से उस वक्त नहीं किया मुझे धमकी दिया गया था फिर भी कोशिश करती रही कि मौका देखकर मेरे ऊपर किया गया प्रताड़ना के बारे में बताऊ पुलिसकर्मी तो हर पल मेरे साथ थे| फिर मुझे दंतेवाडा अस्पताल से करीब दो बजे गाड़ी के बीच सीट में सुला कर कोर्ट में लाया गया बहुत देर तक कोर्ट न्यायालय के बाहर ही रखे न्यायालय के अंदर नहीं ले गये और एस डी पी ओ न्यायालय के अंदर से कागजात लेकर आया और कहने लगा इसमें साइन करो मैंने कहा सर मैं कुछ जज के सामने बयान देना चाहती हूँ| तब कहने लगा ये सब बाद में होगा| ये सब कागजात तुम्हें जेल भेजने के लिये है| साइन करो...क्रमश:

Posted on: Jan 30, 2012. Tags: Kamayani Bali

Letters from Jail : Soni Sori writes to her lawyer...Part 2

Kamayani reads second page of Soni Soris letter-
कुछ कागजों में साइन करने को कहा कुछ बातों को लिखकर देने को कहा जब मैंने मना करने लगी तो कडक बातों से दबाव डाला फिर भी मैंने इंकार करने लगी तब करेंट सार्ट पैर कपड़ा में देने लगे कुछ देर के लिये रोक दिया और कहने लगा हम जो कह रहे हैं| वो करो इसी में आपकी भलाई है| तुम बच जाओगी समझी| हिमाँशु, स्वामी अग्निवेश, प्रशांत भूषण, कोलिन, लिंगाराम, कविता श्रीवास्तव, मेधा पाटेकर, अरुंधती राय, नंदनी सुन्दर, मनीष कुंजम, रामा सोडी, एस्सार कंपनी का मालिक ये सब के नाम से लेटर लिखकर दो ये सब नक्सली समर्थक है| मैं और लिंगा दिल्ली तक यहाँ की हर खबर देते थे जो मैं जानती हूँ ये लोग बुलाने पर मैं दिल्ली गई थी एस्सार कंपनी के अधिकारी नक्सली तक रूपये पहुचानें के लिये हमेशा मनीष कुंजम, रामा सोडी और मुझे देते थे इस तरह से हमलोग नक्सली का मदद करते थे बहुत सारे बाते है | इस तरह का खत लिखने को कहा| जो मैं लिखकर नहीं दी ना ही उनके लिखा कागज पर साइन भी नहीं किया| मदर सौद हमारे लिखित कागज में साइन कर बहुत ही दबाव डाले मैंने कहा आप जान ले लो पर मैं जो गुनाह की नहीं और जिन लोगों के बारे में कह रहे हो| हो भी नहीं करूंगी| मैंने कहा इससे अच्छा मार दो कहने लगा ये भी कर लेते पर नहीं कर सकते क्योंकि तुम्हें दिल्ली से अरेस्ट किया गया है| अब तुम मेरी बात् नहीं मान रही हो तो सजा देकर ही जेल में भेजेंगे ताकि शर्म से जेल की दीवारों में अपना सर पटककर मर जाउंगी शिक्षित महिला हो इतनी शर्म को तो लेकर जी तो नहीं पाऊँगी| इस तरह का बाते कहा और फिर करंट सार्ट देने को कहा करंट सार्ट दे देकर मेरे कपड़े को उतराया गया नंगा करके खड़ा रखा| एस पी अंकित गर्ग कुर्सी में बैठकर हमे देख रहा था| शरीर को देख देखकर गन्दी गन्दी गालियां देकर बेइज्जत किया कुछ देर बाद बाहर निकला और कुछ समय बाद फिर तीन लडके को भेजा वो लडके उल्टी सीधी हरकते करने लगे और धक्का देने पर गिर गई फिर मेरे शरीर में बेदर्दी के साथ डाला गया सहा नहीं पाई बेहोश की हालात में थी काफी देर बाद होश आया तो मैंने अपने आप को जिस रूम में सोई थी वह पाई...क्रमश:

Posted on: Jan 29, 2012. Tags: Kamayani Bali

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